पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण जरूरी

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण जरूरी

Rajeev Pachauri | Updated: 08 Aug 2019, 09:52:22 PM (IST) Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

गंगापुरसिटी . आदिवासी समाज की ओर से दो दिवसीय आदिवासी दिवस महोत्सव का गुरुवार को आगाज हुआ। डिबस्या रोड स्थित मत्स्य धाम में सुबह विधायक रामकेश मीना ने ध्वज स्थापना की। इसके बाद मीन भगवान के समक्ष दीप प्रज्जवलन और पूजा के साथ महोत्सव का आगाज हुआ। साथ ही पौधारोपण किया गया। शुक्रवार को भी पौधारोपण किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला व पुरूषों ने शिरकत की।

गंगापुरसिटी . आदिवासी समाज की ओर से दो दिवसीय आदिवासी दिवस महोत्सव का गुरुवार को आगाज हुआ। डिबस्या रोड स्थित मत्स्य धाम में सुबह विधायक रामकेश मीना ने ध्वज स्थापना की। इसके बाद मीन भगवान के समक्ष दीप प्रज्जवलन और पूजा के साथ महोत्सव का आगाज हुआ। साथ ही पौधारोपण किया गया। शुक्रवार को भी पौधारोपण किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला व पुरूषों ने शिरकत की।


इस मौके पर विधायक मीना ने पौधारोपण के महत्व से अवगत कराया। साथ ही उपस्थित महिला-पुरुषों को आदिवासी दिवस ९ अगस्त को एक-एक पौधा आवश्यक रूप से लगाने व उसका संरक्षण करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र संघ की भावना के अनुरूप किया जा रहा है।

पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इससे ऋतु परिवर्तन संतुलन बिगड़ रहा है। इसके चलते कम वर्षा से प्रदेश प्रभावित हो रहा है। इसका मुख्य कारण वन क्षेत्र में कमी होना है। आदिवासी समाज पर्यावरण संरक्षण में सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं को पौधारोपण पर ध्यान देना चाहिए। विश्व आदिवासी दिवस पर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। मत्स्य धाम पर शुक्रवार को भी पौधारोपण किया जाएगा। साथ ही जनजाग्रति अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत पर भी पौधारोपण कार्यक्रम किए जाएंगे।


पद दंगल में झूमे श्रोता


आदिवासी दिवस महोत्सव के तहत गुरुवार को पद दंगल भी हुआ। गायन की अनूठी शैली में प्रस्तुत रचनाओं को सुनकर श्रोता झूूम उठे। झण्डूराम मीना व मंडली ने ‘संविधान बनाया, इतिहास रचाया सारो रे, जैकू नमन करो, जै करगो भलो हमारों रे...’ तथा अम्बेडकर कू याद करो, छुट्टन को देबोरे बधाई, बिरसा मंड़ा की जय बोलो रे मर्द-लुगाई...’ की प्रस्तुति दी। धवलेराम व मंडली ने ‘आच्छो साधो सासरो बलम भूखी मरगी रे, जामण जनगी बरण जन्म दुखारी करगी रे...’ रचना प्रस्तुत कर भील व भीलणी का प्रसंग सुनाया। इसी प्रकार रमेश व मंडली की ओर से रचना प्रस्तुत की गई।


महिला संगीत आज


महोत्सव स्थल मत्स्य धाम पर शुक्रवार को महिला संगीत का आयोजन होगा। दोपहर १२ बजे से २ बजे तक आदिवास समाज की महिलाओं की ओर से महिला संगीत प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा पद दंगल भी होंगे।

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