म्हाने पूजण द्यो गणगौर...

म्हाने पूजण द्यो गणगौर...

Ramkaran Katariya | Publish: Mar, 14 2018 04:43:36 PM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

गांव की गलियों में गूंजने लगे गीत

गंगापुरसिटी. धर्म-कर्म, त्योहार-उत्सव, मेले और दंगल... जैसे आयोजनों को लेकर प्रदेश की छठा ही निराली है। कैसा भी अवसर हो, लोग उसे पूरी उमंग व उत्साह से मनाते हैं। होली का त्योहार खत्म होने के आठ दिन बाद शीतला माता की पूजा की गई। अब इसके बाद से गणगौर के गीत गूंजने लगे हैं। यह नजारा शहर समेत समीप के ग्रामीण अंचलों भी देखा जा सकता है। गणगौर का त्योहार नजदीक आने के साथ ही गांव की गलियों में इसके गीत गूंजने लगते हैं। वैसे तो होली दहन के साथ ही गणगौर पूजन की तैयारियां शुरू हो जाती है, जो लगातार सोलह दिन चलती है और अंतिम दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर मनाई जाती है।

त्योहार नजदीक आने के साथ महिलाओं, नवविवाहिताओं तथा बालिकाओं में पूजन के प्रति उत्साह नजर आ रहा है। बालिकाएं कुएं से जल भरकर एवं दोब लेकर आती देखी जा सकती है। ये किसी एक स्थान पर बैठकर गणगौर पूजन करतीं है। गीत गाती हुई ये महिलाएं व बालिकाएं रास्ते से गुजरती है तो गणगौर के आने आभास होता है। मंगलवार को क्षेत्र के लिवाली गांव में गणगौर पूजन का ऐसा ही नजारा देखा गया। बगीची रोड पर बालिकाएं गणगौर पूजन के लिए गीत गाती हुई गुजरी। क्षेत्र के अन्य गांवों में भी इसी तरह गणगौर पूजन का क्रम जारी है।

यह त्योहार का महत्व
चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर पूजन किया जाता है। गणगौर दो शब्द से मिलकर बना है। जिसमें गण का मतलब शिव तथा गौर का मतलब पार्वती माना जाता है। गणगौर के दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना में व्रत करती है। कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर की कामना में व्रत करती हैं। गणगौर पूजन के बाद उसका विसर्जन किया जाता है। कहते हैं कि पार्वती ने भी सोलह दिन तक पूजन किया था।



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