तीन तलाक कानून के विरोध में निकाला जुलूस

तीन तलाक कानून के विरोध में निकाला जुलूस
तीन तलाक कानून के विरोध में निकाला जुलूस

Rajeev Pachauri | Updated: 23 Aug 2019, 09:56:31 PM (IST) Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

गंगापुरसिटी . तीन तलाक कानून के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम समाज के महिला-पुरुष सडक़ पर उतर आए। उन्होंने जुलूस निकाल कर कानून का विरोध किया। साथ ही उपखंड अधिकारी विजेन्द्र मीना के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज कर कानून को वापस लिए जाने की मांग की।

गंगापुरसिटी . तीन तलाक कानून के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम समाज के महिला-पुरुष सडक़ पर उतर आए। उन्होंने जुलूस निकाल कर कानून का विरोध किया। साथ ही उपखंड अधिकारी विजेन्द्र मीना के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज कर कानून को वापस लिए जाने की मांग की।


तीन तलाक कानून के विरोध में जुमा की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के पुरुष जामा मस्जिद पर एकत्र हुए। वहीं महिलाएं दशहरा मैदान में एकत्र हुई। यहां से महिलाएं व बालिकाएं जामा मस्जिद पहुंंची। इसके बाद आमीन सदर व मौलवी खलीक अहमद कासमी के नेतृत्व में जुलूस प्रारंभ हुआ। महिलाएं हाथों में ‘शरीअत में हस्तक्षेप बंद करो, तीन तलाक बिल वापस लो, तीन तलाक बिल मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखलंदाजी है...’ नारे लिखी हुई तख्तियां लेकर चल रही थीं। फव्वारा चौक, कोर्ट सर्किल होते हुए रैली मिनी सचिवालय पर पहुंची।

सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस जाप्ता भी रैली के साथ चल रहा था। इसके बाद महिला व पुरुषों के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी मीना को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मौके आमीन सदर, साजिद सहराई, मारूफ अहमद, सलाम भाई, पप्पन, निसार, अलीम खान, आसिम खान, अनवार खान, डॉ. अक्सा, रिहाना, आमीन खानम, उस्मान एवं शाहिद खान आदि मौजूद थे। मिनी सचिवालय पर भी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, पुलिस उपाधीक्षक प्रतापमल केडिया सहित पुलिस जाप्ता तैनात था। वहीं मुस्लिम समाज के जुलूस के मद्देनजर पुलिस की ओर से जामा मस्जिद क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों को डायवर्ट किया गया।


कानून पर जताया एतराज


राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में बताया है कि सभी को सामाजिक रीति-रिवाज को लेकर आजादी है। जैसे सिखों को कृपाण रखने और जैन बंधुओं को संथारा की महजबी आजादी है। कानून में तलाक देने वाले को तीन साल की सजा और महिला को मेन्टीनेंस दिए जाने का प्रावधान है। पति के जेल जाने पर वह मेन्टीनेंस कैसे अदा कर सकेगा। शरीअत में तलाक से सम्बन्धित सारे प्रावधान पहले से है। कानून में इसे जुर्म बनाकर जेल भेजने का प्रावधान गलत है। इस कानून से सामाजिक ताना-बाना टूटने का खतरा है। ज्ञापन में तीन तलाक कानून पर पुर्नविचार करते हुए इसे खारिज करने की मांग की गई है।


बिल को वापस लिया जाए


तीन तलाक कानून शरीअत और कुरान के खिलाफ है। यह कानून महिला व पुरुषों पर जुर्म है। सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए।
- मौलवी खलीक अहमद कासमी


काला कानून है


कानून को आपराधिक बनाया गया है। तीन साल जेल में डालने वाला है, जबकि कोर्ट ट्रिपल तलाक को जीरो तलाक कह चुका है। पूरे विश्व में सबसे कम तलाक मुस्लिम समुदाय में है। तीन तलाक बिल काला कानून है। साम्प्रदायिक माहौल बिगाडऩे वाला कानून है।
-साजिद सहराई

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