नियम दरकिनार कर हो रहा पर्यटक वाहनों का पंजीयन

बिना सेफ्टी पाइप के दौड़ रहे पर्यटक वाहन

By: rakesh verma

Published: 11 Sep 2017, 11:28 AM IST

सवाईमाधोपुर. हमारे जिले में रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान बाघों की नगरी के नाम सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। हर पर्यटन सीजन में लाखों की संख्या में देशी विदेशी पर्यटक यहां बाघों की अठखेलियां देखने के लिए यहां आते हैं इससे वन व पर्यटन विभाग को ना करोड़ों की आय होती है। लेकिन इसके बाद भी यहां विभागीय अनदेखी के चलते पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा दोनों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है बल्कि वाहन मालिक अपने निजी फायदे के लिए नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से पर्यटक वाहन जंगल में दौड़ा रहे है ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा हुआ है।

 


नहीं लगाए सेफ्टी पाइप
वन विभाग ने पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष २०१४ में ही पर्यटक वाहनों में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सेफ्टी पाइप लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी अभी भी अधिकतर जिप्सियों में वाहन मालिकों ने सेफ्टी पइप नहीं लगाए हैं।

 


ये कहते हंै नियम
नियमानुसार जंगल में भ्रमण के लिए जाने वाले कैंटर व जिप्सियों में दो सीटों के मध्य न्यूनतम १५ इंच की दूरी होना आवश्यक है। वहीं सीट पर ४.५ इंच मोटा कुशन होना भी अनिवार्य है। कैंटर मेें पर्यटक सीटों, गाइड व चालक सीट के अलावा कोई और सीट नहीं होने, हर सीट के पीछे सीट क्रमांक अंकित होने, व कैंटर व जिप्सियों में सेफ्टी पाइप लगवाना अनिवार्य है लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में पर्यटक वाहन नियमों व मापदण्डों की पालना नहीं कर रहे हैं।


हादसे के बाद भी नहीं चेत रहे
गत वर्ष पर्यटन सीजन के दौरान रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के जोन नम्बर एक मेें एक जिप्सी अनियंत्रित होकर पलट गई थी उस समय भी जिप्सी में लगें सेफ़्टी पाइप से ही पर्यटकों की जान बची थी लेकिन इसके बाद भी वाहन मालिक व वन विभाग सबक लेने को तैयार नहीं है।


रणथम्भौर में ७१९ पर्यटक वाहन
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में वर्तमान में कुल ७१९ पर्यटक वाहन है इनमें से ३०७ कैंटर व ४१२ जिप्सियां है। अधिकतर कैंटरों में प्रत्येक सीट पर सीट बेल्ट लगी हुई है ओर सुरक्षा के लिए सेफ्टी बेल्ट भी मौजूद है पर रणथम्भौर में संचालित करीब सौ जिप्सियों में अब तक सेफ़्टी बेल्ट व सेफ्टी पाइप नहीं लगाए गए हैं।

शीशे तक गिरा लेते हैं
पर्यटकों को भ्रमण के दौरान वीआईपी एहसास कराने के लिए जिप्सी चालक नियमों को ताक पर रखकर जिप्सी के कांच तक को जिप्सी के बोनट पर गिरा देते हैं ऐसे में जिप्सी चारों ओर से खुल जाती है और हादसे की संभावना भी बढ़ जाती है जबकि भ्र्रमण के दौरान जिप्सी के कांच को गिराना प्रतिबंधित है।


इनका कहना है....
इस बारे में जानकारी नहीं है इस समय नए वाहनों के पंजीयन का कार्य चल रहा है। लेकिन सेफ्टी पाइप के बिना वाहनों को जगंल में चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- बीजू जॉय, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान, सवाईमाधोपुर।

rakesh verma Bureau Incharge
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