मण्डी में हड़ताल से पल्लेदारों की रोजी-रोटी पर आएगा संकट

मण्डी में हड़ताल से पल्लेदारों की रोजी-रोटी पर आएगा संकट

By: Subhash

Published: 25 Aug 2020, 08:10 PM IST

सवाईमाधोपुर. केन्द्र सरकार के नए अध्यादेश के विरोध अब फिर से कृषि उपज मण्डियों में जिंसों का कारोबार ठप रहेगा। ऐसे में प्रदेश में आगामी 25 से 28 अगस्त से फिर चार दिन से तक मण्डियों में कारोबाद बंद रहेगा। जिले में भी इसका सीधा असर व्यापारियों के साथ पल्लेदार, किसानों आदि पर पड़ेगा। कोरोना में पहले ही बेरोजगारी की मार झेल रहे पल्लेदारों, किसानों, छोटे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
जिले में कृषि उपज मण्डिया
जिले में सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय पर बी श्रेणी एवं गंगापुरसिटी में ए श्रेणी की मण्डी संचालित है। इसके अलावा खण्डार, बौंली व चौथकाबरवाड़ा में गौण मण्डियां है। ऐसे में चार दिन तक कृषि मण्डियों मे हड़ताल रहने से सैकड़ो पल्लेदार का रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
पल्लेदारो को होगा नुकसान
जिले की कृषि उपज मण्डियो में व्यापारियो की ओर से चार दिन तक हड़ताल करने से करीब एक हजार पल्लेदारों को नुकसान होगा। पल्लेदारों की स्थिति तो यह है कि कईयों के तो दिनभर मजदूरी के बाद उनको जो भुगतान मिलता है,उसी से उनके घर का गुजारा चलता है। मण्डियों में हड़ताल से उनका एक तरह से रोजगार छिन जाएगा।
अध्यादेश को वापस लेने की कर रहे मांग
जयपुर खाद्य व्यापार संघ के तत्वावधान में गत दिनों जयपुर में हुई व्यापारियों की बैठक में आगामी आदेश तक मंडी समितियों को मंडी शुल्क व कृषक कल्याण शुल्क का भुगतान नहीं करने का निर्णय किया है। ऐसे में 28 अगस्त को व्यापारी फिर से बैठक कर आगामी रणनीति बनाएंगे। अध्यादेश को व्यापारी, किसान व मजदूर विरोधी बताते हुए व्यापारियों ने इसे वापस लेने की मांग की।
ये है प्रमुख मांग
व्यापारियों की मांग है कि या तो जिस तरह से मंडी के बाहर मंडी सेस और दूसरे सेस समाप्त किए गए हैं, उसी तरह मंडियों में भी इन्हें खत्म किया जाए। यदि केन्द्र सरकार यह नहीं कर सकती है तो मंडी के बाहर कार्य करने वाले व्यापारियों से भी राज्यों में लागू मंडी टैक्स वसूला जाए। जानकारी के अनुसार अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि मंडियों से बाहर काम करने वाले व्यापारी, मिल संचालक व वेयर हाउसेज बिना मंडी लाइसेंस और बिना मंडी सेस चुकाए खरीद-बिक्री कर सकेंगे। यह राज्य के बाहर भी कृषि जिंसों की खरीद-बिक्री बिना लाइसेंस और बिना मंडी सेस के कर सकते हैं। ऐसे में जो लोग बड़ी राशि लगाकर मंडियों में व्यापार कर रहे हैं,उन पर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार की दोहरी नीति से रोष
केन्द्र सरकार के अध्यादेश के अनुसार मंडी परिसर से बाहर पैन कार्ड धारकों को कारोबार करने की छूट दी है। इनको न तो कारोबार के लिए कोई लाइसेंस लेना पड़ेगा तथा न ही इन पर मंडी शुल्क देना तय किया है। जबकि मंडी परिसर में कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए लाइसेंस लेना भी अनिवार्य है तथा मंडी शुल्क व कृषक कल्याण शुल्क भी देना पड़ता है। ऐसे मे सरकार की दोहरी नीति से व्यापारी वर्ग में रोष है।

फैक्ट फाइल
-जिले में बड़ी कृषि उपज मण्डियां-2
-जिले में गौण मण्डियां-3
-जिले में कुल व्यापारी-400
-जिले मेंं कुल पल्लेदार-1000
जिला मुख्यालय पर कुल व्यापारी-80
-जिला मुख्यालय पर पल्लेदार-250
-जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन जिन्सों की आवक-100 बोरी।
-प्रतिदिन आने वाले किसानों की संख्या-25 से 30

कोरोना के चलते पहले ही रोजगार की मार झेल रहे है। चार दिन तक मण्डी बंद रहेगी तो आर्थिक नुकसान होगा।
छोटूलाल, पल्लेदार, कृषि उपज मण्डी सवाईमाधोपुर

इस बार कोरोना महामारी से किसान परेशान है। कृषि उपज मण्डी के चार दिन बंद रहने किसानों पर असर पड़ेगा। खरीद-फरोख्त बंद रहने से किसानों को भी नुकसान होगा।
बोलतीराम गुर्जर, किसान, महू

इनका कहना है
कृषि उपज मण्डी बंद रही तो पल्लेदारों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। पल्लेदारों को कोरोना में भी सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला। पल्लेदारों को नियमित रूप से रोजगार मिलना चाहिए।
रामकिशन गुर्जर, कृषि उपज मण्डी पल्लेदार यूनियन अध्यक्ष

बंद रखने का निर्णय
खाद्य व्यापार संघ ने मण्डी टैक्स के विरोध में 25 से 28 अगस्त तक प्रदेश की मण्डियों को बंद रखने का निर्णय किया है। ऐसे में आगामी आदेश तक मंडी समितियों को मंडी शुल्क व कृषक कल्याण शुल्क का भुगतान नहीं करने का निर्णय किया है।
दीनदयाल अग्रवाल, महामंत्री, ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन सवाईमाधोपुर

Subhash Reporting
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