निशक्तजनों की कश्ती को नहीं मिल रहा ‘खेवनहार’

गंगापुरसिटी . निशक्तजनों के अधिकार एवं उत्थान के दावे कागजों के बाहर आते प्रतीत नहीं हो रहे हैं। भले ही हर साल विश्व दिव्यांग (विकलांग) दिवस मनाया जा रहा हो, लेकिन बहुतेरे दावों के बीच दिव्यांगों की जुबां पर अभी भी ‘टीस’ है। विश्व विकलांग दिवस पर शहर में विभिन्न स्थानों दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं को टटोला तो स्थिति बेहतर नजर नहीं आई।

गंगापुरसिटी . निशक्तजनों के अधिकार एवं उत्थान के दावे कागजों के बाहर आते प्रतीत नहीं हो रहे हैं। भले ही हर साल विश्व दिव्यांग (विकलांग) दिवस मनाया जा रहा हो, लेकिन बहुतेरे दावों के बीच दिव्यांगों की जुबां पर अभी भी ‘टीस’ है। विश्व विकलांग दिवस पर शहर में विभिन्न स्थानों दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं को टटोला तो स्थिति बेहतर नजर नहीं आई।


सरकारी स्तर पर निशक्तजनों के विकास एवं सुविधाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। इनके लिए सरकारी दफ्तरों, संस्थानों एवं स्कूलों में रैम्प आदि की सुविधाएं दी जाती हैं, ताकि निशक्तजन संबंधित अधिकारी तक या स्कूलों में बच्चे अपनी कक्षा तक निर्बाध रूप से पहुंच सकें, लेकिन सरकारी स्तर पर इस ओर उदासीनता के चलते आज भी निशक्तजनों के लिए ‘साहब’ के पास गुहार लगाना ‘मुश्किल सफर’ साबित हो रहा है। यही हाल निशक्तजनों के लिए बने विशेष शौचालयों का है। अधिकांश स्कूलों एवं सरकारी इमारतों में निशक्तजनों के लिए कोई सुविधा नहीं है।


आसान नहीं बैंक की चौखट पार करना


सरकारी स्तर पर बुजुर्ग एवं निशक्तजनों के लिए कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। निशक्तजनों को हर माह निशक्तजन व वृद्धावस्था पेंशन एवं अन्य सरकारी योजनाओं के लिए बैंकों की चौखट पार करनी पड़ती हैं, लेकिन अधिकांश जगह रैम्प की सुविधा नहीं होने से दिव्यांगों के लिए यह चढ़ाई चढऩा आसन नहीं है। शहर की अधिकांश सरकारी एवं निजी बैंकों में इस प्रकार की कोई सुविधा नजर नहीं आई।


सफर की डगर में भी रोड़ा


निशक्तजनों के सफर की राह आसन करने के लिए रेलवे की ओर से ट्रेनों में निशक्तजनों के लिए अलग से कोच की व्यवस्था है। साथ ही किराए में भी रियायत दी जाती है, लेकिन निशक्तजनों के रेलवे स्टेशन परिसर में कदम रखने के साथ ही सफर की डगर में मुश्किल शुरू हो जाती है।

यहां टिकट के लिए निशक्तजनों के लिए विशेष टिकट काउंटर नहीं है। उनको ऊंचे बने काउंटर पर ही लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद एक प्लेटफॉर्म पार करना उनके लिए चुनौती भरा सफर साबित होता है। रेलवे की ओर से एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए ओवरब्रिज बनाया गया है, लेकिन निशक्तजनों के लिए इतनी सीढिय़ां चढऩा दुश्कर होत है।


शिक्षा को भी दूर से बढ़ावा


शिक्षा के मंदिर भी निशक्तजनों के लिए कोई खास सुविधा देते नजर नहीं आ रहे हैं। मुख्य ब्लॉक शिक्षा कार्यालय के अधीन विद्यालयों की बात की जाए तो यहां प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के करीब २०१ विद्यालयों में ऐसे बच्चों के लिए विशेष शौचालयों की कोई सुविधा नहीं है।

इनमें ८७ प्राथमिक व ५६ उच्च प्राथमिक एवं १६ माध्यमिक व ५८ उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं, जबकि सरकार की निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए शौचालय एवं रैम्प का प्रावधान है। हालांकि इस बीच निर्वाचन विभाग की सख्ती के बाद अधिकांश सरकारी स्कूलों में रैम्प की सुविधा उपलब्ध हो सकी है।


यूं झलका निशक्तजनों का दर्द


बैंक एवं रेलवे स्टेशन समेत विभिन्न सरकारी इमारतों में रैम्प की सुविधा नहीं होने से निशक्तजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में जिला कलक्टर समेत कई आला प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ज्ञापन के माध्यम से सूचित कर गुहार लगाई है, लेकिन निशक्त जनों की परेशानी कम नहीं हुई है। सरकार को प्राथमिकता के साथ निशक्तजनों की समस्याओं को दूर करना चाहिए।


- मुरारीलाल बैरवा, जिलाध्यक्ष विशेष योग्य जन विकास समिति


निशक्तजनों की समस्याओं के प्रति सरकार को गंभीरता बरतनी चाहिए। रेलवे स्टेशन पर निशक्तजनों के विशेष टिकट काउंटर व प्लेटफॉर्म पार करने की सुविधा एवं अलग से शौचालयों का निर्माण कराया जाना चाहिए। इस बारे में शासन-प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी कोई खास राहत नहीं मिल पाई है। सामान्य चिकित्सालय में भी उनके लिए विशेष काउंटरों की व्यवस्था नहीं है।
- खालिद अली, संरक्षक निशक्त जन जागरण मंच

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