ये साबित हो रहे मां हिन्दी के पहरेदार

Shubham Mittal

Publish: Sep, 17 2017 12:33:37 (IST)

Sawai Madhopur, Rajasthan, India
ये साबित हो रहे मां हिन्दी के पहरेदार

हिन्दी की विरासत को सहेज रहे युवा
साहित्य व लेखन के क्षेत्र में दे रहे योगदान

सवाईमाधोपुर.आधुनिकता के वर्तमान दौर में जहां आजकल युवा अंग्रेजी व अन्य विदेशाी भाषाओं की ओर रुख कर रहे हैं। जहां एक ओर युवाओं का मन अन्य विदेशी भाषाओं में रमता नजर आ रहा है वहीं आज भी जिले में कुछ ऐसे होनहार युवा हैं जो ना केवल मां हिन्दी के संर्वधन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं बल्कि अपने लेखन कौशल के बल पर समाज में एक अलग पहचान भी बना रहे हैं। १४ सितम्बर को हिन्दी दिवस है ऐसे में युवाओं से मुलाकात की और उनके इस हुनर के बारे में जाना पेश है एक रिपोर्ट....

 

नवीन रचनाकारों के लिए प्रकाशित की पत्रिका
गंगापुर सिटी के विकास शर्मा करीब आठ साल से साहित्यिक व लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं इस दौरान उन्होंने बढ़ती कलम, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर आदि कई पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन का कार्य भी किया है लेकिन जिले में नए लेखकों को उपयुक्त मंच नहीं मिलने से दुखी विकास ने नवीन व युवा साहित्कारों व लेखकों को मंच व अवसर उपलब्ध कराने के लिए २०१४ में विविधा नाम की एक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया था इसमें जिले के युूवा रचनाकारों की रचनाओं को प्रमुखता से स्थान दिया गया लेकिन कुछ साल बाद धन के अभाव में इस पत्रिका का प्रशासन भी बंद हो गया।
इंटरनेंट पर भी लिख रहे कविता
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं के अतिरिकत विकास इंटरनेट पर भी सक्रिय रूप से लेखन कार्य कर रहे हैं। वह इंटरनेट पर जय विजय नामक एक प9िका के लिए नियमित रूप से कविताएं लिख रहे हैं।

 

ये मिले पुरस्कार
विकास को उत्कृष्ट लेखन कार्य के लिए अब तक कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें २००३ में दूरदर्शन के कल्याणी कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ स्लोगन लेखन के लिए, २०१२ में साहित्यिक क्षेत्र में योगदान के लिए गंगापुर सिटी के चाणक्य परिवार संस्था की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। हैदराबाद की साहित्य मंजरी की ओर से आयोजित प्रतियोंगिता में भी देश में चौथा स्थान प्राप्त किया था।
हास्य व्यंग्य के नवीन हस्ताक्षर हैं विनय
कुछ इस प्रकार का ही कार्य गंगापुर सिटी के ही विनय शर्मा कर रहे हैं। ३२ साल का यह युवा रचनाकार जिले में हास्य व्यंग्य का नवीन हस्ताक्षर है। बढ़ती कलम आदि कई पत्र पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी है। अब जल्द ही इनका एक काव्य संग्रह भी प्रकाशित होने वाला है। इनकी प्रमुख रचना कुछ तो बात है काव्य संग्रह है।
रविन्द्र मंच तक दिखाई प्रतिभा
कुछ ऐसी ही प्रतिभा के धनी खैरदा के कुलदीप शर्मा भी है। पेशे से शिक्षा कुलदीप करीब पांच सालों से निंरतर रूप से लेखन कार्य में सक्रिय है। इन्होंने सामाजिक विषयों पर अब तक कर्ई कविताएं लिखी है साथ ही जयपुर के रविन्द्र मंच पर भी प्रस्तोता की भूमिका का निर्वाहन किया है लेकिन यह युवा प्रतिभा आज भी प्र्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण साहित्य व लेखन जगत में कोई खास पहचान नहीं बना पाई है।

 

सामाजिक विषयों पर लिखी किताब
बामनवास तहसील की भावना मीणा ने भी लेखन के क्षेत्र में भीड़ से अलग अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान में दिल्ली में पढ़ाई कर रही भावना ने आवाज ए मूलनिवासी नाम की किताब लिख सामाजिक मुद्दों पर विचार व्यक्त किए। इस किताब को अमेजन पर बेस्ट सेलर का पुरस्कार मिल चुका है। इसके अतिरिक्त भावना ने फेंसबुक पर' सुहानी का रूहानी सफरÓ नाम से पेज बनाकर निरंतर ऑनलाइन लेखन कर रही हैं।

 

भजन लेखन में बना रही पहचान
कुछ ऐसा ही काम शहर निवासी विजयलक्ष्मी शर्मा कर रही है यह सालों से भजन गायन कर रही है अब २०१५ से उन्होंने भजन लिखना भी शुरू कर दिया है। विजय लक्ष्मी ने बताया कि वह वर्तमान में जयपुर से संगीत की शिक्षा ग्रहण कर रही है उन्हें भजन लिखने का शौक शुरू से ही है पर अब तक उनका कोई भजन व अन्य रचना प्रकाशित नहीं हो पाई है।

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