खुशी से झूम उठा सैनिकों का गांव

खुशी से झूम उठा सैनिकों का गांव
गंगापुरसिटी. एयर स्ट्राइक के बाद गांव में सेना की जांबाजी के किस्से सुनाते पूर्वसैनिक एवं ग्रामीण।

Rakesh Verma | Updated: 27 Feb 2019, 12:43:29 PM (IST) Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

खुशी से झूम उठा सैनिकों का गांव

गंगापुरसिटी. पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो रेण्डालय गुर्जर के लोगों की भुजाएं फड़क उठी। वहीं भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक 2 की तो उनको सुकून मिला। वैसे तो देश का हर बच्चा बच्चा इस कार्रवाई से खुशी में झूम रहा है, लेकिन यहां के लोगों का जोश और खुशी कुछ अलग ही है। इस खुशी के साथ गर्व भी शामिल है। कारण यह है कि यहां के बड़ी संख्या में सपूत देश की रक्षा में सीमा पर खड़े हैं। कुछ पूरा जीवन देश की रक्षा कर सेवानिवृत हो चुके हैं। तिरंगे की शान के लिए जान न्यौछावर करने के जज्बे की कहानी यहां की मिट्टी बखूबी बयां करती है। सरहद की सुरक्षा करने का अदम्य साहस यहां कण-कण में समाया है। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सपूतों को तिरंगे में लिपटा देख यहां की हर आंख रोई, लेकिन दुश्मन को सबक सिखाने का साहस यहां सिर्फ सिपाही ही नहीं, बल्कि किसान भी रखता है। हम बात कर रहे हैं उपखंड के गांव रेण्डायल गुर्जर की। आजादी की लड़ाई की बात हो या करगिल युद्ध की। इस गांव के सपूतों के शौर्य की कहानी अब स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।


करीब 4 हजार की आबादी वाले इस गांव के 200 सपूत आज भी सरहद की पहरेदारी में खड़े हैं और करीब 200 जवान कई लड़ाईयों में दुश्मन के दांत खट्टे कर सेवानिवृति के बाद घर लौटे हैं। पुलवामा हमले के बाद इन जांबाजों की भुजाएं फिर से फड़क उठीं और सरहद पर जाने को मचल उठीं। गांव के पूर्व सैनिकों को जैसे ही पुलवामा हमले की सेना द्वारा बदला लिए जाने की खबर मिली तो सबके सीने गर्व से चौड़े हो गए। गांव के पूर्वसैनिक कहते हैं कि सेना के नाम पर राजनीति कतई नहीं होनी चाहिए। सेना सरहद पर पूरे देश की रक्षा के लिए खड़ी होती है न कि किसी धर्म या जाति के लिए। ऐसे में देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए पूरे देश को एकजुट होना चाहिए।


करगिल की लड़ाई का हिस्सा बना यहां का सपूत
बीएसएफ से रिटायर्ड गांव के फौजी भंवर सिंह कहते हैं कि गांव की मिट्टी यहां की वीर गाथा ऐसे ही नहीं गाती। स्वतंत्रता संग्राम में भी यहां के रणबांकुरों ने अपने साहस का परिचय दिया था। इसके बाद यहां सेना में जाने का जुनून सा पैदा हो गया। अब हर युवा सेना में जाने का सपना बचपन से ही पालता है। वर्ष 1999 में हुए करगिल युद्ध में यहां के वीर सपूत किनूरी सिंह ने शहादत दी थी। साथ ही सूबेदार मेजर भूर सिंह, जसराम और सिपाही हंसराम आतंकवादी हमलों में शहीद हुए थे, जिनके शौर्य की गाथा अमिट है।


यह बोले पूर्व सैनिक- गांव की मिट्टी में बहादुरी की सुगंध
यदि मानवता और भारत माता की आन, बान और शान के खिलाफ कोई जाता है तो हम उसे रोकने के लिए तैयार खड़े हैं। सेवारत, पूर्व सैनिक और गांव की सभी जाति और धर्म के लोग देश को सर्वोपरि मानते हैं। हम अपना सब कुछ देश पर न्यौछावर करने को तैयार हैं। जवानों के साथ यहां के किसानों में भी देशभक्ति देखते ही बनती है।
भंवर सिंह, रिटायर्ड फौजी रेण्डायल गुर्जर


सेना ने एयर स्ट्राइक करके बहुत अच्छा काम किया है। चोर को नहीं बल्कि चोर की मां को मारना जरूरी है। अब पत्थरबाजों को रोकने के पहल होनी चाहिए। आतंकवाद को खत्म करने के लिए सेना को ऐसी स्ट्राइक करनी चाहिए। गांव का बच्चा-बच्चा देश के लिए कुर्बानी देने को तैयार है।
रमेश सिंह, पूर्व कैप्टन, रेण्डायल गुर्जर


मैं आज भी युवा जितना काम कर सकता हूं। गांव की मिट्टी में बहादुरी है। मेरी गोदी में बैठा मेरा पोता भी सेना में जाने को तैयार है। हम जाति और धर्म से ऊपर उठकर देश पर मर-मिटने के लिए तैयार हैं। देश की सेना ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करके बहुत ही अच्छा किया है। आतंकवाद से ऐसे ही निपटा जाना चाहिए।
यादराम सिंह, सेवानिवृत फौजी रेण्डायल गुर्जर

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