2025 तक जीने के लिए ज़रूरी 78 मानव अंग होने लगेंगे 3डी प्रिंट

किसी भी चीज की हूबहू नकल बनाना 3डी प्रिंटिंग के कारण संभव हो गया है। कस्टमाइज्ड 3डी प्रिंटिंग वाले मानव अंगों से लोगों की जान तक बचाई जा रही है। लेकिन, शरीर के महत्वपूर्ण अंग अब भी इस चमत्कार से दूर हैं। वैज्ञानिकों ने हाल ही चूहों के लिए दुनिया का पहला, पूरी तरह कार्यरत जीवनदायी कृत्रिम अंग बनाने में सफलता पाई है।

By: Mohmad Imran

Published: 13 Apr 2021, 04:36 PM IST

बाजार में होंगे उपलब्ध
वैज्ञानिकों के अनुसार, जानवरों पर परीक्षण के बाद 2025 तक जीवनदायी अत्यावश्यक 78 मानव अंगों के कस्टमाइज्ड 3डी प्रिंट बाजार में उपलब्ध होंगे। हालांकि कुछ जटिल अंगों की प्रिंटिंग अब भी चुनौती है। वैज्ञानिकों के सामने अभी बनावट, काम करने के प्राकृतिक तरीके और रक्त प्रवाह के साथ शरीर के साथ संयोजन स्थापित करने में सक्षम 3D अंग बाने में सफलता नहीं मिली है। हृदय, किडनी, गुर्दे, मष्तिष्क आदि अंगों को 3D प्रिंट करने में अब भी बड़ी कामयाबी नहीं मिली है।

2025 तक जीने के लिए ज़रूरी 78 मानव अंग होने लगेंगे 3डी प्रिंट

1980 में हुआ था पहला प्रयास
एडिटिव मैनुफैक्चरिंग जिसे 3D प्रिंटिंग भी कहते हैं, इसकी सबसे पहले कोशिश 1980 के दशक में की गयी थी। प्रारंभ में इससे बने प्रोटोटाइप को तेजी से औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग किया जाता था। लेकिन 2010 और 2020 के दौरान नाटकीय रूप से इसकी लागत में कमी आई है और अब यह औद्योगिक उपयोग से निकलकर आम आदमी के भी काम आने लगे हैं। 3D प्रिंटिंग संभवतः स्वास्थ्य और चिकित्सा में सबसे अधिक परिवर्तनकारी सफलताएँ लेकर आयी है। कस्टमाइज़्ड , 3 डी-मुद्रित शरीर के अंग लोगों के जीवन बचा रहे हैं। इनमे कृत्रिम जबड़े की हड्डियों से लेकर सांस लेने के लिए बायोरसोर्बबल स्प्लिन्ट्स, दंत प्रत्यारोपण और एक्सोस्केलेटन और कई अन्य उपयोगों के अलावा खोपड़ी के हिस्सों को शामिल किया जा सकता है।

इससे भी बड़ी प्रगति हो रही है। 3 डी प्रिंटिंग अब अकार्बनिक सामग्री जैसे पॉलिमर या धातु तक सीमित नहीं है। इसे जीवित, जैविक प्रणालियों के निर्माण के लिए कास्टमाइज़्ड किया जा रहा है। कोशिकाओं की परत के बाद परत, प्रिंटर के सिर से छितरी हुई, ठीक उसी जगह रखी जा सकती है, जहां माइक्रोमीटर तराजू के की सटीक परिशुद्धता की आवश्यकता होती है। शुरुआत में रक्त वाहिकाओं और ऊतकों जैसे सरल घटकों को इनपर बिलकुल असली जैसा बनाने का प्रयास किया गया। हाल ही वैज्ञानिकों ने चूहों के लिए पहले पूर्ण अंगों को पर्याप्त पोषक तत्वों, ऑक्सीजन और विकास वैक्टर के साथ विकसित किया ताकि माउस कार्यशील प्रतिस्थापन के रूप में जीवित रह सकें।

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