एयर कंडीशन से भी फ़ैल सकता है कोरोना संक्रमण, दो शोधों में सामने आये चौंकाने वाले परिणाम

-हाल ही china में 9 लोग कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हुए हैं जिन्होंने एसी का उपयोग किया था
-एमएसएन लाइफस्टाइल की नवीनतम रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस गर्मी एयर-कंडीशन के उपयोग से बचें क्योंकि इससे नोवेल कोरोनवायरस होने का जोखिम बढ़ सकता है।

By: Mohmad Imran

Published: 30 Apr 2020, 05:36 PM IST

हाल ही में कोरोना वायरस 30 नए उपभेदों (स्ट्रेन) में परिवर्तित हो गया है। इसके नए एल स्ट्रेन को अब तक का सबसे खतरनाक वायरस माना जा रहा है। वहीं नए उपभेदों के बारे में भी वैज्ञानिक अभी ठीक से नहीं समझ पाए हैं इसलिए इनके संक्रमण की दर के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता। कोरोना वायरस संक्रमण को रेखांकित करती एक हालिया रिपोर्ट ने एक बार फिर लोगों की नींद उड़ा दी है। भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशों में इस समय तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है। लेकिन शोधकर्ताओं की एक टीम ने लोगोंको चेताते हुए कहा है कि वे अपने घरों-ऑफिस यहां तक की कार के एसी में भी बैठने से बचें, क्योंकि इससे कोरोना संक्रमण का जोखिम है। हाल ही अमरीका में 9 लोग कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हुए हैं जिन्होंने एसी का उपयोग किया था।

एयर कंडीशन से भी फ़ैल सकता है कोरोना संक्रमण, दो शोधों में सामने आये चौंकाने वाले परिणाम

दो अध्ययनों में सामने आया जोखिम
एयरकंडीशनर से कोरोना के संक्रमण की पुष्टि करने के लिए दो अलग-अलग अध्ययन किए गए हैं। गौरतलब है कि अकेले अमरीका में बीते साल 54 लाख (5.4 मिलियन) मांग को ध्यान में रखते हुए पहले से ही तैयार कर लिए गए थे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय एसी के उपयोग के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। क्योंकि इस संबंध में हुए दो अध्ययनों से पता चला है कि कोविड-19 संक्रमण वेंटिलेशन, हीटिंग और एयर-कंडीशनिंग के जरिए भी फैल सकते हैं। अध्ययन के अनुसार, अधिकांश व्यक्ति अपने जीवन का 90 फीसदी समय कार, सार्वजनिक परिवहन और इमारतों जैसे घिरे या चारों ओर से बंद हुए वातावरण (इनबिल्ट एन्वायरोमेंट) में साझा करते हैं, साझा अंदरूनी हवा में सांस लेते हैं और संभावित संक्रमित सतहों को छूते हैं। दरअसल एयरकंडीशन सिस्टम 5000 नैनोमीटर से छोटे कणों को फिल्टर नहीं कर सकते हैं। अगर नोवेल कोरोना वायरस भी सार्सकोरोना वायरस की ही तरह 120 नैनोमीटर व्यास का हुआ तो एयर कंडीशनिंग सिस्टम वायरस को हर केबिन में पहुंचा सकता है। हवाई जहाज के एयर कंडीशन भी इससे अलग नहीं हैं।

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ऐसे फैल सकता है संक्रमण
अध्ययन में शामिल अमरीका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर किंग्यायन चेन ने कहा कि एयर कंडीशनर हवा के जरिए संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स को वातावरण में फैला सकते हैं। वहीं कमरे में मौजूद लोग इस संक्रमित हवा में सांस लेने पर कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। चेन ने कहा कि इसी तरह से जापान के योकोहामा में दो महीने से समुद्र में खड़े डायमंड प्रिंसेस क्रूज शॉप पर मौजूद 3 हजार यात्रियों में से 700 लोग एयरकंडीशनर की वजह से ही संक्रमित हुए हैं। जांच परीक्षण के दौरान 46.5 फीसदी पैसेंजर्स संक्रमित पाए गए। जबकि 17 दिनों बाद जहाज के अधिकांश हिससें को खाली करा लेने के बाद भी वहां विभिन्न सतहों पर वायरस मिला है। क्वारनटाइन के बाद भी कई लोग अब भी जहाज पर बीमार हो रहे हैं और एक्सपट्र्स का मानना है कि इसमें एयर कंडीशन की महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। हालांकि न्यू इंग्लैंड कॉलेज ऑफ ओस्टियोपैथिक मेडिसिन विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञानी प्रोफेसर मेघन मे का कहना है कि अधिकतर विशेषज्ञ इस आशंका को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं और फिजिकल डिस्टैंसिंग को अहमियत देने की पैरवी कर रहे हैं।

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63 वर्षीय महिला से मिला संक्रमण
वहीं 2 अप्रैल को जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित हुए एमएसएन लाइफस्टाइल के अनुसार एक अन्य अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक चीनी रेस्तरां में नौ लोग एयर-कंडीशनिंग के कारण ही संक्रमित हुए थे क्योंकि वे रेस्तरां में आने वाले ग्राहकों और स्टाफ के छींकने से एसी के जरिए वातावरण में फैले ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आ गए थे। यह अध्ययन रेस्तरां में संक्रमण के संभावित कारणों पर केंद्रित था,जिसमें एसी के जोखिम कारकों के बारे में भी चिंता जताई गई थी।

चीन के गुआनझोउ में स्थित रेस्तरां में इन नौ लोगों को एक 63 वर्षीय महिला से संक्रमण मिला था। अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों का महिला के साथ सीधा संपर्क नहीं था, लेकिन वे उसके पास टेबल पर बैठे थे। अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि रेस्तरां के एयर-कंडीशनिंग ने अन्य व्यक्तियों को संक्रमित करने वाले छींक के ड्रॉपलेट्स को हवा में बिखेर दिया जिसमें सांस लेने से ये सभ्ज्ञी संक्रमित हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोध के नतीजे चिंताजनक हैं क्योंकि इसका मतलब यह है कि एयर-कंडीशनिंग से संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आए बिना भी वायरस का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि राहत की बता यह है कि एसी से वायरस के ड्रापलेट्स बहुत दूर नहीं फैलते क्योंकि रेस्तरां के 83 ग्राहकों में से केवल 9 व्यक्ति ही संक्रमित थे। फिर भी यह अध्ययन उन रेस्तरां और विस्तृत एयर कंडीशनिंग इकाइयों के साथ अन्य प्रतिष्ठानों के लिए एक चेतावनी है जो मानते हैं कि तेज गर्मी में वायरस नष्ट हो जाएगा और वे एसी में गर्मी के दिन काट सकेंगे।

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होम एसी से खतरा कम
वहीं भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि घर में लगे एसी से कोरोना वायरस संक्रमण का जोखिम पैदा नहीं करते। खासकर ऐसे समय में जब लोग अपने घरों के अंदर बिना किसी बाहरी संपर्क के अलग-थलग पड़े हैं। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि कोरोनोवायरस उन जगहों के भीतर फैल सकता है जो सेंट्रल एयरकंडीशन लगे हैं जैसे शॉपिंग मॉल और कुछ आधुनिक अपार्टमेंट, खासकर अगर एक संक्रमित व्यक्ति अंदर मौजूद है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के महामारी विज्ञानी सम्बुद्ध चौधरी कहते हैं कि यह वायरस हवा से नहीं फैलता इसलिए जैसे आम सर्दी और फ्लू का वायरस फैलता है। लेकिन यह वायरस हवा में चारों तरफ तैरता नहीं है बल्कि सतहों पर मौजूद रहता है और लंबे समय तक जिंदा रह सकता है। क्योंकि यह बहुत लंबे समय तक हवा में नहीं रहता इसलिए कम से कम घर के एयर कंडीशनर से संक्रमण का खतरा नहीं होना चाहिए।

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