SPACE RACE : निजी कंपनियों के आने से अंतरिक्ष में उड़ान का नया दौर

-2012 में स्पेस एक्स के बाद रिचर्ड ब्रान्सन की वर्जिन गेलैक्टिक होल्डिंग और अमेजन की कम्पनी ब्लू ओरिजन भी अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल हो चुकी है।

By: pushpesh

Published: 13 Feb 2021, 07:39 PM IST

पहली अंतरिक्ष स्पद्र्धा अमरीका और सोवियत रूस के बीच देखी गई थी। अब नासा जहां प्राइवेट फर्मोंं को यह काम दे रहा है, वहीं अन्य देश भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं। खास तौर पर भारत और चीन। चंद्रमा और मंगल पर पहुंचना कई देशों के लिए लुभावने लक्ष्य रहे हैं। तकनीकी आधुनिकीकरण के इस दौर में अंतरिक्ष अनुसंधान को गति मिली है।

1. कौन हैं नए खिलाड़ी
वर्ष 2011 में जब से अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम समाप्त हुआ है,अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन छोडऩे के लिए रूस पर भरोसा जताया है, जो दो दशकों से पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा लगा रहा है। 2020 में एलन मस्क की कम्पनी स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी कॉर्प या स्पेस एक्स ने रीयूजेबल बूस्टर्स के साथ पहला दल भेजा, जिसकी लागत आश्चर्यजनक रूप से काफी कम आई थी। बोइंग कम्पनी का अंतरिक्ष यान स्टारलाइनर जो कि मौजूदा एटलस रॉकेट पर उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है, उसे मार्च में बिना चालक दल अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए उसकी मरम्मत की जा रही है। बाद में इस उड़ान के नतीजों के आधार पर वर्ष 2021 में अंतरिक्षयात्रियों को भी आइएसएस भेजा जा सकता है।

2. क्या है भविष्य की योजना?
स्पेस एक्स ने 2012 में पहली प्राइवेट अंतरिक्ष उड़ान की शुरूआत की थी। उसके बाद से लेकर अब तक रिचर्ड ब्रान्सन की वर्जिन गैलैक्टिक होल्डिंग और अमेजन डॉट कॉम की कम्पनी ब्लू ओरिजन भी इस दौड़ में शामिल हो चुकी है, जिसके संस्थापक जैफ बेजोस हैं। इससे अंतरिक्ष में पहुंचने का खर्च कम हो रहा है। स्पेस एक्स ने एक करार किया है कि वह इस वर्ष के अंत तक एक अमरीकी प्रोद्योगिकी प्रमुख और तीन अन्य सिविल अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में उड़ान भरने भेजेगा। 2022 में स्पेस एक्स एक्सियोम स्पेस इन्का. के लिए चार सदस्यीय मिशन भेजेगा, जो एक निजी स्पेस स्टेशन को कक्षा में भेजने की योजना बना रहा है। मस्क की कम्पनी 2023 में एक जापानी अरबपति और उसके मेहमानों को भी चंद्रमा पर भेजेगी।

3. कौन-कौन देश हैं रेस में आगे
चीन ने 2019 में चांद पर एक रोवर उतारा था, जिसने 2020 में चंद्रमा से पहले संदेश भेजे थे। वह अपने ही अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा पर एक अनुसंधान स्थल बनाने पर विचार कर रहा है। भारत 2021 या 22 में चंद्रमा पर मानव रहित यान भेजेगा। 2019 में भारत का यह प्रयास विफल रहा था। भारत अपने अंतरिक्ष यान गगनयान की नियोजित उड़ान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण भी दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 2019 में अपने पहले अंतरिक्ष यात्री को रूसी अंतरिक्ष यान से भेजा था। अब यह फरवरी 2021 में मंगल की कक्षा में एक वैज्ञानिक उपग्रह भेजने और 2024 तक चंद्रमा पर एक चालक दल रहित अंतरिक्ष यान भेजने की योजना बना रहा है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी सौरमंडल की खोज की जांच कर रही है और चंद्रमा पर भेजने के लिए एक लैंडर तैयार कर रही है।

4.चंद्रमा पर क्यों है फोकस
अब तक अमरीकी अंतरिक्ष यात्री ही चांद पर पहुंचने में सफल रहे हैं। अब एक बार फिर अमरीका चंद्रमा पर इंसान भेजने जा रहा है। 1960 से लेकर अब तक चंद्रमा पर पहुंचने की प्रतिस्पद्र्धा के चलते अंतरिक्ष क्षेत्र में काफी प्रगति देख्ी गई, जैसे मोबाइल फोन के साथ कैमरा सेंसर लगे होना। तब से लेकर आज तक विज्ञान में जो तरक्की हुई है, उससे सौर मंडल और चंद्रमा की उत्पत्ति को लेकर चल रही खोज में नए तथ्य सामने आने की संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय गौरव की भावना से प्रेरित ये कार्यक्रम अंतरिक्ष के व्यावसायीकरण की ओर अग्रसर हैं। ग्रह संबंधी सोसायटी के अनुसार, अमरीकी अपोलो कार्यक्रम, जिसके तहत चंद्रमा पर पहला मानव भेजा गया था की लागत 25.8 बिलियन अमरीकी डॉलर से लेकर 260 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गई है।

5. ये वहां क्या करेंगे?
नासा आर्टिमिस कार्यक्रम के तहत अपनी नई अंतरिक्ष लॉन्च प्रणाली वाले रॉकेट युक्त यान को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करेगा, जिसमें तीन सदस्ययी दल होगा जो तीन महीनों तक के लिए वहीं रहेगा। अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतर कर खनिज के खनन, ऑक्सीजन बनाने, पानी और रॉकेट भेजने के संसाधन की संभावनाएं खोजेंगे। ईंधन भरवा सकने वाला मॉडल अंतरिक्ष स्टेशन और मंगल अभियान के लिए उपयुक्त होगा। स्पेस एक्स चंद्रमा और उसके आगे भेजने के लिए अपनी स्टारशिप एयरक्राफ्ट तैयार कर रहा है। इसके अलावा ब्लू ऑरिजन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आधार स्थल बनाने के लिए तैयारी कर रहा है।

6. इतनी दूर की तैयारी क्यों?
गहन अंतरिक्ष खोज से किसी और ग्रह पर जीवन संबंधी संकेतों का पता चलता है। साथ ही यह भी कि दुर्गम परिस्थितियों में मानव किस प्रकार जीवन यापन कर सकता है। सौरमंडल जैसे अभियान से लेजर संप्रेषण और विकिरण परीक्षण जैसी तकनीकी विकसित होंगी। नासा और एलन मस्क के लिए मंगल प्राथमिकता है, जो एक ऐसे शहर की परिकल्पना कर रहे हैं, जिसका वजूद अपने गुरुत्वाकर्षण बल पर टिका हो। वर्ष 2021 के प्रारंभ में चीन और अमरीका दोनों ने लाल ग्रह पर उतारने के लिए रोबोट रोवर्स तैयार किए। करीब आधी सदी पहले यहां पहला अंतरिक्ष यान उतरा था। इस बीच, ईएसए और जापान ने बुध ग्रह की ओर एक अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किया है।

7.क्या मिलने की उम्मीद?
जैसा कई विज्ञान कथाओं में दिखाया जाता है, खगोलीय पिंडों पर दुर्लभ खनिज मिलने की संभावना है। जापान ने 2019 में एक खगोल पिंड की जांच की थी। नासा ने अक्टूबर 2020 में ऐसा ही किया। ग्रहों की सतहों के नमूने लाने, खगोलीय पिंडों का खनन करने के मुकाबले बड़े वैज्ञानिक लाभ हैं। इससे अंतरिक्ष यात्रा अधिक सहज बन सकती है। ग्रहों की सतह पर मौजूद पानी प्रक्षेपक बनाने या विकिरण समस्या समाधान के लिए उपयोग किया जा सकता है।

8.पृथ्वी पर ये तकनीकें
1957 में रूस ने स्पूतनिक 1 लॉन्च किया था। तब से लेकर आज तक उपग्रही तकनीक मोबाइल फोन से लेकर भू स्थैतिकी बताने और निगरानी तंत्र तक विकसित हो चुकी है। अब लागत भी कम आने लगी है। ब्रिटेन सरकार ने 2020 में सैटेलाइट प्रयोगशाला ‘‘वन वैब’’ को दिवालिया होने से बचाया ताकि ये मस्क और बेजोस के साथ प्रतिस्पद्र्धा कर सके जो पृथ्वी की निचली कक्षा में हजारों छोटे उपग्रह लॉन्च करने पर लक्ष्य लेकर चल रहे हैं ताकि तेज रफ्तार इंटरनेट सुलभ हो सके।

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