लाल ग्रह पर दिखी भाप की पतली परत, जीवन होने के मिले संकेत!

  • ExoMars की मदद से मंगल ग्रह (mars planet )के वायुमंडल में पानी की भाप की हल्की परत देखी
  • मंगल ग्रह पर कभी ना कभी तो जीवन जरूर होगा

By: Pratibha Tripathi

Published: 12 Feb 2021, 08:50 PM IST

नई दिल्ली। लाल ग्रह यानी मंगल ग्रह(life on Mars) पर जीवन की तलाश में जुटे वैज्ञानिकों ने मंगल की सतह पर पानी से बनी भाप का पता लगाया है। वैज्ञानिकों की यह खोज दुनियाभर के वैज्ञानिकों को हैरत में डालने वाली है। पानी के भाप का पता लगाने में यूरोपियन और रूसी स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। वैज्ञानिकों की माने तो मंगल ग्रह के वायुमंडल में पानी के भाप की एक पतली परत नज़र आई है। पानी के भाप की परत के बारे में दोनों स्पेस एजेंसियों के ज्वाइंट ऑपरेशन में सैटेलाइट एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर ने खोजा है।

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और रूसी स्पेस एजेंसी (Roscosmos) ने 14 मार्च 2016 को एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (ExoMars Trace Gas Orbiter) नामक सैटेलाइ को लॉन्च किया था। जो 19 अक्टूबर 2016 को मंगल की कक्षा में पहुंच गया। उस समय से लगातार यह सैटेलाइट लाल ग्रह का चक्कर लगाते हुए नई-नई जानकारियां जुटा रहा है। उसी ने भाप के होने की जानकारी दी है।

10 फरवरी बुधवार को दोनों ही टीमों के वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने ExoMars की मदद से मंगल ग्रह के वायुमंडल में पानी के भाप की बेहद पतली परत देखी है। अब वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि भाप की परत देखी गई है तो यहां कभी ना कभी इस ग्रह पर जीवन रहा होगा।

मंगल पर इस खोज में लगे वैज्ञानिकों ने जब ExoMars से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन किया तो जानकारी लगी कि जब मंगल ग्रह के वायुमंडल पर सूर्य की रोशनी पड़ती है तब मंगल के वायुमंडल में भाप की हल्की परत नज़र आती है। आपको बतादें इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने नादिर एंड ऑक्लटेशन फॉर मार्स डिस्कवरी नामक यंत्र का सहारा लिया है।

विदित हो नादिर एंड ऑक्लटेशन फॉर मार्स डिस्कवरी नामक यंत्र ExoMars ऑर्बिटर के साथ-साथ मंगल ग्रह के चारो ओर घूम रहा है। इस रिपोर्ट के बारे में ब्रिटेन ओपन यूनिवर्सिटी के सीनियर प्रोफेसर मनीष पटेल का कहना है कि इस यंत्र ने अब तक की सभी जानकारियों से आगे बढ़ कर शानदार खोज की है। इस यंत्र ने मंगल ग्रह के वायुमंडल में पानी के आइसोटोप्स का पता लगाया है। और अब आगे आइसोटोप्स की स्टडी से पता चल सकता है कि कैसे मंगल ग्रह से पानी खत्म हुआ होगा।

Pratibha Tripathi
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