धरती से टला सुनामी का खतरा, 37 लाख KM दूर से गुजरा भारी भरकम उल्कापिंड

  • Asteroid Passed Near Earth : एस्टेरॉयड 2010एनवाई65 धरती के बगल से निकला, समुद्र में गिरने से मच सकती थी तबाही
  • 1017 फीट थी उल्कापिंड की लंबाई, दोपहर करीब सवा बारह बजे धरती को छूकर गुजरा ये एस्टेरॉयड

By: Soma Roy

Published: 25 Jun 2020, 11:08 AM IST

नई दिल्ली। इन दिनों धरती पर दोहरी मुसीबत आ रही है। कोरोना महामारी (cORONAVIRUS pANDEMIC) से दुनियावाले पहले से ही जूझ रहे हैं। अब आसमान से भी आफत बरस रही है। एक के बाद एक उल्कापिंडों (Asteroid) और धूमकेतू के टकराने से नई मुसीबतें पैदा हो रही हैं। ऐसी ही एक आफत धरती पर उल्कापिंड के रूप में आने वाली थी, लेकिन इसके टलने से बड़ी तबाही टल गई। वैज्ञानिकों के अनुसार एस्टेरॉयड 2010एनवाई65 धरती के बगल (Passed Near Earth) से 13 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से गुजरा है। इसकी दूसरी धरती से ज्यादा थी। अगर टक्कर होती तो भयंकर सुनामी आ सकती थी।

धरती को छूकर गुजरने वाला ये उल्कापिंड करीब 37 लाख किलोमीटर दूर से निकला है। वैज्ञानिकों को डर था कि अगर ये उल्कापिंड धरती से टकराकर या टूटकर समुद्र में गिरता तो बड़ी सुनामी आ सकती थी। चूंकि यह उल्कापिंड दिल्ली के कुतुबमीनार से चार गुना और अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से तीन गुना बड़ा था। इसकी लंबाई करीब 1017 फीट थी। ऐसे में आशंका थी कि इससे बड़ी तबाही हो सकती है। हालांकि इसके गुजर जाने से बड़ा खतरा टल गया। मालूम हो कि एस्टेरॉयड 24 जून 2020 की दोपहर 12.15 बजे पृथ्वी के करीब से गुजरा।

नासा (NASA) के वैज्ञानिकों के लिए वे सभी एस्टेरॉयड्स धरती के लिए खतरा हैं जिनकी दूरी धरती से 75 लाख किलोमीटर के अंदर होती है। इन तेज रफ्तार गुजरने वाले खगोलीय पिंडों को नीयर अर्थ ऑबजेक्टस (NEO) कहते हैं। जून में उल्कापिंड के गुजरने की यह तीसरी घटना है। पहला एस्टेरॉयड 6 जून को धरती के बगल से गुजरा था। इसका नाम 2002एनएन4 था। वो 40,140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरा था।

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