एक अरब साल जितनी ऑक्सीजन ही बची है पृथ्वी पर

एक नए अध्ययन में गणना की गई है कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन युक्त वातावरण अगले 1.08 अरब वर्षों तक और मौजूद रहेगी। इस संभावित समय सीमा तक पृथ्वी अधिकांश जीवों के रहने लायक नहीं रह जाएगी।

By: Mohmad Imran

Published: 20 Mar 2021, 02:35 PM IST

हमारी पृथ्वी पर सूरज की वजह से ही जीवन है। लेकिन अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि पांच अरब साल (5 Billion Years Later) बाद सूरज एक सुपरनोवा तारे (Supernova Star) में बदल जाएगा। लेकिन उस स्थिति में पहुंचने के कुछ अरब साल पहले तक पृथ्वी पर जीवन नरक समान हो जाएगा। हाल ही नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक नए अध्यययन में कहा गया है कि 1.08 अरब साल बाद पृथ्वी पर आक्सीजन नाममात्र को रह जाएगी और यहां जीवन लगभग समाप्त हो जाएगा। सूरज की अत्यधिक गर्मी के कारण धरती पर ऑक्सीजन के स्तर में एक क्रमिक गिरावट होगी। इस नए अध्ययन में जैव-रसायन विज्ञान और जलवायु के संख्यात्मक मॉडल का उपयोग कर पता लगाया गया कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन कब तक मौजूद रहेगी।

एक अरब साल जितनी ऑक्सीजन ही बची है पृथ्वी पर

पृथ्वी पर नहीं बचेगा कोई जीवन
तोहो विश्वविद्यालय, जापान (TOHO University, Japan) के शोधकर्ता काहुओ ओजाकी के अनुसार, वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड के स्तर में लगातार गिरावट और लगातार बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के चलते भविष्य में पृथ्वी से जीवन समाप्त होने लगेगा। आमतौर पर दुनिया भर के वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर अगले 2 अरब सालों में जीवमंडल (Biosphere) समाप्त हो जाएगा। वहीं ओवरहीटिंग और सीओ 2 (CO2) की कमी के कारण वनस्पति भी नष्ट होने लगेंगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कब और कैसे होगा। भविष्य में पृथ्वी का वातावरण कैसा होगा, इसकी जांच करने के लिए, जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Gerogia Institute of Technology) के एसोसिएट प्रोफेसर ओजाकी और क्रिस्टोफर रेनहार्ड ने एक पृथ्वी प्रणाली मॉडल का निर्माण किया जो जलवायु और जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं का अनुकरण करता है।

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20 फीसदी ऑक्सीजन स्तर शेष
ओजाकी के मॉडल से मिले परिणाम के अनुसार, पृथ्वी का ऑक्सीजन युक्त वातावरण अधिकतम 1.08 अरब वर्षों तक और बना रहेगा। लेकिन उस बिंदु के बाद, पृथ्वी के वातावरण में विषाक्तता इस तेजी से बढ़ जाएगी कि यह अपने बनने के लगभग 2.5 अरब साल पहले के महा-ऑक्सीकरण घटना से पहले की पृथ्वी की याद दिला देगी। ओजाकी के अनुसार, उस विषाक्त वातावरण में केवल अवायुजीवी (ऑक्सीजन में जिंदा न रह पाने वाले जीवाणु) ही जिंदा रह सकेंगे। अपने अरबों साल के लंबे इतिहास में पृथ्वी पर ऑक्सीन के विभिन्न स्तर रहे हैं। 2.4 से 2 अरब साल पहले तक यह कम और स्थिर था। इसके बाद एडियाकरान (635-541 लाख साल पहले) अवधि में तेजी से बढ़ने के बाद कैम्ब्रियन (541-485 लाख साल पहले) अवधि में फिर से धीमा हो गया। वायुमंडल में प्रतिशत के रूप में, ऑक्सीजन कार्बोनिफेरस युग में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो कि 35 फीसद था। इसने कई कीटों को सक्षम किया, जो अपनी खाल से सांस लेते हैं और ये धीरे-धीरे बड़े होते चले गए। इसने जंगल की आग की गतिविधि को भी बढ़ावा दिया। तब से, ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा है और आज यह लगभग 20 फीसद है।

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मंगल ग्रह बन सकता है नया ठिकाना
इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि पृथ्वी पर मौजूद ऑक्सीजन का स्तर भविष्य में किसी बिंदु पर अपेक्षाकृत तेजी से गिरावट दर्ज करेगा। शोध के अनुसार संभवत: उस समय पृथ्वी पर केवल 20 से 30 फीसदी ही शुद्ध ऑक्सीजन का भंडार बचे। अध्ययन के शोधकर्ताओं का मानता है कि निश्चित रूप से, भविष्य की पीढ़ी तकनीकी साधनों से पृथ्वी को बचाने में असमर्थ होंगे। लेकिन सुपरनोवा तारा बनने की ओर अग्रसर हमारा सूरज लगातार विस्तारित होने के साथ ही मंगल ग्रह को इंसानों के अधिक रहने योग्य बना सकता है। तब संभवत: एक नए जीवन की शुरुआत के लिए हम पृथ्वी को हमेशा के लिए छोड़कर मंगल या पृथ्वी जैसे ही किसी अन्य ग्रह पर जाकर बस जाएं। तब तक मानव प्रजाति भी शुद्ध ऊर्जा वाले जीवों में विकसित हो सकती है, जो विभिन्न अंतरिक्षीय आयामों और अन्य ब्रह्मांडों में यात्रा करने में सक्षम हैं। शायद तब तक पृथ्वी को एक प्रकार के सौरमंडलीय अवशेष के रूप में छोड दिया जाए जो हमारे प्राचीन अतीत का एक स्मारक की तरह दिखाई दे।

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सुपरनोवा तारा बनने की ओर अग्रसर हमारा सूरज लगातार विस्तारित होने के साथ ही मंगल ग्रह को इंसानों के अधिक रहने योग्य बना सकता है।

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