2021 में जीने के लिए हमें 1.0516 मिली सेकंड्स कम मिलेंगे

5 जुलाई होगा साल का सबसे छोटा दिन,1.0516 मिली सेकंड्स पहले परिक्रमा पूरी कर लेगी पृथ्वी, 2020 में पृथ्वी ने बीते 50 सालों की तुलना में ज्यादा तेज गति से की परिक्रमा, 1960 के बाद बीते साल 28 दिन तक पृथ्वी अपनी धुरी पर कुछ मिली सेकंड्स ज्यादा तेज गति से घूमी

By: Mohmad Imran

Published: 10 Jan 2021, 07:50 PM IST

साल 2020 ने पूरी दुनिया की ही नहीं बल्कि पृथ्वी की चाल भी बिगाड़ दी। दरअसल, बीते साल पहली बार पृथ्वी की अपनी धुरी पर परिक्रमा करने की गति बीते पांच दशकों में सबसे तेज रही है। सूर्य के चारों ओर अपनी धुरी पर एक निश्चित गति से घूमने वाली पृथ्वी की गति 2020में एक दो दिन नहीं बल्कि पूरे 28 दिन तक कुछ मिली सेकंड्स अधिक रही है। ऐसा 1960 के बाद पहली बार है जब किसी साल में पृथ्वी की चाल लगभग एक महीने तक इतनी तेज रही हो। यह अभी तक सबसे ज्यादा दिनों तक तेज गति से घूमने का रेकॉर्ड भी है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की घूमने की इस गति पर वायुमंडलीय दबाव, हवाओं, समुद्री लहरों और पृथ्वी के आंतरिक कोर का भी आंशिक प्रभाव पड़ता है। हालांकि यह बहुत चिंता की बात नहीं है। लेकिन यह बीते 50 सालों में पहली बार हुआ है कि पृथ्वी चार हफ्तों तक अपनी औसत गति से कुछ मिली सेकंड्स अधिक गति से घूमी हो।

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ऐसे पता चला इस बदलाव का
भले ही वैज्ञानिकों के लिए यह अधिक चिंता का विषय न हो लेकिन, अंतरराष्ट्रीय समयपालकों (इंटरनेशनल टाइम कीपर्स) के लिए यह हैरान करने वाली घटना है। अल्टा एक्यूरेट परमाणु घड़ियों (ultra-accurate atomic clocks) का उपयोग कर ये समय पालक वैश्विक समय सारणी (Coordinated Universal Time or UTC) मीटर को सेट करते हैं। इसी के अनुसार पूरी दुनिया अपनी घड़ियों में समय का मिलान करती है। यह खगोलीय समय (astronomical time) पृथ्वी के अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने के अनुसार सेट होता है। लेकिन बीते साल पृथ्वी की परिक्रमा पूरा करने के समय में करीब 0.4 सेकंड्स का अंतर आ गया। इससे यूटीसी को वैश्विक समय सारणी को फिर से सेट करना पड़ा था। जबकि अभी तक, किसी भी साल के जून या दिसंबर के महीने में खगोलीय समय और परमाणु घड़ियों के समायोजन से उस वर्ष के लिए 'लीप सेकंड' (Leap Seconds) जोड़ा जाता था। 1960 से पहले तकनीक विकसित न होने के कारण हर साल कुछ लीप सेकंड्स जोड़े जाते थे। लेकिन 1960 और 1970 के दरम्यान सैटेलाइट की मदद से सटीक समय मिलने के बाद से पृथ्वी की घूर्णन गति स्थिर बनी हुई है।

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प्रतिवर्ष डेढ़ लीप सेकंड्स जोड़े
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (एनआईएसटी) के अनुसार, 1972 के बाद से, वैज्ञानिकों ने औसतन, हर साल डेढ़ सेकंड के बराबर लीप सेकंड जोड़े हैं। यह आखिरी जोड़ 2016 में किया गया था जब 23 साल, 59 मिनट और 59 सेकंड पर नए साल की पूर्व संध्या पर, एक अतिरिक्त 'लीप सेकंड' (Extra Leap Second) जोड़ा गया था। हालांकि, समय और तारीख के अनुसार, पृथ्वी के घूमने की गति में आई इस तेजी को वैज्ञानिकों ने पहली बार एक नकारात्मक लीप सेकंड माना है। यानी इस साल जून या दिसंबर में उन्हें एक लीप सेकंड घटाना पड़ सकता है।

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फन फैक्ट्स
-86,400 सेकंड्स होते हैं औसतन एक दिन में
-2021 में 0.05 मिली सेकंड छोटा होगा एक खगोलीय दिन
-19 मिली सेकंड्स तक समय के अंतराल को बढ़ा देगा यह परिवर्तन
-2020 अब तक का सबसे तेजी से बीतने वाला साल रहा है, परमाणु घड़ी के अनुसार
-2005 में समय और तरीख को परमाणु घडिय़ों और खगोलीय समय के अनुसार 28 बार सेट किया गया था
-05 जुलाई इस साल का सबसे छोटा दिन होगा, इस दिन पृथ्वी 1.0516 मिली सेकंड्स पहले ही अपनी परिक्रमा पूरी कर लेगी
-19 जुलाई था 2020 में सबसे छोटा दिन, तब पृथ्वी का एक चक्कर 1.4602 मिली सेकंड्स पहले पूरा हो गया था

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