नई टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक वाहन देंगे डीजल-पेट्रोल व्हीकल्स को टक्कर

इलेक्ट्रिक वाहन जितना बड़ा होगा, कीमत के मामले में उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा।

पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कमी और कीमतों के चलते पूरी दुनिया का फोकस इस समय इलेक्ट्रिक वाहनों पर है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इसी प्रयास में लगी हुई है कि इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले ज्यादा किफायती और सक्षम हो हालांकि अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है और हमें कई तरह की दिक्कतों जैसे बहुत धीमी स्पीड, कम ओवरलोड़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इसके साथ ही और भी कई अन्य समस्याएं हैं जो इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग में बाधा है जैसे इलेक्ट्रिसिटी का ज्यादा प्रयोग होना। यदि वाहन की स्पीड या लोडिंग कैपेसिटी बढ़ानी है तो उसमें बैटरी की संख्या बढ़ानी होंगी जिसका नतीजा होगा कि वाहन का आकार, भार और कीमत तीनों ही बढ़ जाएंगी।

फास्ट चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाना होगा जरूरी
हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया कि यदि पूरे देश में फास्ट चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाया जा सके तो इस समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। यदि हम ऐसा कर सके तो इलेक्ट्रिक वाहन भी पेट्रोल-डीजल वाहनों को टक्कर दे सकेंगे। सबसे बड़ी बात, इलेक्ट्रिक वाहन जितना बड़ा होगा, कीमत के मामले में उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा।

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इस समय न केवल अमरीका और यूरोप वरन भारत में भी तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड बढ़ रही है। देश में स्थानीय आवागमन के लिए ई-रिक्शे का प्रयोग सर्वमान्य हो चुका है और इन्हें देश के हर छोटे-बड़े शहर में देखा जा सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी इस समय बड़ा उछाल आया है। यूरोप में देखा जाए तो वर्ष 2020 में वेस्टर्न यूरोप में 7,00,000 बैटरी-पॉवर्ड कारें खरीदी गई थीं। हालांकि हैवी व्हीकल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स में ऐसा नहीं हो रहा है।

इस समय टेस्ला तथा अन्य कई कार निर्माता कंपनियां ज्यादा पावरफुल इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के प्रयासों में लगी हुई हैं और वो कुछ हद तक कामयाब भी हो रही हैं लेकिन डीजल व्हीकल्स की तुलना में वो बहुत ज्यादा महंगी हैं जिस वजह से आम यूजर उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।

स्टॉकहोम एनवायर्नमेंट इंस्टीट्यूट (SEI) की रिसर्च के अनुसार इस समस्या का सबसे सही हल यही है कि बैटरियां ज्यादा एफिशिएंट हो और पूरे देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को फास्ट रिचार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन्स का नेटवर्क बनाया जाए। यदि हम ऐसा कर पाए तो इलेक्ट्रिक वाहन न केवल ज्यादा स्पीड और एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएंगे वरन डीजल वाहनों की जरूरत भी बहुत हद तक खत्म हो जाएगी। हालांकि वर्तमान में मौजूद तकनीक के सहारे ऐसे नेटवर्क को बनाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन जल्दी ही ऐसा भी कर लिया जाएगा।

वर्तमान में मेट्रो और ट्रेन चलती है इलेक्ट्रिसिटी से
इस समय लगभग पूरी दुनिया की मेट्रो सर्विसेज डीजल के बजाय इलेक्ट्रिसिटी से चल रही है और न केवल आम ट्रेनों की तुलना में ज्यादा स्पीड से चलती हैं। इन इलेक्ट्रिक ट्रेन्स और मेट्रो की परफॉर्मेंस देख कर ही वैज्ञानिक पावर एफिशिएंट हैवी व्हीकल्स बनाने की कोशिशें कर रहे हैं जो डीजल और पेट्रोल व्हीकल्स को टक्कर दे सकें।

सुनील शर्मा
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