अब, रोने से बनेगी बिजली

Jameel Khan

Publish: Oct, 03 2017 11:38:29 (IST)

Science & Tech
अब, रोने से बनेगी बिजली

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में रोने से आप अपना मोबाइल फोन भी चार्ज कर सकेेंगे।

्रडबलिन। सब ठीक रहा तो आने वाले समय में आंसूओ की मदद से बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। जी हां, आपने ठीक पढ़ा। आयरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक आंसूओं से बिजली उत्पादन का तरीका ढूंढ़ निकाला है। भविष्य में आंसूओं को बिजली बनाने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा और यह तरीका ज्यादा महंगा भी नहीं पड़ेगा। यही नहीं, बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली गैर अक्षय ऊर्जा पर भी निर्भरता कम होगी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में रोने से आप अपना मोबाइल फोन भी चार्ज कर सकेेंगे। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि आंसूओं में मौजूद एक प्रोटीन पर दबाव डालने से वास्तव में बिजली का उत्पादन होता है। बिजली उत्पादन के लिए दबाव डालकर जो प्रक्रिया अपनाई जाती है उसे डायरेक्ट पाईजोइलेक्ट्रीसिटी कहा जाता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने यह खोज दो इलेक्ट्रोड के बीच तत्वों को दबोचने के बाद उसमें से निकली ऊर्जा को नापा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल पार्टस जैसे पेसमेकर को बनाने में मदद मिलेगी।

 

3-डी प्रिंटेड मॉडल मिला मानव दिल की धड़कन का सूत्र
लंदन। वैज्ञानिकों के एक दल ने त्रिआयामी प्रिंट किया गया दिल का मॉडल विकसित किया है, जिससे शल्य चिकित्सकों को उन विशेष कोशिकाओं की जानकारी मिली है, जो हमारे दिलों में धड़कन पैदा करती हैं। इसके अलावा यह मॉडल दिल की बीमारियों के इलाज के लिए भी अभूतपूर्व विस्तृत जानकारी मुहैया कराएगा, जिससे अनमोल ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना इलाज किया जा सकेगा।

इसकी मदद से दिल की प्रणाली में आई गड़बड़ी का अति सूक्ष्म स्तर पर निरीक्षण किया जा सकेगा और बेहतर इलाज किया जा सकेगा। यह हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज में भी मददगार होगा, जैसे कि अनियमित धड़कन जो रक्त संचार में गड़बड़ी से जुड़ी होती है।

ब्रिटेन के लिवरपूल जॉन मूरेस यूनिवर्सिटी (एलजेएमयू) के प्रोफेसर जोनाथन जारविस का कहना है, 3-डी आंकड़ों से कार्डियक कंडक्शन प्रणाली की हृदय के बाकी हिस्से से जटिल संबंधों को समझने में आसानी होती है।

साइंटिफिक रिपोर्ट पत्रिका में प्रकाशित इस शोध-पत्र में जारविस ने लिखा है कि 3-डी प्रिंटेड मॉडल के आंकड़ों से हृदय रोग विशेषज्ञों, हृदय रोग से पीडि़त मरीजों के बीच बीमारी के बारे में चर्चा में भी मदद मिलती है।

कॉर्डियक कंडक्शन सिस्टम विद्युत तरंगों का निर्माण करती है और छोड़ती है, जो हृदय की मांसपेशियों को सिकुडऩे और फैलने के लिए उत्तेजित करती है और हृदय के विभिन्न भागों का विनियमन करती है, ताकि वे समन्वित ढंग से काम करें।

अगर इस प्रणाली में किसी प्रकार की खराबी आ जाती है और हृदय का एक हिस्सा बाकी हिस्से से तालमेल बिठाकर काम नहीं करता तो हृदय रक्त को कुशलता से पंप नहीं कर पाता और यह प्रक्रिया दिल के लिए हानिकारक होती है और उसकी कार्यप्रणाली को नुकसान होता है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned