भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा कैसे हुई पृथ्वी पर शुरूआती जीवों की रचना

भारतीय मूल के वैज्ञानिक रामनारायणन कृष्णामूर्ति और उनके भारतीय सहयोगियों के शोध ने इस थ्योरी को और मजबूत किया है कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति आरएन-डीएनए मिश्रण से हुई है।

By: Mohmad Imran

Updated: 03 Jan 2021, 06:49 PM IST

भारतीय मूल के अमरीकी प्रोफेसर रामनारायणन कृष्णामूर्ति के नेतृत्व में कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स शोध संस्थान के केमिस्ट्स ने ऐसी खोज की है जो पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से जुड़े सवाल का जवाब हो सकती है। रसायन विज्ञान पत्रिका एंग्वैन्डे केमी में प्रकाशित इस अध्ययन में, उन्होंने बताया कि डायमिडोफास्फेट (डीएपी) नामक एक साधारण यौगिक संभवत: पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से भी पहले से मौजूद था। यह खोज बीते कई दशकों की खोज को आगे बढ़ाती है। इसके अनुसार इस यौगिक की रासायनिक संरचना प्राइमरी डीएनए और इसके बेहद करीबी रिश्तेदार आरएनए के रासायनिक प्रतिक्रियाओं के रूप में एक साथ पैदा हुए। यही अणुओं के रूप में पृथ्वी पर जीवन की सबसे पहली उत्पत्ति थी जिसमें दोनों के मिश्रण थे।

भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा कैसे हुई पृथ्वी पर शुरूआती जीवों की रचना

शोध के नए रास्ते खोले
प्रोफेसर रामनारायणन कृष्णामूर्ति की यह खोज रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में नए व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी जन्म दे सकती है। विशेष रूप से यह जीवन की खोज के संबंध में अधिक व्यापक अध्ययनों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है कि कैसे अपनी ही नकल बनाने में सक्षम डीएनए-आरएनए मिश्रणों ने पूरी पृथ्वी पर फैलकर अंतत: आधुनिक जीवों के अधिक परिपक्व जीव विज्ञान का निर्माण किया। स्क्रिप्स शोध संस्थान में केमिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर, वरिष्ठ लेखक कृष्णमूति का कहना है कि यह खोज एक विस्तृत रासायनिक मॉडल के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि पृथ्वी पर शुरुआती एक कोशिकीय जीवों के रूप में जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई।

प्रोफेसर कृष्णमूर्ति की यह खोज रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में नए अनुसंधान को जन्म दे सकती है। इससे पहले तक वैज्ञानिकों का मानना था कि शुरुआती जीव सिर्फ आरएनए आधारित थे और डीएनए बाद में आरएनए के उत्पाद के रूप में उत्पन्न हुए थे। कृष्णमूर्ति को थ्योरी पर भरोसा नहीं था। उनके अनुसार, डीएनए-आरएनए मिश्रणों से बने अणुओं ने ही आधुनिक परिपक्व जीवों का निर्माण किया है। आरएनए वर्ल्ड परिकल्पना के अनुसार, शुरुआती जीव आरएनए आधारित थे और डीएनए बाद में आरएनए जीवन रूपों के उत्पाद के रूप में उत्पन्न हुए थे। कृष्णमूति को इस थ्योरी पर भरोसा नहीं था क्योंकि आरएनए अणु शुरुआती एक कोशिकीय जीवों के निर्माण के लिए बहुत चिपचिपे थे।

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