चंद्रयान 3 के चांद पर उतरते ही पूरा हो जाएगा भारत का खास मकसद, जानें कब शुरू होगा मिशन

  • Chandrayaan 3 Mission : ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए चंद्रमा पर जाना चाहते हैं भारतीय वैज्ञानिक

By: Soma Roy

Published: 11 May 2020, 04:53 PM IST

नई दिल्ली। चांद के दक्षिणी हिस्से पर उतरने की कोशिश पिछली बार भले ही फेल हो गई हो। चंद्रयान 2 मिशन (Chandrayaan 2) अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया, लेकिन इसरो ने इससे हार नहीं मानी। वो दोबारा एक नए मिशन के साथ चांद पर उतरने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए चंद्रयान 3 पर काम जोरों पर है। बताया जाता है कि वैज्ञानिक इस मिशन के जरिए हीलियम आइसोटोप की खोज करेंगे। इससे अगले 250 सालों तक पूरी दुनिया में ऊर्जा की कमी नहीं होगी।

इसरो के वैज्ञानिक चाहते हैं कि वे चांद पर मौजूद उत्खखन के उस दुर्लभ स्रोत के अध्ययन करें जो ट्रिलियन डॉलर की न्यूक्लियर ऊर्जा दे सकता है। चंद्रयान 2 के बाद अब चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) से भारत अपना कार्यक्रम फिर से शुरू करेगा। हीलियम आइसोटोप पृथ्वी पर बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है, लेकिन वह चांद पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इस अभियान से मंगल और आगे के अन्वेषणों में भारत की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही व्यवसायिक और सैन्य मामलों में भी अहम योगदान दिया जा सकेगा।

चंद्रयान 2 में जैसे एक ऑर्बिटर, लैंडर और एक रोवर था। चंद्रयान 3 में भी इन्हीं चीजों को शामिल किया जाएगा। मालूम हो कि सौर ऊर्जा से युक्त रोवर को चांद पर 14 दिन तक रहकर 400 मीटर के दायरे में की तस्वीरें भेजनी थीं। जिसे इसरो को विश्लेषण में मदद मिलती। हालांकि विक्रम लैंडर की लैंडिंग सही न हो पाने की वजह से चंद्रयान 2 मिशन फेल हो गया था।

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