वर्ल्ड जूनोज डे आज- डॉ. लुई पाश्चर ने बनाई थी दुनिया की पहली जूनोटिक वैक्सीन

इतिहास: फ्रांसीसी माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट डॉ. लुई पॉश्चर ने 6 जुलाई, 1885 में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली वायरस जनित बीमारियों के लिए दुनिया का पहला टीका (रेबीज) विकसित किया था। टीका विकसित करने में उनके योगदान के लिए उन्हें 'फादर ऑफ माइक्रोबॉयोलॉजी' भी कहा जाता है। आधुनिक विज्ञान के लिए उन्होंने रोगाणु सिद्धांत को विकसित करने, पॉश्चराइजेशन की प्रक्रिया (जो खाद्य उत्पादों को खराब होने से रोकता है) और वैज्ञानिकों द्वारा टीके बनाने के नवीन तरीके विकसित करने के लिए जाने जाते हैं।

By: Mohmad Imran

Published: 06 Jul 2021, 12:02 PM IST

क्या होते हैं जूनोटिक रोग
जूनोटिक रोग वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी और कवक जैसे हानिकारक कीटाणुओं के कारण होते हैं। ये कीटाणु इंसानों और जानवरों में कई हल्की और बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इनमें गंभीर संक्रमण से मौत भी हो सकती है।

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इसलिए मनाते हैं यह दिन
वर्ल्ड जूनोज डे हर साल जूनोटिक रोगों के बारे में लोगों को जागरूक करने और उन्हें इससे बचने के लिए सही तरीका सिखाने के लिए मनाया जाता है।

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इन रोगों की वैक्सीन बनाई
वैज्ञानिक लुई पॉश्चर ने टीका विकसित करने के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया था। मुगियों में फैलने वाले हैजा (फाउल कोलेरा) का टीके बनाने वाले वे पहले वैज्ञानिक थे। इसके अलावा, उन्होंने एंथ्रेक्स और रेबीज का टीका भी बनाया। हर साल, 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस पर उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है, क्योंकि उन्होंने वर्ष 1895 में अपनी मृत्यु से पहले इस भयानक बीमारी का टीका बना लिया था।

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वायरस से टीका बनाया
एक टीके के रूप में कृत्रिम रूप से कमजोर विषाणुओं का उपयोग करने वाले वे पहले वैज्ञानिक थे। पॉश्चर ने 1881 में एंथ्रेक्स के लिए एक टीका विकसित किया। 1885 में, उन्होंने रेबीज टीका विकसित किया। इतना ही नहीं, खाद्य चीजों को खराब होने से बचाने के लिए पॉश्चराइजेशन विधि की खोज भी उन्होंने ही की थी। लुई पॉश्चर की मानव विकास में उपलब्धियों के चलते उन्हें मानव इतिहास के 'हीरो ऑफ प्रोग्रेस' की सूची में 19वां स्थान दिया गया है।

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Mohmad Imran
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