मंगल ग्रह पर रहना हुआ मुश्किल, लगातार निकल रही इलेक्ट्रिक करंट से वैज्ञानिक हैरान

  • Mars Atmospheric Loss : NASA के अंतरिक्ष यान मावेन (MAVEN) ने मंगल ग्रह के वायुमंडल के बारे में दी जानकारी
  • चुंबकीय तत्व और सौर पवनों के बीच की अंतरक्रिया सही से न होने से जमा हो रहा है करंट

By: Soma Roy

Published: 29 May 2020, 08:23 PM IST

नई दिल्ली। मंगल (Mars) ग्रह पर जीवन मिलने और पृथ्वी की तरह वहां बस्ती बसाने का वैज्ञानिकों का ख्वाब मिट्टी में मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। पहले जहां वहां की बंजर और पथरीली जमीन मुसीबत का सबब थीं। वहीं अब एक और समस्या सामने आ गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार मंगल ग्रह के ऊपरी हिस्से से लगातर इलेकिट्रक करंट (Electric Current) निकल रहा है। शोधकर्ताओं की टीम ने इसका पता मैवेन के जरिए लगाया। उन्होंने इसका उपयोग करते हुए मंगल की त्रिआयामी औसत मैग्नेटिक फील्ड संरचना बनाई। साथ ही उसके मैग्नेटिक फील्ड में हुए बदलावों से करंट का आंकलन किया।

नासा NASA के अंतरिक्ष यान मावेन (MAVEN) ने मंगल ग्रह के वायुमंडल के बारे में खास जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसी से मंगल के वायुमंडल के इलेक्ट्रिक करंट सिस्टम (Electric current system) का नक्शा बनाने में मदद मिली। बोउल्डर की कोलोराडो यूनिर्सीटकी भौतिक विज्ञानी रॉबिन रैमस्टै का कहना है कि इन धारओं (Current) की वजह से मंगल ग्रह के वायुमंडल को बहुत नुकसान हुआ है। इसी की वजह से आज यह रहने लायक ग्रह नहीं है।

चुंबकीय तत्व की अंतरक्रिया में दिखा अंतर

नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक सौर पवन और दूसरे कारकों के कारण ऊर्जा वायुमंडल से बाहर निकल रही है। यह ऊर्जा धाराओं से ही मंगल से बाहर जा रही है। ऐसा ही सिस्टम पृथ्वी पर भी है। जिसे औरा (aurora) कहते हैं। यह प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय तत्व और सौर पवनों के बीच की अंतरक्रिया से होता है। पृथ्वी में चुंबकीय प्रभाव उसके अंदर से आता है, लेकिन मंगल पर ऐसा ये बाहर से आ रहा है।

सौर पवन से बढ़ रहा करंट
सूर्य से लाखों मील प्रतिघंटा की गति से विद्युत आवेषित इंलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन बह रहे हैं। इन्हें ही सौर पवन कहते हैं। पृथ्वी और मंगल जैसे ग्रहों पर इनका असर होता है। सौर पवनों में विद्युत चुंबकीय प्रभाव भी होता है। ये चुंबकीय क्षेत्र मंगल जैसे ग्रहों के वायुमंडल की उपरी सतह को नहीं भेद पाते हैं। इसी के चलते ग्रह के आयनमंडल में करंट बढ़ने लगता है। इससे एक तरह का चुंबकीय मंडल या मैग्नेटोस्फीयर (magnetosphere) बन जाता है।

धातु की गेंद की तरह दिख रहा मंगल
वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल ग्रह एक तरह के धातु की गेंद की तरह दिख रहा है, जिसे इलेक्ट्रिक करंट ने घेर रखा है। यह करंट मंगल के ऊपरी हिस्से में बह रह है। इसमे सबसे ताकतवर करंट 120-200 किलोमीटर की ऊंचाई पर बह रहा है। मैवेन और पिछले मिशन इससे पहले करंट की कई सतहें देखी थी, लेकिन तक पूरे सर्टिक का नक्शा नहीं बन पाया था, लेकिन अब इस क्षेत्र में दोबारा सफलता मिली है।

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