NASA ने आकाश में देखी अजीबो-गरीब घटना, अचानक धूमकेतु में बदला क्षुद्रग्रह

  • Nasa Found a weird Asteroid : नासा ने अपने टेलीस्कोप एटलस (ATLAS) के जरिए क्षुद्रग्रह का लगाया पता
  • इस क्षुद्रग्रह को 2019LD नाम दिया गया है, नासा ने इसे 2019 में सबसे पहले देखा था

 

By: Soma Roy

Published: 25 May 2020, 05:02 PM IST

नई दिल्ली। आकाशगंगा में वैसे तो हर रोज कुछ न कुछ नई गतिविधियां होती रहती हैं। मगर कुछ घटनाएं वैज्ञानिकों को भी सोच में डाल देती हैं। ऐसी ही एक घटना हाल ही में अंतरिक्ष में देखने को मिली। जहां एक क्षुद्रग्रह अचानल धूमकेतु में बदल गया। खगोलविदों के अनुसार क्षुद्रग्रह के बर्ताव में बदलाव की वजह से ऐसा हुआ है। इस पर गहन अध्ययन किया जा रहा है।

नासा को मिला विचित्र क्षुद्रग्रह
नासा अपने कई टेलीस्कोप एटलस (ATLAS) के जरिए क्षुद्रग्रहों का पता लगाता है। इसके जरिए उन क्षुद्रग्रह को ढूंढा जाता है जो पृथ्वी से टकरा सकते हैं। नासा इनका पता लगाकर भयानक स्थिति को होने से रोकने की कोशिश करती है। इसी खोज के दौरान नासा को एक ऐसाा विचिवत्र क्षुद्रग्रह मिला जिसकी सतह एक कठोर चट्टान होने की जगह पुच्छल तारे की तरह पूंछ है। अब तक नासा को 40 इस तरह के क्षुद्रग्रह मिले हैं।

गैस और धूल की नजर आई पूंछ
इस क्षुद्रग्रह को 2019LD नाम दिया गया है। पहली बार ये 10 जून 2019 को देखा गया था। एटलस ने फिर जुलाई में भी इसे देखा था। तब इसके पीछे धूल और गैस की पूंछ देखी गई थी, लेकिन यह पृथ्वी की जगह सूर्य के पीछे चला गया था इसलिए वैज्ञानिकों को इसके अध्ययन का मौका नहीं मिला। अब यह 2020 में दोबारा नजर आया है। इस क्षुद्रग्रह की पुच्छल तारे की तरह एक गैस और धूल की पूंछ है जो कम से कम पिछले एक साल से है।

ऐसे क्षुद्रग्रह ट्रोजन कहलाते हैं
ऐसे क्षुद्रग्रह उसी कक्षा में सूर्य का चक्कर लगाते हैं जो ग्रह का होता है। यह अपने ग्रह से या तो 60 डिग्री आगे होते हैं या फिर 60 डिग्री पीछे होते हैं। इन्हें ट्रोजन क्षुद्रग्रह कहते हैं। ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में बर्फ हो सकती है। क्षुद्रग्रह में अचानक आए बदलाव से पता चलता है कि इसमें से अचानक ही बर्फ, धूल और गैस निकलने लगी।

क्षुद्रग्रह और धूमकेतु में अतंर
क्षुद्रग्रह वे चट्टानें हैं जो बड़ी संख्या में मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच सूर्य का चक्कर लगाते हैं। कुछ क्षुद्रग्रह पृथ्वी के पास से भी होकर भी गुजरते हैं। वहीं धूमकेतु बर्फ, धूल और गैस से बने होते हैं और अपने पीछे एक लंबी पूंछ छोड़ते हुए आगे बढ़ते हैं।

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