'रिसाइकल माय बैट्री' से 38 हज़ार बैटरी रिसाइकिल कर चुके हैं निहाल

अब तक २ लाख से ज्यादा लोगों को इस मुहिम से जोड़ चुके हैं निहाल

By: Mohmad Imran

Published: 12 Dec 2020, 03:55 PM IST

निहाल तम्मना की उम्र यूं तो 11 साल की है लेकिन वे उपयोग की हुई बैट्री को यूं ही फेंक देने से उपजे खतरे को भली-भांति जानते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए निहाल ने हाल ही 'रिसाइकिल माय बैट्री' (Recycle My Battery) नाम से एक इनिशिएटिव शुरू किया है। उनकी यह मुहिम न्यू जर्सी राज्य के सीनेटर विन गोपाल ने पुरस्कृत भी किया है। निहाल लोगों में खराब और उपयोग की हुई बैट्री के सही निस्तारण और ऐसा न करने से होने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने, स्कूल, कॉॅलेज, लाइब्रेरी और गैर-लाभकारी संस्थाओं में कैम्पेन शुरू किया है। वे अपनी वेबसाइट के जरिए स्कूलों, लाइब्रेरी, निजी कंपनियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सर्टिफाइड बैट्री बिन और दोनों ओर से मुफ्त शिपिंग की सुविधा भी देते हैं। उनकी टीम में उन्हीं की उम्र के दर्जनों किशोर बच्चे शामिल हैं। वे अब तक ३८ हजार से ज्यादा खराब बैट्रियां एकत्र कर चुके हैं। उन्होंने अमरीका की सबसे बड़ी बैट्री रिसाइकिल संगठन के साथ मिलकर इन सभी बैट्री को रिसाइकिल कर पुन: उपयोग में लेने लायक बनाया है।

'रिसाइकल माय बैट्री' से 38 हज़ार बैटरी रिसाइकिल कर चुके हैं निहाल

जीता नेशनल अवॉर्ड
निहाल को इस प्रयास के लिए स्पेशल नेशनल रिसाइकिलिंग अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। इसके अलावा आधा दर्जन अन्य पुरस्कार भी शामिल हैं। टेस्ला के सह-संस्थापक जेबी स्ट्राबेल ने भी उनकी सराहना की है। दरअसल, बैट्रियों में इस्तेमाल होने वाली रेडवुड सामग्री रिसाइक्लिंग से जुड़ी है। निहाल अब तक 2 लाख से अधिक वयस्कों को जागरूक कर चुके हैं। इसके अलावा 70 हजार स्कूली छात्रों को ईमेल, आर्टिकल्स, सम्मेलनों और अखबारों से जोड़ चुके हैं। उनकी संस्था ने 15 से अधिक पुलिस अधीक्षकों से सहयोग पाया है और 150 से अधिक स्कूलों में बैट्री बिन रखे हैं।

'रिसाइकल माय बैट्री' से 38 हज़ार बैटरी रिसाइकिल कर चुके हैं निहाल

इसलिए है जरूरत
दरअसल, बैट्रियों में भारी धातुओं में पाए जाने वाले खतरनाक रसायन होते हैं, जो बैट्री के खराब या पूरी तरह से उपयोग हो जाने के बाद भी अत्यधिक घातक और जहरीली होती हैं। ऐसे में बैट्रियों के अनुचित निपटान के न होने से इनमें मौजूद जहरीले रसायन और अम्ल भूमि और जल आपूर्ति में मिल जाते हैं। इससे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का कारण बनते हैं। यूके में केवल 15 फीसदी मोबाइल्स की ही बैट्री रिसाइकिल हो पाती है। वहीं केवल 50 फीसदी लीथियम आयन बैट्री ही रिसाइकिल होती हैं।

Mohmad Imran
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