अब हमारे पसीने से भी चार्ज हो सकेंगे छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय केे इंजीनियरों ने सफलतापूर्वक एक ऐसा पहने जा सकने वाला माइक्रोग्रिड विकसित किया है जो हमारे पसीने को ऊर्जा में बदल सकता है। इसका मतलब है कि यदि आप इसका उपयोग करते हैं, तो दौडऩे, चलने, जॉगिंग या किसी भी शारीरिक गति से पसीने के जरिए ऊर्जा बना सकते हैं। इतना ही नहीं, इस ऊर्जा से छोटे उपकरणों को चार्ज भी कर सकते हैं।

By: Mohmad Imran

Published: 17 Mar 2021, 06:26 PM IST

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय केे इंजीनियरों ने सफलतापूर्वक एक ऐसा पहने जा सकने वाला माइक्रोग्रिड विकसित किया है जो हमारे पसीने को ऊर्जा में बदल सकता है। इसका मतलब है कि यदि आप इसका उपयोग करते हैं, तो दौड़ने, चलने, जॉगिंग या किसी भी शारीरिक गति से पसीने के जरिए ऊर्जा बना सकते हैं। इतना ही नहीं, इस ऊर्जा से छोटे उपकरणों को चार्ज भी कर सकते हैं।

अब हमारे पसीने से भी चार्ज हो सकेंगे छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

साइ-टेक (SciTech) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के नैनो-इंजीनियर्स द्वारा विकसित यह नई और अद्भुत तकनीक मानव शरीर से लेकर बिजली के छोटे उपकरणों तक ऊर्जा संग्रह और संचयन कर सकता है। हालांकि, इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि यह जो ऊर्जा पैदा करता है वह स्मार्टफोन या अन्य नियमित रूप से उपयोग होने वाले जरूरी गैजेट को चार्ज करने में सक्षम है या नहीं।

अब हमारे पसीने से भी चार्ज हो सकेंगे छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

ऐसे काम करती है यह तकनीक
आसानी से पहने जा सकनी वाली यह माइक्रोग्रिड तकनीक तीन मुख्य भागों से मिलकर बनी है। ये तीनों ही हिस्से गति से संचालित होते हैं यानी चलने पर ही काम करते हैं। इन उपकरणों को ट्राइबोइलेक्ट्रिक जनरेटर, ऊर्जा-भंडारण के लिए सुपरकैपेसिटर और पसीने से चलने वाले बायोफ्यूल (जैव ईंधन) सेल कहा जाता है। इस माइक्रोग्रिड को 30 मिनट के लिए एक व्यक्ति पर परीक्षण किया गया। इन प्रयोगों में दस मिनट की साइकिल चलाना, दौडऩा या व्यायाम करना जैसी गतिविधियां शामिल थीं। माइक्रोग्रिड से उत्पन्न ऊर्जा एक एलसीडी कलाई घड़ी या एक छोटे इलेक्ट्रोक्रोमिक डिस्प्ले (एक उपकरण है जो एक लागू वोल्टेज के जवाब में रंग बदलता है) को बिजली देने के लिए पर्याप्त थी। इसे बनाने वाले लू यिन का कहना है कि, यह माइक्रोग्रिड शरीर के उन उपकरणों को एकीकृत करता है जो चलने, दौडऩे या साइकिल चलाने जैसी गतिविधियों के दौरान ऊर्जा उत्पन्न करता है।

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ऐसे करता है एनर्जी स्टोर
इस वियरेबल माइक्रोग्रिड को विशेष रूप से पसीने से बिजली उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि इसके बायोफ्यूल सेल को उपयोगकर्ता की शर्ट के अंदर पहनना पड़ता है, विशेष रूप से छाती के हिस्से में। वहीं, इसके दूसरे हिस्से ट्राइब्रोइलेक्ट्रिक जनरेटर को धड़ के अग्र भाग और कमर के पास की बाजू पर शर्ट के बाहर पहना जाता है। पसीने और शारीरिक गतिविधियों के समय शरीर से निकलने वाली ऊर्जा को यह अपने सुपरकैपिसिटर में स्टोर करता है।

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