अब मजदूरों का पसीना नहीं जाएगा बेकार, पसीने से चार्ज होगा मोबाइल!

इसके साथ ही बार-बार खींचे और मोड़े जाने पर भी यह बायो बैटरी लगातार बिजली पैदा करने में सक्षम है

By: Priya Singh

Published: 09 Dec 2017, 04:42 PM IST

नई दिल्ली। आधुनिकता के इस ज़माने में, बिंगम्टन नाम की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्च टीम ने एक कपड़े पर मौजूद बैक्टीरिया से चार्ज होने वाली बायो-बैटरी की खोज की है। इस बैटरी को आने वाले समय में पहने जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ जोड़ा जा सकता है। यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल ऐंड कंप्यूटर साइंस के असिस्टेंट प्रफेसर सिओकें चोई की अगुवाई में एक टीम ने कपड़े पर एक बायो बैटरी बनाई है जो कागज पर आधारित माइक्रोबियल फ्यूल सेल के बराबर अधिकतम ऊर्जा पैदा कर सकती है।

इसके साथ ही बार-बार खींचे और मोड़े जाने पर भी यह बायो बैटरी लगातार बिजली पैदा करने में सक्षम है। रीयल टाइम इंफार्मेशन कलेक्शन के लिए लचीले और खिंचावदार विद्युत उपकरणों की जरूरत है, जिन्हें कई तरह के प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किया जा सके। हमने सतत, नवीनीकरण और ईकोफ्रेंडली क्षमताओं के कारण इस तरह की बायो बैटरी बनाने पर विचार किया क्योंकि यह काफी जरूरी ऊर्जा तकनीक है।

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इस यूनिवर्सिटी के प्रफेसर ने बताया कि कपड़े पर आधारित इन बायो बैटरी को भविष्य में पहने जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने बताया, "रीयल टाइम इन्फर्मेशन कलेक्शन के लिए फ्लेक्सिबल और स्ट्रेचेबल इलैक्ट्रॉनिक्स की जरूरत है जिन्हें कई तरह के प्लैटफॉर्म पर इस्तेमाल किया जा सके। हमने सतत, नवीनीकरण और ईकोफ्रेंडली क्षमताओं के कारण फ्लेक्सिबल और स्ट्रेचेबल बायो बैटरी पर विचार किया क्योंकि यह काफी जरूरी ऊर्जा तकनीक है।" परंपरागत बैटरी और एंजाइम पर आधारित फ्यूल सेल की तुलना में माइक्रोबियल फ्यूल सेल पहने जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सबसे अच्छे पावर सॉर्स हो सकते हैं क्योंकि ऐसे सेल लंबे समय तक बायॉकैटलिस्ट के तौर पर ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं।

प्रफेसर ने यह भी बताया, "अगर हम ऐसा मानें कि मानव शरीर में कोशिकाओं से ज्यादा बैक्टीरियल सेल्स होते हैं जो पावर रिसॉर्स के तौर पर काम कर सकते हैं।" इस रिसर्च को नैशनल साइंस फाउंडेशन, बिंगम्टन यूनिवर्सिटी फाउंडेशन की मदद से किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ये तकनीक पूरी दुनिया को उनके दैनिक काम आसानी से करने में मददगार साबित होगी।

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