25 साल का युवा उद्धमी अंतरिक्ष में चलाएगा सोने की खदान

युवा शक्ति: लिवरपूल होप यूनिवर्सिटी में उल्कापिंडों के उत्खनन पर शोध अध्ययन लिखते हुए आया आइडिय, 20 साल की उम्र में शुरू की एस्ट्रॉएड खनन कंपनी

By: Mohmad Imran

Published: 21 Mar 2021, 03:20 PM IST

युवा ब्रिटिश उद्यमी मिच हंटर-स्कलियन (Entrepreneur Mitch Hunter-Scullion) ने साल 2016 में जब एस्ट्रॉएड माइनिंग कॉर्पोरेशन (एएमसी) की स्थाना की थी, तब उन्होंने भविष्य के उद्योगों के एक नए युग की शुरुआत भी कर दी थी। उनकी कंपनी यूके का पहला स्टार्ट-अप है जो खगोलीय पिंडों खासकर उल्का पिंडों पर मौजूद बहुमूल्य धातुओं और खनिजों की खुदाई करने की तैयारी कर रहा है। 20 साल की उम्र में लिवरपूल विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में उल्कापिंडों के उत्खनन संबंधी शोध लेखन के दौरान ऐसा करने का विचार आया।

25 साल का युवा उद्धमी अंतरिक्ष में चलाएगा सोने की खदान

बनाएंगे क्षुद्रग्रहों का डेटाबेस
हाल ही एक इंटरव्यू में मिच ने बताया कि वर्ष 2030 में उनकी कंपनी क्षुद्रग्रहों पर खनन का काम शुरू कर देगी। इसके लिए जिस टेक्नोलॉॅजी की जरुरत पड़ेगी उसके लिए मिच ने जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी (Tohoku University Japan) के स्पेस रोबोटिक्स लैब से हाथ मिलाया है। एक 'क्यूबसैट' उपग्रह की मदद से अंतरिक्ष का अवलोकन कर हजारों क्षुद्रग्रहों के बारे में जानकारी एकत्र कर डेटाबेस का निर्माण किया जाएगा। इस डेटा को भविष्य के मिशनों के लिए अधिक उन्नत क्षमताओं के साथ फंड जुटाने के लिए बेचा जा सकता है।

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100 टन सोने की आस
कंपनी का अनुमान है कि एक 25 मीटर व्यास वाले क्षुद्रग्रह पर संभवत: 2.3 अरब पाउंड की 100 टन उपयोगी सामग्री जैसे सोना और प्लैटिनम मिलने की संभावना है। मिच का मानना है कि इन क्षुद्रग्रहों का खनन 21वीं सदी के मध्य के सबसे बड़े उद्योगों में से एक में विकसित हो सकता है। एक बढ़ती वैश्विक आबादी का संयोजन, परिमित संसाधनों की कमी और अंतरिक्ष में कम लागत लेकिन तेजी से पहुंचाने वाली तकनीक से ऐसा संभव हो सकता है।

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उपग्रह बनाने पर 23 करोड़ की लागत
मिच की कंपनी एएमसी क्षुद्रग्रह प्रॉस्पेक्टिंग सैटेलाइट वन (एपीएस1) को विकसित करने के लिए शैक्षणिक भागीदारों के साथ काम कर रही है। वर्णक्रमीय स्कैनिंग का उपयोग करते हुए उनका यह सैटेलाइट पहचान लेगा कि कौन-सा क्षुद्रग्रह पृथ्वी के सबसे नजदीक है जिस पर सबसे अधिक प्लैटिनम मिल सकता है। मिच इस सैटेलाइट को ग्लास्गो में ही विकसित करेंगे। इस पर करीब 23.10 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

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