तकनीक: सियाचिन के दुर्गम क्षेत्रों में खाना पहुंचाएगा ड्रोन, जानिए इसकी खासियत

- एचएएल तैयार कर रहा है 30 किलोग्राम संसाधन पहुंचाने वाला पहला ड्रोन
- 25 किलो भार ले जाने वाले 'चीता' को करेगा रिप्लेस

आनंद मणि त्रिपाठी

यलहंका एयरबेस बेंगलूरु। सियाचिन की दुर्गम पहाड़ी हो या फिर अरुणाचल प्रदेश का घना जंगल। भारतीय सेना को ऊंचाई वाले स्थानों पर संसाधन पहुंचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर उड़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ऐसा हेलीकाप्टर ड्रोन तैयार कर रही है, जो न केवल 30 किलोग्राम संसाधन ले जाने में सक्षम है, बल्कि धरती से साढ़े पांच किमी ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इससे सीमाई इलाकों में दुश्मन द्वारा जीपीएस ब्लॉक करके ड्रोन गिराने की कार्रवाई की जा सकती है। सियाचिन करीब 3.2 किमी की ऊंचाई पर स्थित है। यह विश्व का इतनी अधिक ऊंचाई पर 30 किलो भार के साथ उडऩे वाला इकलौता ड्रोन होगा। एचएएल में प्रोजेक्ट प्रबंधक सुशांत सिंह के अनुसार करीबन सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। जून 2022 तक यह ड्रोन उड़ान भरना शुरू कर देगा।

कई खासियतों से भरा ड्रोन -
24 घंटे में तीन उड़ान-
एचएएल के इस ड्रोन की खासियत यह है कि इसे दिन या रात सहित, कैसे भी मौसम में बड़ी खूबी के साथ संचालित किया जा सकता है। यह 24 घंटे में तीन बार उड़ान भर सकता है।
आम पेट्रोल काम लेंगे-
यह सामान्य पेट्रोल पर उड़ेगा। पिस्टन इंजन के लिए निविदा मांग ली गई है। इससे सेना का खर्च और घटेगा। सियाचिन में चीता हेलीकॉप्टर भी करीब 25 किलो वजन के साथ उड़ान भरता है। इसमें बहुत खर्च बढ़ जाता हैं।

200 किलोग्राम के साथ टेकऑफ
100 किमी प्रतिघंटा की तेज गति से भरता है  उड़ान
03 घंटे तक लगातार उड़ान, 100 किमी तक है इसकी रेंज
06 किमी उंचाई तक भर सकता है  उड़ान
5.5 किमी. ऊंचाई पर होवर कर सकता है
30 किलोग्राम तक उठा सकता है वजन

विकास गुप्ता
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