सूरज है 'स्पेस कॉमर्स' के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा

नासा और एलन मस्क जैसे billionare भले ही कितने अरबों रूपये खर्च कर लें स्पेस टूरिज़्म की उनकी योजना तभी परवान चढ़ेगी जब सूरज से दोस्ती होगी लेकिन 450 करोड़ हमारा सूरज भले ही पृथ्वी से 93 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर हो लेकिन धरती पर सबकुछ सूरज से ही गतिमान है ऐसे में सूरज से मिलने वाली चुनौतियों से पार पाए बिना स्पेस कॉमर्स अभी हमारे लिए दूर की ही कौडी है। इसी पर पेश है ये रिपोर्ट

हमारे सौरमंडल के मौसम पर आकाशगंगा में मौजूद ग्रहों और सितारों का गहरा प्रभाव पड़ता है। दूसरे शब्दों में 21वीं सदी में समाज के आधार बन चुके हमारे उपग्रह, मोबाइल नेटवर्क, एयरलाइंस और इलेक्ट्रिक ग्रिड पर भी अंतरिक्ष के मौसम का महत्त्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव पड़ता है। मार्च 1989 में एक सौर तूफान ने पृथ्वी को झकझोर कर रख दिया था। तूफान के कारण कनाडा के क्यूबेक में बउ़े पैमाने पर ग्रिड प्रभावित हुए जिससे अधिकांश प्रांतों में बिजली संकट उत्पन्न हो गया और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। तीन दशक बाद आज ऐसा कोई भी सौर तूफान 1989 की तुलना में आज ज्यादा तबाही ला सकता है। यहां तक कि 2012 में यूएस नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल ने भी इस खतरे के बारे में चेताया था जिसमें काउंसिल ने परमाणु युद्ध, वैश्विक महामारी, यूरोपीय संध का पतन और अमरीकी विघटन की भी आशंका जताई थी।

सूरज है 'स्पेस कॉमर्स' के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा

सूरज को समझने की तैयारी
फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से इस सप्ताह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के 150 करोड़ रुपए के संयुक्त मिशन SOLAR ORBITOR का उद्देश्य अंतरिक्ष अन्वेषण और स्पेस कॉमर्स के विकास लिए सूरज के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पाना है। विकिरण और अत्यधिक आवेशित कणों के साथ सौर प्रणाली के बारे में गहन जानकारी प्रापत करना लंबे समय से मानव प्रयासों का हिस्सा रहे हैं। क्योंकि सूरज कों समझने के साथ ही हम न केवल पृथ्वी पर अपनी कमजोर प्रौद्योगिकी प्रणाली को सुरक्षित रख सकेंगे बल्कि भविष्य में नए उपग्रहों के लॉन्च में भी हमें अरबों डज्ञॅलर की लागत से बनने वाले इन उपग्रहों की रख करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में विभिन्न देशों के 2000 से ज्यादा उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में तैर रहे हैं जिनसे अब अंतरिक्ष भी जाम की स्थिति के करीब पहुंच गया है। सोलर ऑर्बिटर मिशन के सह-अन्वेषक और वरिष्ठ वैज्ञानिक पीटर रिले के 2014 में प्रस्तुत एक शोध पत्र के अनुसार, पृथ्वी के लिए खतरा बन सकने वाली भीषण सौर घटना की संभावना अभी 100 साल दूर है। जबकि आगामी एक दशक में ऐसा होने की केवल 12 फीसदी आशंका है।

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वैज्ञानिक ढूंढ रहे हैं बचाव के तरीके
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म स्केल में पांच स्तर पर सौर तूफान जैसी घटनाओं की विभीषिका मापी जाती है। इस स्केल में G5 को अत्यधिक खतरनाक तूफान माना जाता है। इससे इलेक्ट्रिकल ग्रिड नष्ट हो जाने या ब्लैकआउट और उपग्रह नेविगेशन में बाधा सामान्य परेशानियां हैं। आईसीएफ कंसल्टिंग सर्विसेज के अनुसार इस तरह की घटनाएं कितनी महंगी साबित हो सकती हैं इसका अंदाजा 2003 में उत्तर-पूर्वी अमरीका की घटना से लगाया जा सकता है। जहां ऐसे ही खराब सौर मौसम के कारण बिजली गुल हो जाने से करीब 1030 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसलिए अमरीका जैसे विकसित देश अब सूरज निर्मित ऐसे खतरों से बचाव के लगातार उपाय ढूंढने में लगे हुए हैं। हालांकि, एक बड़ी समस्या यह है कि सूरज कैसे संचालित होता है इसके बारे में अब भी वैज्ञानिक अनजान हैं। नासा के हेलियोफिजिक्स डिवीजन की निदेशक निकोला फॉक्स का कहना है कि पृथ्वी पर सबकुछ सूरज से ही संचालित होता है। इसलिए इसे समझना जरूरी है।

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सोलर ऑर्बिटर से उम्मीद
सौर ऑर्बिटर का वजन करीब 118 किलोग्राम है और यह अपने साथ 10 उपकरण लेकर सूरज की जांच करेगा। यह सूर्य के धु्रवों से छवियों और अन्य डेटा को एकत्र करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन जाएगा। यह सूरज की सतह से करीब4.18 करोड़ किमी की औसतन दूरी से गुजरेगा। ऑर्बिटर एक अन्य नासा मिशन पार्कर सोलर प्रोब के साथ भी काम करेगा ताकि डेटा की पुष्टि और स्पष्टता की जांच की जा सके। सौर ऑर्बिटर को बीते सप्ताह ही लॉन्च कर किया गया है जो मई से सूरज की कक्षा के इर्द-गिर्द खोजबीन शुरू कर देगा। जबकि डेटा कलेक्ट करने का अपना प्राथमिक मिशन यह नवंबर 2021 में शुरू करेगा।
लगभग 450 करोड़ साल पुराना सूरज आज एक एक मध्यम आयु वर्ग का हमारी आकाशगंगा का एक छोटा चमकता हुआ तारा है। वैज्ञानिकों ने 1755 में 11 साल की गतिविधि चक्रों का उपयोग कर सूरज पर करीब से ध्यान देना शुरू किया। बढ़ी हुई सनस्पॉट गतिविधि आमतौर पर सौर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन का संकेत है। ये बदले में चुंबकीय तूफान पैदा करते हैं जो पृथ्वी को प्रभावित कर सकते हैं। इसका वर्तमान २४वां चक्र अभी कम सक्रिय है। दिसंबर में अमरीकी स्पेस वेदर प्रीडिक्शन सेंटर नोवा के सहयोग से अनुमान लगाता है कि इस साल शुरू हो रहे इसके २५वें चक्र से अधिक खतरा है। सेंटर का अनुमान है कि इस चक्र में 115 सौर तूफान शामिल हो सकते हैं, जबकि इसकी अवधि भी साल 2025 तक है जब चक्र की तीव्रता अधिकतम होगी।

सूरज है 'स्पेस कॉमर्स' के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा

पृथ्वी को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे बड़ी सौर घटना 1859 में हुई। इसे कैरिंगटन घटना कहा जाता है। यह हादसा इतना भीषण था कि इसने टेलीग्राफ लाइनों में भी आग पकड़ ली थी। शोध यह भी बताएगा कि सौर गतिविधि की भविष्यवाणी करने के लिए सौर ऑर्बिटर का उपयोग कैसे किया जाए जिससे यह पता लग सके कि सूरज के कोरोनल मास इजेक्शन कैसे बनता है और वे अंतरिक्ष में कैसे त्वरित होते हैं।

सूरज है 'स्पेस कॉमर्स' के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा
Mohmad Imran Desk/Reporting
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