विज्ञान शख्सियत: वह महिला वैज्ञानिक जिनके बिना इंसान कभी चांद पर पांव नहीं रख पाता

दुनिया के पहले चंद्र मिशन अपोलो 11 के लिए बनाए उनके सॉफ्टवेयर कोड के कारण ही आज सॉफ्टवेयर इंजीनियर का अस्तित्त्व है। उन्होंने ही सबसे पहले 'सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' शब्द ईजाद किया था।

By: Mohmad Imran

Published: 09 Sep 2020, 03:50 PM IST

आज के ज्यादातर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को यह जानकर हैरानी होगी कि वो जिस काम से पहचाने जाते हैं उस 'सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' की नींव एक महिला वैज्ञानिक ने रखी थी। मारग्रेट एच. हैमिल्टन एक जानी-मानी गणितज्ञ (Mathematician) और कम्प्यूटर विज्ञान (Computer Science) की सबसे शुरुआती जानकारों में से एक हैं। उनका नाम वैज्ञानिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा क्योंकि उन्होंने दुनिया के सबसे पहले चंद्र मिशन और नासा के अपोलो-11 मिशन के सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग डिविजन के हैड के तौर पर नैविगेशन सिस्टम (Navigation System) और कम्प्यूटर कोड्स (Computer Codes) विकसित किए थे। इसे साफ शब्दों में यूं समझ सकते हैं कि उनके बिना इंसान का चांद पर कदम रखने का सपना पूरा नहीं इहो पाता। उन्होंने एमआइटी इंस्ट्रूमेंटेशन लैब्रोरेट्री में इन कोड और गाइडेंस नेविगेशन सिस्टम बनाया था।

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इसलिए दिया 'सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' नाम
हैमिल्टन बताती हैं कि उन्होंने इसे 'सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' की बजाय कोई और नाम क्यों नहीं दिया। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस दौर में साइंस और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए ढेरों चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। मैंने भी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को सम्मान और वैधता दिलाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी ताकि यह और इसे बनाने वाले लोगों को इसका उचित आदर मिले। यही वजह है कि मैंने इसे हार्डवेयर और अन्य प्रकार की इंजीनियरिंग से अलग करने के लिए खासतौर से 'सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया। जब मैंने पहली बार इस शब्द का उपयोग करना शुरू किया तो इसका काफी मजाक बनाया गया। लेकिन आखिर में इसे सभी ने आदर के साथ स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग जानते ही नहीं थे कि वे किस पेशे में है। इसलिए वे शुरू से यह चाहती थीं कि इसे इंजीनियरिंग के किसी अन्य क्षेत्र के रूप में सम्मान दिया जाए। हैमिल्टन ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग शुरुआत में नासा के अपोलो कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं था। लेकिन 1965 आते-आते स्पष्ट हो गया था कि इसके बिना वे चांद पर कभी नहीं पहुंच पाएंगे। जब हैमिल्टन इसप्रोग्राम में शामिल हुईं तब नासा को उम्मीद हुई कि वे अब दुनिया का सबसे पहला चंद्र मिशन भेजने में कामयाब हो सकते हैं।

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चुनौती चांद तक पहुंचने जितनी बड़ी
मारग्रेट और उनकी टीम के विकसित किए गए अंतरिक्ष मिशन सॉफ्टवेयर का मैन्युअली मूल्यांकन किया जाना था। इसलिए यह जरूरी था कि उनके कोड और प्रोग्राम न केवल काम करें बल्कि ये पहली ही बार में सफल भी होने चाहिए थे। इसके लिए न केवल सॉफ्टवेयर को खुद बिल्कुल सटीक और फुल-प्रूफ होना चाहिए था बल्कि यह मिशन के दौरान रियल टाइम में किसी भी तकनीकी खराबी का पता लगाने और उसे ठीक करने में भी सक्षम होनी चाहिए थी। लेकिन हमारी 'लैग्वेज' (Software Language or सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में एक टर्म जो कोड और प्रोग्राम बनाने में काम आती है) ने हमें त्रुटियों को दूर करने की हिम्मत दी। हमने अपने दम पर सॉफ्टवेयर बनाए अपनी गलतियों से रोज सीखा। उनके सॉफ्टवेयर ने सफलतापूर्वक काम किया और जब दुनिया का पहला चंद्रयान अपोलो 11 चंद्रमा पर उतरने वाला था तब मारग्रेट के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम ने सामान्य ऑपरेशन को ओवररोड किया ताकि अंतरिक्ष यात्रियों को किसी भी संभावित परेशानी का पता चल सके। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि मारग्रेट ने यह सारे कोड अपोलो प्रोजेक्ट के लीड सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर 1969 में अपनी टीम की मदद से हाथों से लिखे थे।

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ऐसे बनाया चंद्र मिशन को सफल
अपोलो 11 मिशन इंसान का अंतरिक्ष में पहला कदम था इसलिए इसे किसी भी कीमत पर सफल होना जरूरी था। लेकिन मिशन के दौरान परेशानी तब आई जब नील आर्र्मस्ट्रॉंग उतरने की तैयारी में थे। लेकिन धरती पर नासा के मुख्यालय में मौैजूद कंप्यूटर रेंडेजवियस राडार और लैंडिंग सिस्टम से मिले कमांड के कारण ओवरलोड हो गया था। इसे ठीक करने के लिए कंप्यूटर को अधिक से अधिक प्रोसेसिंग पॉवर की जरुरत थी। उस समय राडार अपनी 13 फीसदी क्षमता पर और लैंडिंग सिस्टम 90 फीसदी क्षमता पर चल रहे थे लेकिन इसे संतुलित करने के लिए प्रोसेसिंग को बढ़ाना आवश्यक था। लेकिन हैमिल्टन ने कंप्यूटर को क्रमबद्ध काम करने की बजाय किसी खास समय की जरुरत और महत्त्व के अनुसार काम करने के लिए प्रोग्राम किया था। जब कम्प्यूटर और लैंडिंग सिस्टम पर प्रायोरिटी प्रदर्शित होती है तभी अंतरिक्ष यात्रियों को यान से उतरने या न उतरने का निर्णय लिया जाता है। लेकिन हैमिल्टन के सॉफ्टवेयर्स ने स्थिति को संभाल लिया और इस तरह मानव का पहला कदम चांद पर पड़ा और हमेशा के लिए अमर हो गया।

विज्ञान शख्सियत: वह महिला वैज्ञानिक जिनके बिना इंसान कभी चांद पर पांव नहीं रख पाता

अपोलो-11 मिशन के बाद भी हैमिल्टन ने नासा के शेष अपोलो मिशनों के साथ-साथ स्काई लैब, अमरीका के पहले अंतरिक्ष स्टेशन पर भी काम करना जारी रखा। उनकी कड़ाई से निर्दिष्ट डिजाइन विधियां आज कई आधुनिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग तकनीकों का आधार बन गई हैं। आज उनकी कंपनी खरबों डॉलर की है और वे महिलाओं के लिए बदलाव के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें नासा के 'एक्सेप्शनल स्पेस एक्ट अवॉर्ड, 2003 और 2016 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अमरीका का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' भी प्राप्त हुआ है।

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Mohmad Imran Desk/Reporting
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