तो क्या इसलिए लोग मदद करने से कतराते हैं?

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान प्रोफेसर डैनियल फेस्लर कई सालों से दया के सकारात्मक प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। डैनियल उकला (यूसीएलए) सोशल साइंसेज बिल्डिंग में इस विषय पर कार्यशालाओं का भी आयोजन करते हैं।

By: Mohmad Imran

Published: 23 Oct 2020, 06:14 PM IST

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (University of California) के समाजशास्त्र के डीन डीनल हंट का कहना है कि शोध में सामने आया कि हम दया और मदद करने की भावना से हृदय रोग, अवसाद और कैंसर के बढऩे की गति को कम कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने अवसादग्रस्त छात्रों पर दयालुता के प्रभावों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। हंट का कहना है कि एक-दूसरे के साथ सहयोग करने की भावना हमारी अंदरूनी क्षमता है। शोध के अनुसार यदि आप दयालु नहीं हैं और अपने आप पर दया नहीं करते हैं तो दूसरों के लिए भी ऐसा करना कठिन होगा। यह भावना इतनी शक्तिशाली है कि यह तेजी से आस-पास के लोगों को प्रभावित करती है। शोध में सामने आया कि जिन लोगों ने दया की भावना को जगाने वाले वीडियो देखे थे वे ऐसे लोगों की सहायता करने में उन लोगों से ज्यादा उदारता से पेश आए जिन्होंने जरुरतमंद व्यक्ति से आमने-सामने संवाद नहीं किया था।

शोध में आया सामने कि मदद करने से क्यों बचते हैं लोग

इसलिए दिखाते हैं हम दयालुता
दरअसल, जब लोगों को किसी तरह का भावनात्मक बढ़ावा मिलता है तब वे अधिक सामाजिक और दयालू हो जाते हैं। भावनात्मक परिस्थितियों को जाकर हम उस व्यक्ति के लिए चिंता करने लगते हैं। जब लोगों का आपस में संवाद ज्यादा होता है तो एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक प्रभाव के कारण हम ज्यादा दयालु हो जाते हैं।

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