साइंस पर्सनैलिटी: इस महिला वैज्ञानिक के दिमाग की उपज है आज का जीपीएस सिस्टम

ग्लेडिस वेस्ट ने ऐसे समय में साइंस और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया जब अमरीका में रंगभेद चरम पर था और महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं थे।

By: Mohmad Imran

Published: 09 Sep 2020, 05:15 PM IST

आज जिस ग्राउंड पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस (GPS) का इस्तेमाल हम अपने मोबाइल, कम्प्यूटर यहां तक की ड्रोन और राडार में करते हैं वह नासा की पूर्व वैज्ञानिक ग्लेडिस वेस्ट की देन है। ग्लेडिस आज 90 साल की हो चुकी हैं लेकिन हमारी मॉडर्न तकनीक आज इतनी उन्नत न होती अगर इन्होंने जीपीएस प्रणाली न बनाई होती। आधुनिक सैटेलाइट से लेकर भविष्य की ड्राइवरलैस कार और सुरक्षा की उच्च तकनीकें आज जीपीएस पर ही आधारित हैं। उन्होंने ऐसे समय में साइंस और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया जब अमरीका में रंगभेद चरम पर था और महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं थे। उन्होंने अपनी मेहनत के बूते उपग्रह की परिस्थितियों का लेखा-जोखा तैयार किया और उसके आधार पर जटिल गणितीय गणनाएं कीं जिससे भौगोलिक स्थिति को पहचानने की सटीक प्रणाली का जन्म हुआ।

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गणितज्ञ जिसने भविष्य बदल दिया
आज गूगल मैप या किसी भी ऐप से दिशा ढूंढने की सहूलियत के लिए हमें वेस्ट का आभारी होना चाहिए। वे अब एक सेवानिवृत्त गणितज्ञ के रूप में अमरीका के वर्जीनिया में रहती हैं। उनके पूर्व नियोक्ता यूएस नेवी ने उन्हें जीपीएस तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय देते हैं। 1956 से 1999 में अपने रिटायरमेंट तक वे एक नौसेना बेस में इंजीनियरों की टीम के साथ काम करती रहीं। उनकी तकनीक ने हम सभी का जीवन बदल दिया। वेस्ट ने छात्रवृत्ति पर वर्जीनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था और मास्टर डिग्री हासिल करने से पहले दो साल तक एक गणित शिक्षक के रूप में काम किया। जब वह 1956 में नौसैनिक अड्डे पर नियुक्त हुईं तो वहां केवल चार अफ्रीकी मूल के अमरीकी कर्मचारी तैनात थे।

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नौसेना के लिए बनाई थी जीपीएस तकनीक
अपने शुरुआती उपग्रह-डेटा प्रोजेक्ट को याद करते हुए वेस्ट बताती हैं कि उन्होंने 1950 और 1960 में इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के साथ काम किया। देश की नौसेना और सुरक्षा तकनीकों को और अधिक पुख्ता करने के मकसद से उन्होंने भविष्य को ध्यान में रखते हुए नवीन तकनीकों पर काम करना शुरू किया। उन्होंने उपग्रह जियोडेसी (वह विज्ञान जो पृथ्वी के आकार और स्वरूप को मापता है) पर काम किया और जीपीएस की सटीकता और उपग्रह डेटा की माप में योगदान दिया।

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साल 2000 में उन्हें वर्जीनिया पॉलिटेक्निक संस्थान से सार्वजनिक प्रशासन में डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। उन्होंने जिस तकनीक को बनाने में मदद की आज पूरी दुनिया में उसका उपयोग किया जाता है। जीपीएस तकनीक ने दुनिया की सोच और क्षमताओं को बदल दिया है, विशेष रूप से सफर को। हालांकि वे अब भी अपनी कारों में जीपीएस का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

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Mohmad Imran Desk/Reporting
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