महिला के शरीर ने नया चेहरा नहीं किया स्वीकार

महिला के शरीर ने नया चेहरा नहीं किया स्वीकार
अब तक दुनिया भर में करीब 40 फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी संपन्न हुई है।

Mohmad Imran | Updated: 30 Sep 2019, 06:01:25 PM (IST) विज्ञान और तकनीक

महिला के शरीर ने नया चेहरा नहीं किया स्वीकार


-कारमेन ब्लैंडिन टारलटन ने इसके बावजूद हार नहीं मानी है और वे तीसरा फेस ट्रांसप्लांट करवाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

विज्ञान आज इतनी उन्नति कर चुका है कि शरीर के जीवनदायी अंगों को प्रत्यारोपित कर किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। साल 2005 में फ्रांस में सबसे पहले किसी जीवित व्यक्ति के चेहरे का प्रत्यारोपण किया गया था। जबकि दुनिया का फुल फेस ट्रांसप्लांट साल 2010 में स्पेन में हुआ था। लेकिन विज्ञान के इन चमत्कारों के बावजूद प्रकृति के आगे हम आज भी बेबस हैं। कुछ ऐसी ही बेबसी हाल ही में देखने को मिली इंग्लैंड के उत्तरी हैम्पशायर की रहने वाली कारमेन ब्लैंडिन टारलटन के मामले में। 51 साल की कारमेन का हाल ही दूसरी बार चेहरा प्रत्यारोपित किया गया है लेकिन उनके शरीर ने नए चेहरे को स्वीकार नहीं किया। उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली उनके नए चेहरे को नकार रही है। उनके चेहरे के ऊत्तक काले पड़ जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं और चेहरे पर सूजन आ जाती है। कारमेन ने इसके बावजूद हार नहीं मानी है और वे अब तीसरा फेस ट्रांसप्लांट करवाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

ज्यादातर चिकित्सकों का कहना है कि प्रत्यारोपण करवा चुके सभी मरीजों को अपने शेष जीवन में किसी न किसी बिंदु पर दोबारा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी।

क्या है पूरा मामला
कारमेन को 12 साल पहले उनके पति ने घरेलू हिंसा में अपने बेसबॉल के बल्ले से बुरी तरी पीटा जिसमें उनके चेहरे की हड्डी और मांस फट गया। इसके बाद उनके पति ने उन्हें जान से मारने के मकसद से केमिकल डालकर जला दिया। इससे उनका शरीर 80 फीसदी तक झुलस गया। दर्जनों सर्जरी और 2013 में पहले फेस ट्रांसप्लांट के बाद उनकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ। उनकी एक आंख में सिंथेटिक कॉर्निया लगाया गया है जिससे वे थोड़ा बहुत देख पाती हैं। मैनचेस्टर निवासी कारमेन की बीते तीन महीने में 40 सर्जरियां हो चुकी हैं। दर्जनों सर्जरी के दौरान उनके चेहरे की रक्त वाहिकाओं को इस कदर काट दिया है कि उनका प्रत्योरोपित चेहरा प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ ताल-मेल नहीं बिठा पा रहा है। अब उनके सामने दो ही विकल्प हैं- या तो पुन: फेस ट्रांसप्लांट करवाएं या फिर अपने पुराने क्षतिग्रस्त चेहरे को ही फिर से सर्जरी के जरिए ठीक करने की कोशिश करें।

51 साल की कारमेन का हाल ही दूसरी बार चेहरा प्रत्यारोपित किया गया है लेकिन उनके शरीर ने नए चेहरे को स्वीकार नहीं किया।

विफल हो रहे हैं फेस ट्रांसप्लांट
प्रत्योरोपित होने वाले गुर्दे, हृदय और फेफड़े जैसे अंग आमतौर पर नए शरीर को आसानी से अपना लेते हैं। लेकिन चेहरे के प्रत्यारोपण का क्षेत्र अभी भी प्रायोगिक अवस्था में है। अब तक दुनिया भर में करीब 40 फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी संपन्न हुई है। बोस्टन के ब्रिघम महिला अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी प्रत्यारोपण के निदेशक बोहडन पोमोहाक (कारमेन के सर्जनों में से एक) ने बताया कि विज्ञान अब भी इस क्षेत्र में बहुत आगे नहीं जा सका है। साल 2008 में अमरीका का पहला फेस ट्रांसप्लांट करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले सर्जन ब्रायन गैस्टमैन का कहना है कि पहले प्रत्यारोपण के बाद से ही अधिकतर फेस ट्रांसप्लांट विफल हो रहे हैं। ज्यादातर चिकित्सकों का कहना है कि प्रत्यारोपण करवा चुके सभी मरीजों को अपने शेष जीवन में किसी न किसी बिंदु पर दोबारा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी।
सर्जरी के कारण कारमेन की प्रतिरक्षा प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसलिए नए चेहरे की गर्दन, चेहरे की त्वचा, नाक, होंठ और मांसपेशियों और रक्त धमनियों को अपनाया ही नहीं। चिकित्सकों ने कारमेन के नए चेहरे को शरीर के साथ जुडऩे का अवसर देने के लिए उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बंद कर दिया लेकिन इससे उन्हें गंभीर संक्रमण का खतरा बना रहा। हालांकि यह तरीका काम कर गया। इस बीच उनकी आंख का सिंथेटिक कॉर्निया भी खराब हो गया है। लेकिन वे तमाम मुश्किलों के बावजूद फिर से वापस उसी स्थिति में नहीं लौटना चाहतीं जहां वे छह साल पहले थीं।

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