वैज्ञानिकों ने मशीन को कर दिया ज़िंदा, संक्रमण रोकने से लेकर रेडियोएक्टिव प्रदुषण को रोकने में सक्षम

वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर एल्गोरिदम और मेंढक की भ्रूण कोशिकाओं से इस नए जीव को बनाया है।

हाल ही वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला ऐसा जीव तैयार किया है जिसमें जीव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) दोनों के गुण हैं। सरल शब्दों में यह मानव निर्मित पहली 'जीवित मशीन' (Living Machine) है। 650 से 750 माइक्रोन व्यास वाला यह जीव सुई की नोंक से भी छोटा है। मैसाच्युसेट्स स्थित टफ्ट विश्वविद्यालय (Tuft University) के शोधकर्ताओं ने इसे बनाने में अफ्रीकी मूल के ज़ेनोपस लाविस नाम की मेंढकों (Frog) की कोशिकाओं का उपयोग किया है।

वैज्ञानिकों ने मशीन को कर दिया ज़िंदा, संक्रमण रोकने से लेकर रेडियोएक्टिव प्रदुषण को रोकने में सक्षम

शोधकर्ताओं ने मेंढक के जीवित ऊत्तकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा डिजाइन किए 3D प्रिंटेड शरीर में असेम्बल कर दिया। इससे 'जेनोबोट' नामक इस नए जीव की उत्पत्ति हुई जिसकी कोशिकाएं किसी भी ज्ञात उभयचर (Amphibions) से नहीं मिलती हैं। ये चलते-फिरते जीव महज एक सप्ताह तक ही जीवित रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इनका कोरोनावायरस जैसे प्रकोप के समय सुरक्षित तरीके से संक्रमित रोगी के शरीर में दवा पहुंचाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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प्रोग्राम किए जीव हैं
वरमोंट विश्वविद्यालय (Vermont University) के कम्प्यूटर विज्ञानी और रोबोटिक्स विशेषज्ञ जोशुआ बोंगार्ड ने कहा कि 'जेनोबोट' दरअसल कलाकृतियों (Artifact) का एक नया समूह है जिसे हम अपने हिसाब से प्रोग्राम कर सकते हैं। टफ्ट विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर रीजेनरेटिव एंड डवलपमेंट बायोलॉजी के निदेशक एवं सह-लेखक माइकल लेविन ने कहा कि इनका उपयोग जहरीली गैसों को फैलने से रोकने, रेडियोधर्मी प्रदूषण को नष्ट करने, समुद्री में घुले माइक्रोप्लास्टिक को एकत्र करने और मानव धमनियों में जमा प्लाक या ब्लॉकेज को भी नष्ट करने में कर सकते हैं।

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Mohmad Imran Desk/Reporting
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