109 करोड़ का रेत ठेका, 244 करोड़ की सड़क जर्जर, अब जनता परेशान

पुलिस, खनिज और राजस्व विभाग के अफसरों की आंखों के सामने दौड़ते हैं रेत के डंपर

By: Kuldeep Saraswat

Published: 19 Sep 2020, 10:44 AM IST

सीहोर. रेत के ओवरलोड़ डंपर से नसरुल्लागंज क्षेत्र की अधिकांश प्रमुख सड़क जर्जर हो गई हैं। बारिश का सीजन होने के कारण मिट्टी में नमी है, जर्जर सड़क पर चालक की जरा सी नजर चूकती है, वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं। सीहोर-नसरुल्लागंज मार्ग पर छिंदगांव में बजरंग मंदिर के पास शुक्रवार सुबह 4 बजे से पांच किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि एक रेत का डंपर गड्ढ़़े में फंस गया है। पुलिस और होमगार्ड के कुछ सैनिक जाम खुलवाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक जाम नहीं खुला है। इस रोड के रोज करीब 500 डंपर निकलते हैं। ओवरलोड़ डंपर से सड़क पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

नसरुल्लागंज क्षेत्र में रेत के ओवरलोड़ डंपर से केवल 70 किलोमीटर की एक यही सड़क जर्जर नहीं हुई है, कुल 105 किलोमीटर डामर, सीसी सड़क खराब हो गई हैं, जिनकी कीमत करीब 200 करोड़ रुपए है। रेत ठेकेदार से सरकार को महज 109 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा और रेत कंपनी के डंपरों ने 244 करोड़ से ज्यादा की सड़कों को बर्बाद कर दिया है। ठेका मार्च 2021 तक है, तब तक बची हुई सड़कों की भी हालत खराब हो जाएगी। रेत के ओवरलोड़ डंपर सड़कों की सूरत बिगाड़ रहे हैं, इसका अफसरों को भी पता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग सब चुप्पी साधे हुए हैं।

नसरुल्लागंज से सीहोर
लंबाई : 70 किलोमीटर
ट्रैफिक : 1500 वाहन प्रतिदिन
डंपर : 500 रोज
अनुमानित लागत : 140 करोड़
स्थिति : सड़क जर्जर हो चुकी है। पांडा गांव के पास सीप नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण सीहोर के साथ इंदौर, देवास, उज्जैन, धार का ट्रैफिक भी इसी रूट से निकल रहा है। सड़क से एक साथ लाइन लगातार 100 से 150 तक डंपर निकले थे, जिससे के कारण दूसरे लोग इस रूट से निकलने में डरने लगे हैं।

नसरुल्लागंज से गोपालपुर
लंबाई : 25 किलोमीटर
ट्रैफिक : 2500 वाहन प्रतिदिन
डंपर : 150 रोज
अनुमानित लागत : 50 करोड़
स्थिति : नसरुल्लागंज से सेमलपानी होते हुए गोपालपुर को जोडऩे वाले इस प्रमुख मार्ग से इंदौर, खातेगांव, नेमावर, हारदा का ट्रैफिक भी निकलता है। रेत के डंपरों से सड़क जर्जर हो गई है। रात-दिन रेत के डंपर दौड़ते रहते हैं। ओवरलोड़ रेत के डंपरों से इस रोड पर कई हादसे हो चुके हैं। जब एक साथ डंपर निकलते हैं तो आस-पास गांव के लोग डरते हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत भी की है।

इटारसी से छिपानेर
लंबाई : 9 किलोमीटर
ट्रैफिक : 1500 वाहन प्रतिदिन
डंपर : 500 रोज
अनुमानित लागत : 18 करोड़
स्थिति : इटारसी से छिपानेर गांव पर रात-दिन रेत के डंपर दौड़ते रहते हैं। सड़क किनारे गांव बसे हुए हैं। ग्रामीण कई बार ओवरलोड़ डंपरों का रूट बदलवाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर चुके, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सीसी रोड में क्षमता से अधिक रेत लेकर दौडऩे वाले डंपरों के कारण चौड़ी दरार आ गई है। इस सड़क का निर्माण कुछ साल पहले ही किया गया था।

कोलार डैम से बिलकिसगंज
लंबाई : 22 किलोमीटर
ट्रैफिक : 1000 वाहन प्रतिदिन
डंपर : 100 रोज
अनुमानित लागत : 44 करोड़
स्थिति : कोलार डैम से बिलकिसगंज के बीच पांच साल पहले प्रधानमंत्री सड़क योजना जर्जर हो गई है।रोजाना 100 से अधिक ओवरलोड रेत के निकलते डंपरों ने सड़क की हालत यह कर दी कि हर कदम पर गड्ढों के अलावा कुछ नजर नहीं आएगा। इससे लोगों को वाहन से दूर पैदल चलना दुखदायी साबित हो रहा है। कोलार डैम, खारी, आबिदाबाद, जीवनताल, गुलर छापरी, देवलिया, चिकलपानी, बावडिय़ा खाल, झालपिपली, मगरपाठ, सारस, खजूरी सहित 30 गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
वर्जन...
- पुलिस निरंतर रेत के वाहनों पर कार्रवाई कर रही है। नर्मदा तटीय थाने के स्टाफ को सख्त निर्देश दे रखे हैं कि वह नियम के खिलाफ किसी का भी रेत डंपर निकले, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एसएस चौहार, एसपी सीहोर

Kuldeep Saraswat
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