चार स्कूलों के 312 बच्चे दो शिक्षकों के हवाले

राष्ट्रीय पर्व पर मिलती है बच्चों को मध्याह्न भोजन में खीर, रोजाना स्कूल के नहीं खुल रहे ताले

By: Manoj vishwakarma

Updated: 20 Jul 2018, 01:27 PM IST

लाड़कुई/ सीहोर. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के सरकारी स्कूल में छात्र-छात्राओं को शिक्षा मिलना हकीकत से कोसों दूर है। नियमित रूप से स्कूल के ताले ही नहीं खुल रहे हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाड़कुई गांव से लगे आदिवासी क्षेत्र में चार अलग-अलग स्थानों पर चार स्कूलों में दो शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई का जिम्मा दे रखा है। इनमें एक शिक्षक के पास बीएलओ का चार्ज रहने से वह अधिकांश स्कूल में उपस्थित ही नहीं रहते हैं।

 

सरकार द्वारा भले ही शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षण व्यवस्था के हालात गंभीर हैं। शिक्षण कार्य में केवल कागजों की खानापूर्ति करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ जारी है। संकुल लाड़कुई के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ग्राम मोगराखेड़ा में अलग-अलग स्थानों पर चार स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें मोगराखेड़ा में प्राथमिक और मिडिल स्कूल तो कुछ दूरी पर स्थित हैं, वहीं मोगराखेड़ा टप्पर और आईखेड़ा स्थित स्कूलों में तीन से छह किमी दूर स्थित हैं। मोगराखेड़ा आदिवासी क्षेत्र के चारों स्कूल में ३१२ बच्चे दर्ज हैं, लेकिन पढ़ाई के नाम पर बच्चों को कई बार स्कूलों में ताले ही लगे मिलते हैं।

तीन दिन से नहीं खुला

मोगराखेड़ा टप्पर स्कूल बेहाल अवस्था में है। स्कूल के छात्रअरविंद बारेला ने बताया कि तीन दिन से रोजाना बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन स्कूल के तीन दिन से ताले ही नहीं खुल रहे हैं। इसके कारण सभी वापस घर लौट जाते हैं।

बच्चों को दूध भी नहीं मिलता

स्कूलों में मध्याह्न भोजन भी बुरे हाल में है। बच्चों को मनमानी तरीके से थोड़ा-बहुत कभी कभार खाना दिया जा जाता है। कक्षा पांचवीं की छात्रा सजनी ने बताया कि सर खीर हमें केवल तिरंगे के दिन (१५ अगस्त और २६ जनवरी) को ही मिलती है।इसी तरह सभी प्राथमिक शालाओं में प्रार्थना के बाद सप्ताह में 3 दिन प्रत्येक बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है, लेकिन यहां किसी भी स्कूल में दूध नहीं पिलाया जाता है।

इनका कहना है

मोगराखेड़ा में आने वाले चारों स्कूलों में शिक्षक की जिम्मेदारी उनके व एक अन्य शिक्षक के भरोसे हैं। उनके पास बीएलओ का भी चार्ज है।इसके चलते एक साथ चारों स्कूल संचालित करने में परेशानी होती है। इसके संबंध में वरिष्ठ कार्यालय को अवगत करा दिया गया है।

भैरोलाल हरियाले, प्रभारी शिक्षक

आपके द्वारा मुझे जानकारी मिली है, मैं इस पर कार्रवाई प्रस्तावित करवा रहा हूं।मध्यान्ह भोजन का मामला जनपद का है।

भूपेश शर्मा, बीआरसी नसरुल्लागंज

Manoj vishwakarma Desk
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