MP के इस जिले में 90 फीसदी प्रसूताओं में खून की कमी

जिला अस्पताल में खून की डिमांड अधिक होने के कारण ब्लड बैंक में ब्लड की कमी...

सीहोर. जिला अस्पताल में बीते छह महीने से खून की डिमांड बढ़ गई है। सबसे ज्यादा ब्लड की जरूरत डिलेवरी के लिए आने वाली प्रसूताओं को लग रही है। जिला अस्पताल में डिलेवरी के लिए आने वाली 90 फीसदी महिलाओं में खून की कमी सामने आ रही है।

प्रसूताओं में बढ़ती खून की कमी का मुख्य कारण खान-पान ठीक नहीं होना बताया जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर्स का तर्क है कि प्रसूता में खून की कमी होने के कारण प्रसव के दौरान जान जोखिम में रहती है। गर्भावस्था के दौरान प्रसूता और उसके परिजन को खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। डॉक्टर ग्रोथ पर भी देखने को मिल रहा है। 70 से 80 फीसदी बच्चे सामान्य 2 किलो 500 से कम बजन के हो रहे हैं।

जिला अस्पताल में खून की डिमांड बढऩे का असर ब्लड बैंक पर दिखाई दे रहा है। बीते छह महीने से स्थिति यह है कि ब्लड बैंक में जितने यूनिट ब्लड रक्तदान शिविरों के माध्यम से आ रहा है, उससे ज्यादा की खपत हो रही है।

ब्लड बैंक के स्टोर में कई दिन से एबी पॉजीटिव ब्लड नहीं है, ऐसे में यदि किसी मरीज को एबी पॉजीटिव ब्लड की जरूरत पड़ती है तो ब्लड बैंक खाली है, मरीज के परिजन को खुद ही व्यवस्था करनी होगी। ब्लड बैंक स्टाफ का कहना है कि बीते तीन साल में रक्तदान करने वाले सदस्यों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन ब्लड की खपत बहुत बढ़ी है।

हर महीने दो रक्तदान शिविर है निर्धारित
साल के 12 महीने में 24 रक्तदान शिविर लगाना निर्धारित है। स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए दो हजार 500 रुपए प्रति शिविर राशि मिलती है। इस राशि से शिविर की व्यवस्थाओं के साथ रक्तदान के लिए जागरूकता कार्यक्रम करने होते हैं। डॉक्टर्स और ब्लड बैंक के स्टाफ की माने तो अभी रक्तदान को लेकर जागरूकता की काफी कमी है, जबकि हर तीन महीने में स्वस्थ व्यक्ति एक बार रक्तदान कर सकता है।

टेक्नीशियन का टोटा
जिले में सिर्फ एक ब्लड बैंक है। ब्लड की कमी वाले आष्टा, जावर, इछावर, श्यामपुर आदि अस्पताल से मरीज रेफर होकर जिला अस्पताल आते हैं। साढ़े 13 लाख की आबादी वाले जिले की इकलौती ब्लड बैंक में व्यवस्थाओं के नाम पर स्टाफ भी पर्याप्त नहीं है। यहां पर 6 टेक्नीशिन की जरूरत है, जबकि बैंक की जिम्मेदारी तीन टेक्नीशियन के भरोसे है, जिनकी तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। स्टाफ की कमी होने के कारण कई बार मरीज और उनके परिजन को समय पर रिपोर्ट और ब्लड नहीं मिल पाता है।

ब्लड बैंक में ब्लड की स्थिति
माह कितना आया कितना गया
जुलाई 2019 1205 971
अगस्त 2019 548 741
सितंबर 2019 446 445
अक्टूबर2019 469 444
नवंबर 2019 603 485
दिसंबर 2019 439 381
जनवरी 2020 439 402
(नोट - ब्लड यूनिट में)

खास-खास
ब्लड बैंक की क्षमता: 500 यूनिट
ब्लड की उपलब्धता: 200 यूनिट
रजिस्टर्ड रक्तदाता: 50
टेक्नीशियन की जरूरत : 06
टेक्नीशियन की उपलब्धता: 03
थैलेसिमिया के पेसेंट: 100

अभी एबी पॉजीटिव को छोड़कर सभी गु्रप के ब्लड उपलब्ध है। एबी पॉजीटिव भी आता-जाता रहता है। अभी सबसे ज्यादा ब्लड डिलेवरी और थैलेसिमिया के बच्चों को लग रहा है।
- पीएस आर्मो, प्रभारी ब्लड बैंक जिला अस्पताल सीहोर

जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा ब्लड प्रसूताओं को लगाया जा रहा है। खून की कमी होने से प्रसव के दौरान प्रसूता और शिशु दोनों की जान जोखिम में रहती है। परिजन की जिम्मेदारी है कि वह गर्भावस्था के दौरान प्रसूता के खानपान का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. आनंद शर्मा, सिविल सर्जन जिला अस्पताल सीहोर

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वीरेंद्र शिल्पी Desk
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