एक शहर, 150 गांव के बीच मौजूद अस्पताल में नहीं एंटी रेबीज, खाली लौट रहे मरीज

अस्पताल का तर्क डिमांड भेजी, लेकिन नहीं आएं इंजेक्शन

By: Anil kumar

Published: 18 Feb 2021, 11:04 AM IST

आष्टा. एक शहर और 150 गांव के बीच मौजूद एकमात्र आष्टा सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन का अकाल पड़ गया है। इससे श्वान (कुत्ते) और अन्य जानवरों के काटने पर इंजेक्शन लगाने की उम्मीद में आएं मरीज भटकने के बाद परेशान होकर मायूस लौट रहे हंै। उनको मजबूरी में 200 से 300 रुपए खर्च कर मेडिकल से लाकर डॉक्टर से इंजेक्शन लगाना पड़ रहा है। कई तो आर्थिक स्थिति खराब होने से यह भी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके सामने ज्यादा संकट खड़ा हो गया है।

आष्टा के इस अस्पताल में रोजाना 15 से 20 और महीने में औसतन करीब 250 से ज्यादा एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने मरीज आते हैं। खपत ज्यादा होने और इंजेक्शन कम आने से अस्पताल में हर कभी रेबीज इंजेक्शन का टोटा होना आम होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि तीन महीने के अंदर बीच में सिर्फ 20 इंजेक्शन आए थे, लेकिन वह एक से दो ही दिन में खत्म हो गए। उसके बाद अस्पताल फिर रेबीज विहीन हो गया है। यह स्थिति तब है जब अस्पताल के ऊपर करीब दो लाख की आबादी निर्भर है। गांव, खेड़ों के अस्पताल में यह इंजेक्शन नहीं मिलने से मरीज इसी सिविल अस्पताल से उम्मीद लगाकर आते हैं।

तीन दिन से पहुंच रहा अस्पताल
मालीखेड़ी निवासी लखन मालवीय ने बताया कि बेटे रोशन मालवीय को कुत्ते ने काट लिया था। उसे तीन दिन से रेबीज इंजेक्शन लगवाने सिविल अस्पताल आ रहा हूं, लेकिन डॉक्टर इंजेक्शन नहीं होने की बात कहकर वापस लौटा रहे हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने से इतने पैसे नहीं है कि स्वयं के पास से बेटे को मेडिकल से इंजेक्शन खरीदकर लगा सकूं। यही अन्य मरीजों का कहना है। गरीब लोगों पर सबसे ज्यादा इसका असर पड़ रहा है।
अन्य अस्पतालों में यही हाल
जिले में एक जिला अस्पताल, दो सिविल अस्पताल, आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद, 163 उपस्वास्थ्य केंंद्र हैं। इनमें से अधिकांश में इस तरह की स्थिति रहती है। जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो शेष अस्पताल में कब रेबीज आता है और खत्म हो जाता पता ही नहीं चलता है। डिमांड भेजने पर कई बार महीनों तक नहीं आता है। लोगों का कहना है कि शासन, स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवाओं के ढर्रे को सुधारने लाखों खर्च कर रहा है, लेकिन नतीजा सिफर ही है।
15 लोगों को काटा था
जावर शहर में पांच दिन पहले दो कुत्तों ने जमकर आतंक मचाया था। दिनभर में करीब 15 लोगों को काटकर घायल कर दिया था। हालांकि नगर परिषद अमले ने दोनों कुत्तों को मार दिया था। जब मरीज अस्पताल पहुंचे तो उस दौरान भी उनको इंजेक्शन लगवाने काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था। हालांकि इस अस्पताल में भी इस प्रकार की स्थिति बनना कोई नई बात नहीं है। इसका कारण भी जरूरत के हिसाब से इंजेक्शन नहीं आना ही है।
वर्जन...
सिविल अस्पताल में बीच में रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे, कुछ दिन पहले 20 इंजेक्शन आए लेकिन खपत ज्यादा होने से ज्यादा दिन नहीं चले। हमारी तरफ से वापस डिमांड बनाकर भेजी है, अब तक इंजेक्शन नहीं आएं हैं।
डॉ. प्रवीर गुप्ता, सिविल अस्पताल प्रभारी और बीएमओ आष्टा

Anil kumar Reporting
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