पांच साल में 10 हजार हेक्टेयर बढ़ा बासमती का रकबा, जीआई टेग मिलने से होगा फायदा

सीहोर जिले के बुदनी और नसरुल्लागंज क्षेत्र में पैदा होता है बासमती, हर साल बढ़ रहा है रकबा

By: Kuldeep Saraswat

Published: 18 Jan 2021, 11:10 AM IST

सीहोर. प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टेग मिलने का रास्ता साफ होने से सीहोर जिले के बुदनी और नसरुल्लागंज विकासखण्ड के किसान काफी खुश हैं। सीहोर के नसरुल्लागंज और बुदनी में हर साल करीब 33-34 हजार हेक्टेयर में बासमती की खेती होती है। बीते छह साल का रेकॉर्ड देखा जाए तो जिले में हर साल बासमती का रकबा बढ़ रहा है।

साल 2015 में साढ़े 23 हजार हेक्टेयर में बासमती की बोवनी की गई थी, जो 2020 में बढ़कर 34 हजार 110 हेक्टेयर पर पहुंच गई है। रकबा बढऩे के साथ इसका उत्पादन और उत्पादकता भी बढ़ी है। साल 2020 में बासमती का उत्पादन 1 लाख 44 हजार 967 मीट्रिक टन रहा है। जिले में बासमती की 97 प्रतिशत खेती बुदनी विकासखण्ड में होती है, इसका मुख्य कारण नर्मदा नदी के कारण पर्याप्त पानी उपलब्ध होना है। धान की खेती के लिए दूसरी फसल की अपेक्षा ज्यादा पानी की जरुरत होती है।

बुदनी क्षेत्र के किसानों को दोहरी खुशी
बुदनी के किसान इस बात से ज्यादा खुश इसलिए भी है कि मध्यप्रदेश के बासमती को जीआई टेग दिलाने के प्रयास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ज्यादा किए हैं। बुदनी शिवराज सिंह की विधानसभा है और यहां के सबसे ज्यादा किसान बासमती की खेती करते हैं। बताते हैं अगस्त 2020 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से मिलकर बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के लिए एक पत्र दिया था। इसके बाद जब कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) की बैठक हुई तो फैसला मध्यप्रदेश के पक्ष में आया है।

बासमती चावल को लेकर कुछ तथ्य
- जीआई टेग मिलते ही प्रदेश का 40 फीसदी बासमती अमेरिका और कनाडा जाएगा।
- मध्यप्रदेश के 13 जिलों में पैदा होता है बासमती चावल, इस साल 12 लाख टन का उत्पादन
- मध्यप्रदेश के करीब 4 लाख किसानों को मिलेगा फायदा
- मध्यप्रदेश 12 साल से लड़ रहा है जीआई टेग की लड़ाई
- जीआई टेग मिलने से किसान समर्थन मूल्य 1850 पर बेच सकेंगे बासमती


एक नजर में धान का रकबा और उत्पादन
साल रकबा उत्पादन
2015 23590 82565
2016 22370 85006
2017 31870 124293
2018 32900 118440
2019 33790 136478
2020 34110 144967
(नोट: रकबा हेक्टेयर और उत्पादन मैट्रिक टन में)

Kuldeep Saraswat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned