इंदौर-भोपाल हाइवे पर हर दिन एक मौत

इंदौर-भोपाल हाइवे पर हर दिन एक मौत

Kuldeep Saraswat | Updated: 04 Jul 2019, 11:40:57 AM (IST) Sehore, Sehore, Madhya Pradesh, India

अमलाहा टोल नाके से दौलतपुर घाटी तक 27 ब्लैक स्पॉट पर नहीं सुरक्षा के इंतजाम

सीहोर. भोपाल-इंदौर स्टेट हाइवे का 86 किलोमीटर का दायरा डेंजर जोन बन गया है। सीहोर के फंदा टोल नाके से लेकर आष्टा दौलतपुर घाटी तक हाइवे पर लगातार सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्टेट हाइवे के इस डेंजर जोन के बारे में पुलिस और जिला प्रशासन को भी भली भांति जानकारी है और सुरक्षा की दृष्टि से हाइवे पर हादसे रोकने के लिए कई बार योजनाएं भी बनाई गई हैं, लेकिन इन योजनाओं पर अमल नहीं होने को लेकर सड़क हादसों की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है।

पुलिस रेकार्ड के मुताबिक एक जनवरी से लेकर 31 मई तक भोपाल इंदौर स्टेट हाइवे के इस 86 किलोमीटर के दायरे में करीब 524 एक्सीडेंट हुए हैं, जिसमें 83 से ज्यादा की मौत हुई है और 495 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा भी कई ऐसे गंभीर सड़क हादसे इस हाइवे पर हुए हैं जो पुलिस रेकार्ड में दर्ज नहीं है। पुलिस रेकार्ड के मुताबिक सीहोर जिले की सीमा में स्टेट हाइवे पर करीब 27 ब्लैक स्पॉट है, जहां सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती है। पुलिस ने स्टेट हाइवे पर सड़क हादसे रोकने के लिए तीन बार सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कार्य योजना बनाई, जिस पर अभी तक अमल नहीं हो सका है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय अभी तक अमल नहीं हो सका है, जिसे लेकर सड़क हादसों की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है।

यह निर्णय जिन्हें अमल का इंतजार
- देवास भोपाल कोरीडोर कंपनी द्वारा अमलाहा टोल पर एलइडी स्क्रीन लगाई जाए, जिस पर इंदौर भोपाल राजमार्ग पर हुई सड़क दुर्घटनाओं की संख्या दिखाई जाए।
- राजमार्ग पर ओवर स्पीड वाहनों को रोकने के लिए स्पीड रडार एवं स्पीड वायलेशन डिटेक्टर कैमरा उपलब्ध कराने पीटीआई भोपाल से चर्चा की जाए।
- शहर के व्यस्तम चौराहे (अस्पताल चौराहा, तहसील चौराहा, भोपाल नाका, इंदौर नाका) पर नगर पालिका द्वारा सिग्नल लगाए जाए।
- नदी चौराहा को मॉडल चौराहा के रूप में विकसित किया जाए।
- सीहोर शहर में पार्किंग जोन एवं हॉकर जोन चिन्हित किए जाए।
- टै्रफिक क्रेन एवं मवेशी केरियर नगर पालिका द्वारा भोपाल नगर निगम में किए गए रेंटल प्रक्रिया के आधार पर उपलब्ध कराए जाए।
- भोपाल इंदौर राजमार्ग को जोडऩे वाले शहर के चौराहों पर एक्सेस रोड का निर्माण करने, फ्लायओवर बनाने के लिए एमपीआरडीसी को पत्र लिखा जाए।

बीते दो साल में 450 की मौत
इंदौर भोपाल स्टेट हाइवे पर बीते दो साल में करीब दो हजार 250 सड़क हादसे हुए हैं। इन सड़क हादसों में साढ़े चार सौ व्यक्तियों की मौत हुई और ढाई हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। पुलिस रेकार्ड के मुताबिक साल 2017 में इंदौर भोपाल स्टेट हाइवे 1120 सड़क हादसे हुए हैं, जिसमें 224 की मौत हुई और 1248 लोग घायल हुए हैं। इसी प्रकार साल 2018 में 1106 सड़क हादसे हुए हैं, जिसमें 235 की मौत हुई है और 1146 लोग घायल हुए हैं।

तेज रफ्तार सड़क हादसों का प्रमुख कारण
परिवहन विभाग के अफसरों की माने तो हाइवे पर दौडऩे वाले सभी कामर्शियल वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार तय की गई है, लेकिन यहां वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अधिक गति से दौड़ते दिखाई देते हंै। डीटीओ अनुराग शुक्ला ने बताया कि बस की 80 और डंपर की 60 किमी प्रति घंटे रफ्तार निर्धारित की है। लेकिन वाहन तेज गति से दौड़ते हैं, इससे लगातार दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

सात दिन में तीन बस हादसे
इंदौर-भोपाल स्टेट हाइवे पर हर दिन औसत एक व्यक्ति की मौत हो रही है। 21 जून को आष्टा के किलेरामा के पास एक बस चालक ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में बाइक सवार काजीखेड़ी निवासी राजेश नाम के युवक की घटना स्थल पर दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि दूसरा युवक गंभीर घायल हो गया था। इसके बाद 25 जून को आष्टा में कन्नौद रोड पर बस और कार की आमने सामने भिड़ंत हो गई थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस कार को 50 फिट दूर तक घसीटते हुए ले गई थी। 26 जून को बेदाखेड़ी गांव के पास एक बस का स्टेयरिंग फेल हो गया था। इससे बस सड़क से नीचे उतर खेत में होते हुए साढ़े तीन सौ फीट दूर पेड़ से जा टकराई थी। इसमें दो लोग घायल हो गए थे। जबकि 35 यात्रियों की जान बाल बाल बची थी।

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