कोरोना और मौसम की मार के बीच दाव पर अन्नदाता की फसल

खेत में पकी खड़ी है किसान की फसल, काटने को नहीं मिल रही मजदूर

By: Kuldeep Saraswat

Updated: 27 Mar 2020, 01:57 PM IST

सीहोर. कोरोना वायरस के संक्रमण और मौसम की मार के बीच अन्नदाता की फसल दाव पर लग गया है। गेहूं और चना की फसल खेत में पककर तैयार खड़ी है और लॉकडाउन के कारण कटाई के लिए मजदूर और हार्वेस्टर नहीं मिल रहे हैं। यदि कहीं एक्का-दुक्का मिल भी रहे हैं तो मजदूरी ज्यादा मांग रहे हैं।

दूसरी तरफ पकी फसल पर मौसम का खराब बना हुआ है। अंचल में बुधवार देर शाम बारिश और ओलावृष्टि हुई। गुरुवार को फिर से सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम ऐसा हो रहा है कि कभी भी बारिश शुरू हो सकती है। मजबदूरी में चार-छह एकड़ के कई किसान तो परिवार की महिलाओं के साथ लेकर खुद ही फसल काटने में लगे हैं। चंदेरी के किसान एमएस मेवाड़ा ने बताया कि बारिश और ओलावृष्टि से किसान की चिंता पहले की अपेक्षा ज्यादा बढ़ गई है। लॉकडाउन के कारण मजदूर घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। कुछ किसान गांव में एक-दो जो मजदूर मिल रहे हैं तो उनसे नहीं तो हार्वेस्टर से अपने-अपने तरीके से फसल की कटाई करा रहे हैं। इधर, आष्टा दुपाडिय़ा के किसा धर्म मेवाड़ा ने बताया कि आष्टा ब्लॉक में भी फसल कराई का काम तेजी से चल रहा है, किसान अपनी सुविधा के हिसाब से फसल की कटाई करा रहा है।

तीन ब्लॉक में हो गई 80 फीसदी कटाई
सीहोर, आष्टा और इछावर ब्लॉक में गेहूं की कटाई का काम करीब 80 फीसदी हो चुका है। चना की फसल लगभग पूरी कट चुकी है। कृषि विभाग के एडीए रामशंकर जाट ने बताया कि आगामी पांच दिन में गेहूं की कटाई का काम पूरा हो जाएगा। जिले में ज्यादातर किसान हार्वेस्टर से फसल की कटाई करते हैं। लॉकडाउन से पहले जो हार्वेस्टर सीहोर जिले में आ गए थे, वह लगातार फसल कटाई कर रहे हैं।
हार्वेस्टर और मजदूरों ने बढ़ाई मजदूरी
किसानों ने बताया कि पिछले साल अंचल में हार्वेस्टर 800 से 900 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से गेहूं की कटाई कर रहे थे, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण ज्यादा हार्वेस्टर नहीं आए हैं। आए भी हैं तो वे जिलों की सीमा पार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में हार्वेस्टर इस बार गेहूं कटाई का 1000 से 1200 रुपए प्रति एकड़ जब वसूल कर रहे हैं। मजदूर भी 250 रुपए के बजाय 300 और 350 रुपए मांगने लगे हैं।

Kuldeep Saraswat
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