water shortage: अल्पवर्षा के कारण जिला पेयजल अभावग्रस्त घोषित

सिंचाई, औद्योगिक प्रयोजन एवं भवन निर्माण हेतु पानी के उपयोग पर रोक

By: दीपेश तिवारी

Published: 16 May 2018, 01:21 PM IST

सीहोर। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सीहोर द्वारा मध्यप्रदेश पेयजल परीक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के अन्तर्गत सम्पूर्ण सीहोर जिले को पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए अधिनियम की धारा 4 कलेक्टर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी के अनुज्ञा के बिना जल अभावग्रस्त क्षेत्र में पेयजल स्त्रोत से सिंचन या ओद्योगिक प्रायोजन के लिये या किसी अन्य प्रायोजन के लिये जल लेने का प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

उपरोक्त अनुसार प्रतिबंध सीहोर जिले में इस वर्ष भी अल्पवर्षा के कारण जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए लागू किया गया है। इस प्रतिबंध के तत्काल प्रभाव से लागू जाने के फलस्वरुप सीहोर जिले की सीमा क्षेत्र में स्थित विभिन्न जल स्त्रोतों घरेलू प्रायोजनों हेतु जल के प्रदाय को छोडकर सिचाई, उद्योगिक प्रायोजन एवं भवन निर्माण हेतु जल के उपयोग पर प्रतिबंध प्रभावशील होगा। इस अधिनियम का उलंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परीक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 के अनुसार 2 वर्ष तक का कारावास रुपये 2 हजार तक का जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा।

वाशिंग सेंटर को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए
इधर पेयजल की भयाभयता को देखते हुए एसडीएम ने वाशिंग सेंटर को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं। इसी तरह कुआ, हैडपंप, बोरवेल आदि से वाहनों को धोने, घर निर्माण, सड़क धोने आदि पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश आगामी ३० जून तक जारी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पब्लिक न्यूनसेंस मानते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। शहर में जल सप्लाई के तीनों जल स्त्रोतों जमोनिया, काहिरी, भगवानपुरा मेेंं पानी खत्म हो चुका है या तली में आ गया है।

शहर में पेयजल को लेकर लोगों को रतजगा करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोग पसीना निकाल रहे हैं। हालात ऐसे ही रहे तो आगामी दिनों में लोगों को पेयजल के लिए काफी मशक्कत करना पड़ेगी। आसन्न जल संकट को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसके साथ ही पानी के अपव्यय के करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं।

एसडीएम राजकुमार खत्री ने बताया कि सीएमओ द्वारा सूचित किया है कि कुआ, हैंडपंप, बोरबेल आदि से गाडिय़ों को धोना (घर-सर्विस सेंटर पर), घर निर्माण करना, सडक़ धोना आदि। नगर में पानी की अनावश्यक रूप से अपव्यय किया जा रहा है। शहर में पेयजल पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। जिससे आम आदमी के जीवन और पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस काम से आम जन के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और आम जनता में लोक परिशांति भंग की स्थिति निर्मित हो गई है। यह कृत्य दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १३३ के तहत पब्लिक न्यूसेंस की श्रेणी मे आता है। सीएमओ के प्रतिवेदन के आधार पर संतुष्ठ होकर आदेश पारित किया गया है। शहर की सीमा में गाडिय़ों को घर पर धोने व सर्विस सेंटर पर धोने पर और प्राइवेट घर निर्माण और सडक़ धोने पर ३० जून तक जनहित में तत्काल रोक लगाई जाती है। साथ ही नगर के समस्त सर्विस सेंटर, वाशिंग सेंटर को बंद किया जाता है।

१४ जलस्त्रोत अधिग्रहित
प्रशासन ने जल संकट को देखने हुए शहर के १४ जलस्त्रोतों को अधिग्रहित कर लिया है। अधिग्रहित नलकूपों में बढिय़ाखड़ी के मनोज राय, विकास राय, रवि ध्रुवे, उमेश राय, हरीप्रसाद राय गुल्लु परमार, लीला बाई, हटे सिंह ठाकुर, जीवन तिवारी शामिल हैं। जमोनिया रोड के महेन्द्र राठौर, श्याम यादव, बिजौरी के राहुल मालवीय और जमोनिया रोड के स्वामीनारायण ट्रस्ट का कुआ शामिल हैं।

दीपेश तिवारी
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