पांच साल में रात का पारा 12 डिग्री से ऊपर, फिर भी ठंड के जनजीवन प्रभावित

गुरुवार को शहर का अधिकतम पारा 18.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रेकॉर्ड

By: Kuldeep Saraswat

Published: 03 Jan 2020, 02:02 PM IST

सीहोर. शहर में सात दिन से तेज धूप नहीं खिली है। तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेज ठंड के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। तेज ठंड के बीच गुरुवार शहर का अधिकतम तापमान 18.5 डिग्री और न्यूनतम 12.0 डिग्री सेल्सियस रेकॉर्ड किया गया है। पांच साल में यह पहला मौका है जब दो जनवरी को रात का पारा 12.0 डिग्री रेकॉर्ड किया गया है और ठंड इतनी तेज है। बीते सालों में इस दिन रात का तापमान अब तक 10 डिग्री के नीचे ही रहा है।

ठंड तेज होने के बारण बाजार, खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा चौतरफा प्रभावित हो रही हैं। सरकारी और प्राइवेट स्कूल में छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम हो गई है, वहीं बाजार सूने पड़े हैं। सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम और खांसी के पहुंच रहे हैं। रबी फसल के लिए वैसे तो यह सीजन अच्छा है, लेकिन लगातार बादल छाए रहने से गेहूं, चना और मटर में कीट ब्याधि का प्रकोप देखा जा रहा है। यदि किसान ने फसल का उपचार नहीं किया तो उत्पादन प्रभावित होगा। जड़ माहू कीट तो खेत के खेत साफ कर देता है, उत्पादन शून्य तक हो जाता है।

शिक्षा
जिले में एक हजार 342 सरकारी प्राइमरी और 677 मिडिल स्कूल हैं। इन स्कूल में करीब एक लाख 10 हजार स्टूडेंट्स हैं। इसके अलावा कक्षा एक से 8वीं तक 703 प्राइवेट स्कूल हैं। प्राइवेट स्कूलों की छात्र संख्या 55 हजार है। क्रिसमस की छुट्टी के बाद 30 दिसंबर 2019 से स्कूल खुल गए, लेकिन ठंड के कारण अभी तक स्टूडेंट्स ने नियमित स्कूल जाना शुरू नहीं किया है। प्राइवेट स्कूल में तो करीब 50 फीसदी बच्चे पहुंच भी रहे हैं, सरकारी की उपस्थिति तो 20 से 30 फीसदी पर ही सिमट गई है। सुरक्षा की दृष्टि से शिक्षक भी दबाव नहीं बना रहे हैं। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल खुलने का समय 8.30 बजे के बाद का तय किया है, लेकिन ठंड इतनी तेज है कि 9 बजे के बाद भी घर से निकलने में दिक्कत हो रही है।

क्या किया जाए : पालक बच्चों को अच्छे गर्म कपड़े पहनाकर स्कूल भेजें। सिर पर टोपा और हाथ में दस्ताने जरुर पहनाएं।

स्वास्थ्य
खराब मौसम के कारण बीमारियां भी जोर पकड़ रही हैं। सरकारी अस्पताल में स्थिति यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती करने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम, खांसी, दमा के पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज करीब 800 स 900 मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें से 50 से 60 फीसदी मौसमी बीमारियों से पीडि़त हैं। सिविल सर्जन डॉ. आनंद शर्मा ने बताया कि गुरुवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 748 मरीज पहुंचे हैं, जिसमें से 450 मौसमी बीमारी से पीडि़त हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से इस समय सुबह-शाम के समय जरुरी काम होने पर ही घर से निकलें। ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनकर रहे और अलाव जलाकर हाथ सेकें।

क्या किया जाए : दमा पीडि़त सुबह और शाम की ठंड से बचें। गर्म पानी का सेवन करें और ठंडी खाद्य सामग्री खाने से बचें।

कृषि
रबी की बोवनी करीब तीन लाख 70 हजार हेक्टेयर में की गई है। दो लाख 70 हजार में गेहूं की बोवनी की गई है। रबी सीजन की फसल के लिए वैसे तो यह समय अनुकूल है, लेकिन आसमान में लगातार बादल छाए रहने के कारण फसल में कीट ब्याधि का प्रकोप देखा जा रहा है। कटुआ इल्ली (एग्रोटिस प्रजाति), जड़ माहो और पाउडरी मिल्डयू रोग का प्रकोप देखा गया है। किसान नियंत्रण के लिए क्विनालफॉॅस 20 ईसी अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या इमाबेक्टिन बेंजाएट 225 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 6 00 -700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रकोपित पौधे के पास जमीन पर तराई करें। मटर, मसूर, कुकरबिट्स एवं चने में आदि में पाउडरी मिल्डयू रोग की संभावना है। नियंत्रण के लिए 0.1 कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें। बारिश होने पर यह रोग स्वत: ही समाप्त हो जाता है।

क्या किया जाए : फसल का उपचार किया जाए। किसान खेत में टी या वी आकार की खूंटियां लगाएं। प्रति एकड 40 से 50 खूंटियां लगाए, जिसपर बैठने वाले पक्षी इल्लियों को चुनचुन कर समाप्त करें।

आगे क्या
आरएके कृषि महाविद्यालय के मौसम एवं कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि मौसम में फिलहाल सुधार की संभावना नहीं है। पारे में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। आसमान में बादल छाए रहेंगे, तेज बारिश की संभावना है। आगामी तीन दिन ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है।

Kuldeep Saraswat
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