ग्रामीण रूट पर दौड़ रहे जर्जर वाहन

ग्रामीण रूट पर दौड़ रहे जर्जर वाहन
road transport

Bharat pandey | Updated: 15 Jan 2017, 11:37:00 PM (IST) Sehore, Madhya Pradesh, India

अनफिट वाहनों में की जा रही ओवरलोडिंग, जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं ग्रामीण। सख्ती के बाद भी जिले की परिवहन सेवा में नहीं हो रहा सुधार 

सीहोर। सीहोर जिले के ग्रामीण रूट पर दौडऩे वाले वाहनों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीण रूट पर दौडऩे वाले कई वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस नहीं है और वह क्षमता से अधिक सवार लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। सीहोर से काहिरी कदीम मार्ग पर दौडऩे वाले चैम्पियन आटो क्रमांक एमपी 37 आर 0114 की हालत भी इस बात की गवाह है।

परिवहन विभाग के अनुसार यह आटो दस साल पुराना है। अब इसमें न तो खिड़की की ग्रिल बची है और नही दरवाजे हैं। वाहन की फिटनेस भी तीन साल से चेक नहीं की गई है। इसके बाद भी इसमें सवारियों को सफर कराया जा रहा है। इंदौर नाके से ग्राम कोठरी के बीच दौडऩे वाला टाटा मैजिक वाहन एमपी 37 टी 0348 भी अनफिट है। अनफिट वाहन चार फेरे करता है। इसका परिमिट सात सवारी बिठाने का है, लेकिन इसमें दस-दस सवारियों को बिठाकर सफर कराया जाता है। वाहन का पंजीयन वर्ष 2009 में करवाया गया था, वाहन की फिटनेस दो साल से चैक नहीं करवाई गई है। यह स्थिति तब हैं जब परिवहन विभाग के अधिकारी हर रोज औचक निरीक्षण कर सवारी वाहनों की जांच और जुर्माने की कार्रवाई कर रहे है। अफसरों की इस सख्ती के बाद भी जमीनी स्तर पर जिले की परिवहन सेवा में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। शहरी और ग्रामीण रूट पर दौड़ रहे वाहन न केवल ओवर लोड़ चल रहे है, बल्कि दस-दस साल पुराने होने के कारण इन वाहन की फिटनेस भी तय मापदंड के अनुरूप नहीं बची है। सड़क पर यात्री परिवहन सेवा और ऑफिस में विभाग की कार्यप्रणाली दोनों ही खराब हैं। 

 छोटे रूट की बसें भी जर्जर
ग्रामीण रूट के समान ही अंतर तहसील मार्ग पर चलने वाली बसों की हालत भी ठीक नहीं है। बस स्टैण्ड से इछावर, श्यामपुर, नसरुल्लागंज और कालापीपल तहसील की ओर प्रतिदिन बस रवाना होती है। बस स्टैण्ड से रवाना होने के बाद इन बसों में ठसाठस सवारियां बैठाई जाती है। इनमें से अधिकांश बसों की फिटनेस तय मापदंडों के अनुरूप नहीं होती है। विशेषकर सीहोर से श्यामपुर के बीच चलने वाली बसों की हालत अधिक खराब है। इन खस्ताहाल बसों के कारण कई बार हादसें भी सामने आ चुके है। कई बस संचालकों ने अपनी कंडम बसों को सड़कों से उतारकर स्कूलों में भी अटैच कर दिया है।

  नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
ग्रामीण रूट पर वाहनों की स्थिति किस कदर खराब है, इसका अंदाजा परिवहन विभाग द्वारा एक तहसील में  की गई कार्रवाई से लगाया जा सकता है। बीते  नौ दिन में विभाग की टीम ने हर दिन अलग-अलग तहसील में कार्रवाई की। इस दौरान 311 वाहन पर बिना टैक्स, बिना फिटनेस व बिना रजिस्ट्रेशन के चलते पाए जाने पर जुर्माना किया गया। इस दौरान दस लाख 22 हजार रूपए जुर्माना भी वसूला गया। लेकिन यह केवल एक दिन का अभियान था, जिसमें चंद वाहन की पकड़े जा सके। यदि अफसर निरंतर कार्रवाई करें तो यह आंकड़ा बहुत आगे तक चला जाएगा।

हम ऐसे वाहनों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई करते है, लेकिन एक वाहन पर कार्रवाई करते ही दूसरे सभी वाहन चालक सतर्क हो जाते हैं और वाहन का संंचालन बंद कर देते हैं। अब जल्द ही हम ग्रामीण रूट पर औचक कार्रवाई का प्लान बना रहे है।
प्रमोद कापसे,  जिला परिवहन अधिकारी सीहोर

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