लौकी, टमाटर और बैंगन की फसल 100 फीसदी तबाह

पाले की मार से किसान दुखी, सब्जी की सफल से नहीं निकली लागत

By: Kuldeep Saraswat

Published: 03 Jan 2019, 02:09 PM IST

सीहोर. पाले के कारण जिले में लौकी, टमाटर और सब्जी की फसल कई जगह 100 प्रतिशत तक बर्बाद हो गई है। सब्जी की फसल से लागत भी नहीं निकलने को लेकर किसान दु:खी है। एक एकड़ सब्जी की फसल में किसान को करीब 30 से 35 हजार रुपए का खर्चा आया है। किसान सब्जी बेचकर आधी भी लागत नहीं निकाल पाए, उससे पहले ही पाला पडऩे से फसल बर्बाद हो गई। सीहोर ब्लॉक के अमरोद गांव में पाले से एक दर्जन से अधिक किसानों की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है।

बुधवार को पत्रिका टीम ने पाले से प्रभावित कई गांव की फसल देखी। किसानों से बात की, उनसे नफा-नुकसान के बारे में चर्चा की। किसानों ने बताया कि पाले के कारण टमाटर, लौकी, बैंगन, आलू, चना की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। टमाटर, बैंग और लौकी की फसल झुलसकर काली पड़ गई है, वहीं चने का पौधा पीला पड़कर सूख गया है। किसानों ने वह खेत भी दिखाएं, जिनमें 100 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है।

इस साल सीहोर जिले में करीब पौने चार लाख हेक्टेयर में रबी सीजन की बोवनी की गई है। किसान ने लगभग 15 हजार हेक्टेयर में प्याज, लहुसून, लौकी, आलू, बैंगन, टमाटर की बोवनी की है। पाले के कारण सब्जी और चना की फसल में नुकसान हुआ है। सब्जी और चना का रकवा मिलाकर करीब एक लाख 14 हजार हेक्टेयर है, जिसमें से किसान सब्जी के रकवे में 70 से 100 फीसदी तक नुकसान बता रहे हैं। पाले के कारण सब्जी की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है।

किसान की पीड़ा

एक रात में हराभरा खेत बना बंजर
किसान विश्राम मेवाड़ा ने बताया कि उन्होंने पौन एकड़ में लौकी की फसल लगाई। मेहनत, मजबूरी, खाद, बीज सब मिलाकार करीब 40 हजार रुपए खर्चा आया। फसल अच्छी होने के कारण उम्मीद थी कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा, लेकिन एक ही रात पर हराभरा खेत बंजर हो गया। लगातार दो दिन पाला पडऩे से लौकी की बेल इस तरह झुलस गई है कि तेज गर्मी से पौधे के सूखने पर पत्ते गिर जाते हैं। हराभरा खेत बंजर सा दिखाई दि रहा है। फसल के नुकसान से किसान काफी दुखी है।

सताने लगी साहूकार के कर्ज की चिंता
किसान देवी सिंह ने बताया कि उन्होंने सेम की बोवनी की। खाद, बीज और मजदूरी सहित करीब तीस हजार रुपए का खर्चा आया। दस हजार रुपए की सेम बेच ली, लेकि पाले के कारण अब पूरी फसल बर्बाद हो गई। किसान ने कर्ज लेकर बोवनी की थी, साहूकार को तीन हजार रुपए लौटाने हैं, फसल बर्बाद हो गई है। पाले के कारण सेम की बेल पूरी तरह झुलस गई है। फल तो दूर की बात सेम की बेल तक नहीं बची है। किसान को साहूकार का कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है।

लहलहाती फसल पर पोत की कालिख
किसान गजराज सिंह ने बताया डेढ एकड़ में बैंगन की बोवनी की। खेत में फसल शानदार लहलहा रही थी। एक-एक पेड़ सात-सात, आठ-आठ काले-काले बैंगन लटक रहे थे। मेहनत-मजबूरी सहित खाद, बीज पर करीब 80 हजार रुपए का खर्चा आया। किसान ने बताया कि बीत सात दिन से रोज बैंगन मंडी भेज रहे थे, कुछ ही दिन में 30 हजार रुपए के बैंगन बेच दिए, लेकिन 28-29 दिसंबर की रात को ऐसा पाला गिरा कि पूरी फसल बर्बाद हो गई। ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने हरी-भरी फसल पर कालिख पोत दी है। 50 हजार रुपए लागत का भी नहीं निकला है।

Kuldeep Saraswat
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