आष्टा के अल्पसंख्यक और दलित क्षेत्र में बंपर वोटिंग

आष्टा के अल्पसंख्यक और दलित क्षेत्र में बंपर वोटिंग

Kuldeep Saraswat | Updated: 20 May 2019, 11:34:10 AM (IST) Sehore, Sehore, Madhya Pradesh, India

हर वर्ग का मतदाता निकला घर से बाहर, लोकतंत्र में दी आहुति

सीहोर. देवास संसदीय क्षेत्र की आष्टा विधानसभा में रेकॉर्ड मतदान हुआ है। लोकसभा चुनाव में सीहोर जिले की चार विधानसभा में से सबसे ज्यादा मतदान आष्टा में ही हुआ है। 12 मई को जिले की सीहोर, बुदनी और इछावर विधानसभा में वोटिंग हुई। सीहोर में 76.74, बुदनी में 75.46 और इछावर में 78.77 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन रविवार को आष्टा विधानसभा में 81.00 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने मताधिकार का उपयोग किया है।

आष्टा में इससे पहले लोकसभा चुनाव में इतनी वोटिंग कभी नहीं हुई है। विधानसभा चुनाव में भी यहां पर 82.10 मतदान हुआ था। आष्टा में इस बार रेकॉर्ड वोटिंग होने का मुख्य कारण अल्पसंख्यक और दलित वर्ग बस्तियों में बंपर वोटिंग होने को बताया जा रहा है। शहर और गांव में अल्पसंख्यक क्षेत्र के पोलिंग बूथ पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी-लंबी लाइन दिखीं। महिला, और पुरूष वोटर लाइन में खड़े होकर घंटों तक वोट डालने का इंतजार करते दिखाई दिए। अल्पसंख्यक और दलित बस्तियों में मतदान ज्यादा होने को लेकर इस बार आष्टा विधानसभा में रेकॉर्ड मतदान हुआ है।

 

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मतदान के दौरान चौकीदार की बिगड़ी तबियत
जावर के दरखेड़ा में पोलिंग बूथ क्रमांक 24 पर मतदान के दौरान अचानक सुबह करीब 8.30 बजे चौकीदार जगन्नाथ सिंह मालवीय की तबियत खराब हो गई। चौकीदार मालवीय को 108 एम्बुलेंस की मदद से जावर अस्पताल पहुंचाया। उपचार के लिए चौकीदार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, डॉक्टर्स के मुताबिक चौकीदार की तबियत में सुधार हो रहा है। खतरे की कोई बात नहीं है।

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पहली बार मतदान को लेकर उत्साह
आष्टा के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल के बूथ 178 पर पहली बार वोट डालने पहुंची अपेक्षा जैन बहुत उत्साहित थीं। उन्होंने बताया कि ऐसी सरकार को चुनने वोट डालने आई है जो कि सभी के हित में बेहतर काम करें। बूथ 157 पर पहुंची फस्र्ट वोटर नेहा बी का कहना था कि इस दिन का उसे कई साल से इंतजार था। वह दिन आज आया है तो खुश होकर परिजन के साथ वोट डालने पहुंची है।

 

डिस्चार्ज होकर वोट डालने पहुंची बीमार महिला
मेहतवाड़ा निवासी पुष्पा जैन की तबियत खराब होने के कारण शनिवार शाम को जावर अस्पताल में भर्ती कराया था। रविवार को भी अस्पताल में इलाज चल रहा था और हाथ में निडिल लगी थी। उसके बावजूद पुष्पा जैन ने वोट डालने का निर्णय लिया। वह डॉक्टर से कहकर एक घंटे के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज होकर पोलिंग बूथ पर वोट डालने पहुंची। यह काम होने के बाद वापस अस्पताल आ गई। पुष्पा जैन ने बताया कि लोकतंत्र में मताधिकार की बहुत बड़ी कीमत है। यह दिन बार-बार नहीं आता है।

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