एक डॉक्टर के भरोसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एक शहर-70 गांव के लोग भुगत रहे परेशानी

अफसरों को शिकायत दर्ज कराई, फिर भी नहीं हुई समस्या दूर

सीहोर/रेहटी/मेहतवाड़ा/आष्टा.
जिले के सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इसका खामियाजा हर दिन इलाज कराने आने वाले मरीजों को परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इन अस्पतालों में डॉक्टर संख्या कम है तो संसाधन का अभाव है। ऐसे में मरीजों को कई बार इलाज कराने निजी क्लीनिक की शरण लेना पड़ रही है। उसके बावजूद अफसर-जनप्रतिनिधि इससे अंजान है। इसकी बानगी रेहटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मेहतवाड़ा का उपस्वास्थ्य केंद्र और आष्टा के सिविल अस्पताल में देखी जा सकती है।

रेहटी शहर में जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने कुछ साल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया था। उसके बाद से आज तक इस स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और संसाधन में कोई इजाफा नहीं हुआ है। अस्पताल में एकमात्र डॉक्टर पदस्थ है। जिनके ऊपर रेहटी शहर और आसपास के 70 गांव के मरीजों की जिम्मेदारी है। ऐसे में जब भी मरीज इलाज कराने आते हैं तो उनको घंटों तक डॉक्टर कक्ष के बाहर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। इसमें भी कई बार तो उनका नंबर नहीं आने से बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ता है। प्रबंधन ने अस्पताल में डॉक्टर की संख्या बढ़ाने उच्च अफसर और जनप्रतिनिधिनियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया है, उसके बावजूद आज तक कुछ नहीं हो सका है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन 300 की ओपीडी दर्ज की जाती है।

नहीं है सोनोग्राफी मशीन
स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी मशीन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को जांच कराने की बारी आई तो निजी क्लीनिक की शरण लेना पड़ती है। जिससे उनके ऊपर अतिरिक्त भार आ गया है। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की बात कहीं तो जा रही है, लेकिन यह बात रेहटी स्वास्थ्य केंद्र में सार्थक साबित नहीं हो रही है। इसका खामियाजा उनको हर दिन भुगतना पड़ रहा है। इस समस्या को दूर करने जिम्मेदारों को गंभीरता दिखाना चाहिए। बावजूद इसके इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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Anil kumar Reporting
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