परफोरमेंस सुधरी, पर वाहन चोरी ने कराई पुलिस की बदनामी

भादवि की धारा के अपराध का ग्राफ कम करने के साथ पुलिस ने लघु अधिनियम के तहत खूब की कार्रवाई

By: Kuldeep Saraswat

Updated: 06 Jan 2020, 02:42 PM IST

सीहोर. बीते दो साल की अपेक्षा साल 2019 में सीहोर जिले में अपराध का ग्राफ नीचे आया है। अपराध कम होने से प्रदेश स्तर पर पुलिस की परफोरमेंस तो सुधरी है, लेकिन हत्या के प्रयास, लूट और नकबजनी की वारदातों ने पुलिस का मनोबल कम भी किया है। सबसे ज्यादा पुलिस की बदनामी वाहन चोरी की वारदातों ने कराई है, जिले में वाहन चोरी का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। पूरे साल पुलिस पर यह आरोप भी लगते रहे है कि पुलिस वाहन चोरी की एफआईटार लिखने में आनाकानी करती है।

एक तरफ सालभर में भारतीय दंड विधान संहिता के तहत दर्ज अपराध की संख्या में कमी हुई है, वहीं लघु अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई में इजाफा हुआ है। जुआ, सट्टा और अवैध शराब का कारोबार जमकर फला-फूला है, जिसे लेकर पुलिस ने बीते दो साल से ज्यादा अपराध दर्ज किए हैं। अपराध और कार्रवाई के साथ पुलिस पर आरोप भी खूब लगे हैं। श्यामपुर और नसरुल्लागंज थाने से तो पुलिस अधीक्षक नेद कई पुलिसकर्मियों को रिश्वत मांगने को लेकर लाइन भेजा है।

ट्रैफिक सुधारने की कवायद नहीं आई काम
ट्रैफिक सुधारने के लिए पुलिस ने सबसे ज्यादा कार्रवाई मोटर वीकल एक्ट में की हैं, यह कार्रवाई अपने आप में रिकॉर्ड है। पूरे साल में लघु अधिनियम के तहत 14 हजार 858 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिसमें से करीब 13 हजार 052 मोटर वीकल एक्ट में हैं। मोटर वीकल एक्ट में भी सबसे ज्यादा कार्रवाई बाइक चालक और रेत के डंपर चालकों पर की गई हैं। डंपर चालकों पर ओवरलोडिंग और बाइक पर तीन सवारी बिठाने, हेलमेट नहीं लगाने को लेकर चालान बनाए हैं। पुलिस ने ट्रैफिक सुधारने के लिए पूरे साल अभियान के रूप में चैकिंग की है, लेकिन इसका असर कुछ नहीं दिखा है।

अपराध कम होने की दो वजह
- साल 2019 में लोकसभा के चुनाव होने के कारण पुलिस सक्रिय रही। आचार संहिता ज्यादा समय के लिए लगी थी, जिसे लेकर पुलिस ने लगताार बड़े स्तर पर चैकिंग की।
- पुलिस ने पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव को लेकर अपराधियों के खिलाफ बड़ी संख्या में जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की, जिससे अपराधी भयभीत थे।

गंभीर अपराध बढऩे का कारण
वाहन चोरी : चोरी का तरीका बदल गया है। बाहर के बदमाश सीहोर जिले में आकर वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
लूट : फाइनेंस कंपनी और समूह के कलेक्शन एजेंट गांव-गांव से वसूली करते हैं। इनकी वसूली की राशि का इंश्योरेंस रहता है। यह थोड़े से दबाव में राशि बदमाशों को दे देते हैं। चार वारदात फाइनेंस कंपनी के कलेक्शन एजेंटों के साथ ही हुई हैं।
अपहरण : कोई भी नाबालिग लड़की घर से गायब होती है तो पुलिस माता-पिता की शिकायत पर अपहरण ही दर्ज करती है। युवती भले ही खुद की मर्जी से गई हो, लेकिन पुलिस शिकायत पालक के मुताबिक ही दर्ज करती है।

 

दो साल से कम हो रहे अपराध
साल 2017 में पुलिस में भारतीय दंड विधान संहिता के तहत 5 हजार 416 अपराध दर्ज किए थे। साल 2018 में यह ग्राफ घटकर 4 हजार 591 पर आ गया। साल 2019 में यह और भी नीचे आया है, इस साल पुलिस ने 4 हजार 430 मामले दर्ज किए हैं। इसके साथ लघु अधिनियम के तहत पुलिस ने 2018 में 11 हजार 863 कार्रवाई की थीं, जो कि बढ़कर 14 हजार 858 हो गई हैं। यदि जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की बात करें, तो 2018 में 10 हजार 656 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, साल 2019 में इसका ग्राफ बढ़कर 12 हजार 163 पर पहुंच गया है।

लघु अधिनियम के तहत दर्ज अपराध
अपराध 2017 2018 2019
जुआ 295 264 309
सट्टा 301 308 332
आबकारी 811 1145 1138
आम्र्स एक्ट 155 328 322
मोटर वीकल 6745 9432 13052


एक नजर में तीन साल का आपराधिक ग्राफ
अपराध 2017 2018 2019
हत्या 21 34 17
हत्या के प्रयास 42 26 41
डकैती 03 02 00
लूट 20 12 26
नकबजनी 217 156 186
वाहन चोरी 379 270 304
पशु चोरी 24 18 15
अपहरण 95 101 168
दुष्कर्म 134 139 113

वर्जन...
- समाज में जागरूकता के कारण अपराधों की संख्या में कमी आ रही है। पुलिस की मॉनीटरिंग भी पहले की अपेक्षा ज्यादा सख्त हो गई है। पुलिस गांव-गांव संवाद कर रही है, इसका असर दिखाई दे रहा है।
समीर यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीहोर

Kuldeep Saraswat
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