सड़क पर हो गई प्रसूता की डिलेवरी और सिविल सर्जन को पता तक नहीं

 जिला अस्पताल के डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल,  अफसरों की लापरवाही का नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर उठा रहे फायदा, मरीज परेशान


सीहोर। जिला अस्पताल के डॉक्टर और जननी एक्सप्रेस के ड्राइवर की लापरवाही से प्रसूता की सड़क पर डिलेवरी होने के बाद जिला अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ और सिविल सर्जन को सुबह तक पता नहीं चला।

 सिविल सर्जन डॉक्टर गिरीश जोशी का तर्क है कि उन्हें इस घटना के बारे में सुबह करीब 8 बजे, उस वक्त पता चला जब वे रोज की तरह अस्पताल ड्यूटी के लिए पहुंचे। सिविल सर्जन के इस तर्क से स्पष्ट है कि रात को जिला अस्पताल में प्रसूता और दूसरे मरीजों को किस तरह से प्रताडि़त किया जाता है, अस्पताल प्रबंधन को इसकी कोई जानकारी नहीं होती है।
 
सिविल सर्जन को अस्पताल की गतिविधियों की जानकारी नहीं होती है और ड्यूटी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ मनमानी करता रहता है, जिसे लेकर अस्पताल में एक के बाद एक प्रसूता की मौत हो रही है और खुलेआम मरीजों से अस्पताल का स्टाफ वसूली कर रहा है। पिछले दो महीने के अंदर जिला अस्पताल में तीन प्रसूताओं की मौत हुई है, वहीं तीन मरीजों ने इलाज के एवज में रुपए मांगने के आरोप लगाए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने हर मामले जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन कार्रवाई अभी एक भी मामले में नहीं हुई है।

स्वास्थ्य संचालक ने की पूछताछ
प्रसूता की सड़क पर डिलेवरी होने के संबंध में बुधवार को स्वास्थ्य संचालक किरण शेजवार ने भी अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की। स्वास्थ्य संचालक नर्स टै्रनिंग सेंटर में बैठक करने के लिए सीहोर आई हुई थीं। स्वास्थ्य संचालक ने सिविल सर्जन डॉ. गिरीश जोशी से प्रसूता की डिलेवरी सड़क पर होने को लेकर पूरी जानकारी ली। स्वास्थ्य संचालक ने डॉ. गिरीश जोशी को पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण सड़क पर प्रसूता की डिलेवरी होने के मामले को कांग्रेस ने गंभीरता से लिया है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव राहुल यादव के नेतृत्व में कांग्रेस के एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने एसडीएम नरोत्तम भार्गव को ज्ञापन देकर मामले की जांच की मांग की।  कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

जिला अस्पताल में प्रसूताओं की दुर्दशा

 - 22 मार्च को जिला अस्पताल में इछावर के खेड़ली की विवाहिता को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसूता ने अस्पताल में पांच घंटे से ज्यादा समय तक भर्ती रहने के बाद दम तोड़ दिया। एडीएम केदार सिंह ने मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम नरोत्तम भार्गव न्यायिक जांच कर रहे हैं।

 - 26 फरवरी को सीहोर निवासी नाजनीन पत्नी मोहम्मद अहमद खान को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रसूता करीब चार घंटे अस्पताल में भर्ती रही और रात 10.30 बजे जब सीजर करने का समय आया तो डॉ. अशोक मांझी और डॉ. कांती जैन ने सीजर करने से इंकार कर दिया। पीडि़तों ने डॉक्टरों के इस रवैए की शिकायत विधायक सुदेश राय से की। विधायक रात को अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को फटकार लगाई। विधायक के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों ने सीजर किया।

 - 25 फरवरी को आष्टा के शिवखेड़ी निवासी ज्ञानसिंह मालवीय ने जिला अस्पताल में अपनी पत्नी बविता बाई को डीएनसी के लिए भर्ती कराया। बविता  के शरीर में ब्लड की कमी होने से डॉ. अमीता श्रीवास्तव में डीएनसी से पहले ब्लड चढ़ाने की बात कही, लेकिन जब डीएनसी का समय आया तो उन्होंने तीन हजार रुपए की मांग रख दी। पीडि़त ने इसकी शिकायत सिविल सर्जन डॉ. गिरीश जोशी से की, लेकिन सिविल सर्जन के सामने ही ज्ञान सिंह को भला-बुरा सुनना पड़ा। ज्ञानसिंह ने इसकी शिकायत एसडीएम नरोत्तम भार्गव से भी की है और मानवअधिकार आयोग ने संज्ञान लिया। जिला अस्पताल प्रबंधन ने तीन डॉक्टरों की कमेटी बनाई। कमेटी ने जांच कर अस्पताल प्रबंधन को रिपोर्ट भी दे दी, लेकिन अभी तक दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हुई है।

- जुलाई 2015 में एक मामला सामने आया था। जिला अस्पताल में 9 जुलाई को जरखेड़ा निवासी गोपाल सिंह ने अपनी पत्नी रीना बाई को प्रसव के लिए भर्ती कराया। प्रसूता रीना बाई रातभर प्रसव पीड़ा झेलती रही, लेनिक नर्सिस स्टाफ ने डॉक्टर को नहीं बुलाया। ड्यूटी डॉ. अंजना अग्रवाल थीं। रात को अंजना अग्रवाल बिना किसी जानकारी के अस्पताल से अपने रिश्तेदार के यहां चली गर्इं। मैटरनिटी में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर अमिता श्रीवास्तव की थी, उन्होंने भी मैटरनिटी की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी नहीं ली। नतीजा जब सुबह डॉक्टर आए तो सामने आया कि प्रसूता के गर्भ में शिशु की मौत हो गई है और बच्चादानी फट गई है।

 - दो मार्च को इंग्लिशपुरा निवासी सतीश कुल्हारिया ने अपनी पत्नी वंदना कुल्हारिया (24) को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। दोपहर बाद वंदना की डिलेवरी हुई, वंदना ने पुत्र को जन्म दिया था, लेकिन इसके बाद वंदना के इलाज में डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही से  वंदना की मौत हो गई। प्रसूता के परिजन राकेश उर्फ बंटू कुल्हारिया ने बताया कि प्रसूता की मौत को लेकर डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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Bharat pandey Desk
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