रोजाना स्कूल के नहीं खुल रहे ताले, अदिवासी क्षेत्र में स्कूल बेहाल

रोजाना स्कूल के नहीं खुल रहे ताले, अदिवासी क्षेत्र में स्कूल बेहाल

By: सुनील शर्मा

Published: 20 Jul 2018, 01:29 PM IST

सीहोर/लाड़कुई। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के सरकारी स्कूल में छात्र-छात्राओं को शिक्षा मिलना हकीकत से कोसों दूर है। नियमित रूप से स्कूल के ताले ही नहीं खुल रहे हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाड़कुई गांव से लगे आदिवासी क्षेत्र में चार अलग-अलग स्थानों पर चार स्कूलों में दो शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई का जिम्मा दे रखा है। इनमें एक शिक्षक के पास बीएलओ का चार्ज रहने से वह अधिकांश स्कूल में उपस्थित ही नहीं रहते हैं।

सरकार द्वारा भले ही शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षण व्यवस्था के हालात गंभीर हैं। शिक्षण कार्य में केवल कागजों की खानापूर्ति करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ जारी है। संकुल लाड़कुई के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ग्राम मोगराखेड़ा में अलग-अलग स्थानों पर चार स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें मोगराखेड़ा में प्राथमिक और मिडिल स्कूल तो कुछ दूरी पर स्थित हैं, वहीं मोगराखेड़ा टप्पर और आईखेड़ा स्थित स्कूलों में तीन से छह किमी दूर स्थित हैं। मोगराखेड़ा आदिवासी क्षेत्र के चारों स्कूल में ३१२ बच्चे दर्ज हैं।, लेकिन पढ़ाई के नाम पर बच्चों को कई बार स्कूलों में ताले ही लगे मिलते हैं।

तीन दिन से नहीं खुला स्कूल
मोगराखेड़ा टप्पर स्कूल बेहाल अवस्था में है। स्कूल के छात्र अरविंद बारेला ने बताया कि तीन दिन से रोजाना बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन स्कूल के तीन दिन से ताले ही नहीं खुल रहे हैं। इसके कारण सभी वापस घर लौट जाते हैं।

बस! तिरंगे के दिन मिलती है खीर
स्कूलों में मध्यान्ह भोजन भी बुरे हाल में है। बच्चों को मनमानी तरीके से थोड़ा-बहुत कभी कभार खाना दिया जा जाता है। कक्षा पांचवीं की छात्रा सजनी ने बताया कि सर खीर हमें केवल तिरंगे के दिन (१५ अगस्त और २६ जनवरी) को ही मिलती है। इसी तरह सभी प्राथमिक शालाओं में प्रार्थना के बाद सप्ताह में 3 दिन प्रत्येक बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है, लेकिन यहां किसी भी स्कूल में दूध नहीं पिलाया जाता है।

यह है हकीकत
-शासकीय प्राथमिक शाला मोगराखेड़ा टप्पर में 62 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन यहां कभी-कभी ही शिक्षक पहुंचते हैं, अधिकांश स्कूल में ताला डला रहता है।

-शासकीय प्राथमिक शाला में 60 छात्र-छात्राएं के नाम दर्ज है। यहां शिक्षक के रूप में भैरो सिंह हरियाले पदस्थ हैं। उनके पास बीएलओ का भी चार्ज है, चुनावी कार्य की जिम्मेदारियां के चलते उनका ज्यादातर समय बैठकों में रहता है। इसके कारण इस स्कूल के बच्चों की पढ़ाई भी भगवान भरोसे रहती है।

- मिडिल स्कूल मोगराखेड़ा में 154 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां शिक्षक विनीत दीक्षित पदस्थ हैं। डेढ़ सौ से अधिक बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। स्कूल में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है।

- शासकीय प्राथमिक शाला आई खेड़ा में 40 छात्र-छात्राओं के नाम दर्ज हैं। यहां का स्कूल भी शिक्षक के पदस्थ होने का इंतजार कर रहा है। स्कूल के कभी-कभी ताले खुल जाते हैं तो बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंच जाते हैं।

-मोगराखेड़ा में आने वाले चारों स्कूलों में शिक्षक की जिम्मेदारी उनके व एक अन्य शिक्षक के भरोसे हैं। उनके पास बीएलओ का भी चार्ज है। इसके चलते एक साथ चारों स्कूल संचालित करने में परेशानी होती है। इसके संबंध में वरिष्ठ कार्यालय को अवगत करा दिया गया है।
-भैरोलाल हरियाले, प्रभारी शिक्षक

-आपके द्वारा मुझे जानकारी मिली है, मैं इस पर कार्रवाई प्रस्तावित करवा रहा हूं। मध्यान्ह भोजन का मामला जनपद का है।
भूपेश शर्मा, बीआरसी नसरुल्लागंज

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सुनील शर्मा
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