जंगल में शिकार रोकने बनाएंगे चारागाह, बाघ की मुश्किल होगी आसान

जिले में छह साल के भीतर चार बाघ, दो तेंदुए की मौत, 100-100 एकड़ के होंगे चारागाह

By: Kuldeep Saraswat

Published: 11 Jan 2021, 01:26 PM IST

सीहोर. जिले के जंगल में विचरण कर रहे बाघ, तेंदुए, सांभर के शिकार और हादसे में मौत के बढ़ते मामलों को देख वन विभाग हरकत में आया है। जंगल में वन्यप्राणी की सुरक्षा के लिए 100-100 एकड़ के दो चारागाह बनाए जा रहे हैं, जिसमें से एक का काम शुरु हो गया है। चारागाह के लिए वीरपुर बीट और इछावर रेंज को चिहिन्त किया गया है। पहले इछावर रेंज के जंगल में चारागाह बनेगा, जिसका काम प्रारंभ हो गया है। इसके बाद वीरपुर बीट में निर्माण कार्य चालू होगा। चारागाह बनने के बाद भोजन की तलाश में न तो हिरण बाहर आएंगे और बाघ, तेंदुए भी शिकार के लिए जंगल से बाहर नहीं निकलेंगे। इससे किसान की फसल में होने वाला नुकसान बचेगा और वन्यप्राणी भी सुरक्षित रहेंगे।

जानकारी के अनुसार वन विभाग वीरपुर और इछावर रेंज के जंगल में 100-100 एकड़ जमीन में करीब 40 लाख रुपए से चारागाह बनाएगा। एक चारागाह के अंदर चारा तैयार करने के साथ पानी के लिए चार छोटे तालाब बनाएं जाएंगे। इसके आसपास सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। चारागाह बनने के बाद जंगल के अंदर तैनात बाघ, तेंदुआ, काला हिरण, चीतल बाहर नहीं आ सकेंगे। अफसरों ने बताया कि बाघ, तेंदुए पर नजर रखने 12 कैंप बनाए हैं। एक कैंप पर दो कर्मचारी को तैनात किया गया है। वीरपुर, सीहोर और बुदनी वन परिक्षेत्र में सबसे ज्यादा बाघ, तेंदुए का मूवमेंट देखा गया हैं। इनकी ट्रेप कैमरे से निगरानी की जा रही है। मालूम हो, वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए हर साल करीब 25 लाख रुपए का बजट मिलता है, जिससे पीने के पानी आदि की व्यवस्था करनी होती है।

कब कहां कैसे हुई बाघ, तेंदुए की मौत
बुदनी वन परिक्षेत्र में 6 जनवरी 2020 की रात को बाघ जंगली ***** का शिकार करते हुए कुएं में गिर गया था, जिससे मौत हो गई थी। इससे पहले 28 दिसंबर 2016 को बुदनी के मिडघाट क्षेत्र में गर्भवती बाघिन की इंदौर जबलपुर इंटरसिटी और 22 अप्रेल 2016 को मिटघाट क्षेत्र में महादेव घाटी पर बाघ के शिप्रा एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौत हुई थी। मार्च 2014 में वीरपुर रेंज में करंट से बाघ का शिकार किया गया था। बताया जाता है कि तीन साल के अंदर दुर्घटना में दो तेंदुओं की भी मौत हुई है।

तेजी से साफ हो रहा है जंगल
सीहोर के आष्टा, लाड़कुई और इछावर क्षेत्र में तेजी से जंगल साफ हो रहा है। जंगल कटाई के साथ शिकार के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक सीहोर जिले में एक साल के अंदर 46.10 वर्ग किलोमीटर जंगल कटा है। प्रदेश में सबसे ज्यादा जंगल सीहोर जिले में कटा है। शिकार के मामले भी सीहोर में बहुत होते हैं। वन अमला जंगल की सुरक्षा पर बजट तो बहुत खर्च करता है, लेकिन लकड़ी चोरी और वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है।

एक नजर में जंगल और वन्यजीव
- 1 लाख 56 हजार हेक्टेयर जंगल
- 50 जंगल में तेंदुए
- 06 जंगल में टाईगर
- 1000 चीतल
- 1000 काला हिरण
- 250 का कुल वन स्टॉफ
- 126 बीट


वर्जन...
बाघ, तेंदुए और अन्य वन्य प्राणी की निगरानी करने लिए हमारी टीम लगी हुई है। वीरपुर रेंज और इछावर रेंज में चारागाह बनाया जाएगा। इसमें एक जगह काम चालू हो गया है। इसका उद्देश्य यह हैकि चारागाह में सभी तरह की सुविधा मिलने से वन्य प्राणी बाहर नहीं आएं और शिकार या फिर अन्य दुर्घटना में उनकी मौत नहीं हो।
रमेश गनावा, डीएफओ वन विभाग सीहोर

Kuldeep Saraswat
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